रिश्तों को संभालना पड़ता है – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

 ” सुन मानसी…मुझे मार्केट में कुछ काम है, इसलिए मैं जल्दी जा रही हूँ…तू किसी और से लिफ़्ट ले लेना।” कहकर दिव्या ने लैपटाॅप बंद करके अपने बैग में रखा और कंधे पर डालकर ऑफ़िस से बाहर निकल गई। उसने अपनी स्कूटी ‘सिटी माॅल ‘ के पार्किंग में रखी और घर के लिये कुछ ज़रूरी … Read more

अपशगुन – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

” माफ़ कीजियेगा भाभीजी…अब हमारे आकाश की शादी आपकी सिमरन के साथ नहीं हो सकती…।” देवीलाल ने सगाई का सामान लौटाते हुए प्रमिला जी से कहा तो वो चौंक गई।   ” शादी नहीं हो सकती!…मगर क्यों भाईसाहब? सिमरन या हमसे ऐसी क्या भूल गई है जो आप…।आपकी कोई डिमांड हो तो बताइये…मैं पूरा करुँगी…।”     ” … Read more

बेटा विदेश में है – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

 दो वर्ष पूर्व मेरा जबलपुर जाना हुआ था।पति के ऑफ़िस से मिले गेस्ट हाउस में फ़्रेश होकर पति महोदय जब अपने काम के लिये निकल गये तब मैंने अपनी सहेली मीता को फ़ोन किया।हाय-हैलो करने के बाद उसने कहा,” चल..’आंटी काॅफ़ी हाउस’ में बैठकर बातें करते हैं।” कहकर उसने मुझे लोकेशन शेयर किया और मैं … Read more

भाभी माँ – विभा गुप्ता Moral Stories in Hindi

 ” भाभी माँ…मैं पास हो गया।आपका बेटे ने पूरे जिले में टाॅप किया है।आप मुझे आशीर्वाद दीजिये कि…।” कहते हुए दीपक अपनी भाभी माँ सुमित्रा के चरण-स्पर्श करने लगा तो सुमित्रा उसे अपने दोनों हाथों से उठाकर अपने सीने-से लगाते हुए बोली,” बहुत-बहुत बधाई मेरे लाल…खूब पढ़ो…खूब तरक्की करो..मेरा आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ है मेरे … Read more

अपने मन की सुनना – विभा गुप्ता Moral Stories in Hindi

” प्रतिभा जीजी…. क्या करुँ…कुछ समझ नहीं आ रहा है।आप तो जानती ही हैं कि मानसी ने एनडीए की परीक्षा पास कर ली है।अब उसे इंटरव्यू के लिये दिल्ली जाना है।लेकिन लोग कह रहें हैं कि ज़माना बहुत खराब है..अकेली लड़की..पता नहीं वहाँ कैसे-कैसे लोग होंगे तो…आप क्या कहती हैं?”        ” देख रंजना…लोगों का तो … Read more

बुढ़ापा सार्थक हो गया – विभा गुप्ता Moral Stories in Hindi

 स्त्री हो या पुरुष, बुढ़ापा के बारे में सोचकर सभी चिंतित हो जाते हैं।जिनके बेटे हैं वो सोचते हैं कि अगर बहू सेवा न की तो…और बेटी वाले सोचते हैं कि काशः हमारे भी एक बेटा होता तो बुढ़ापा आराम से कट जाता।लेकिन श्री महावीर प्रसाद और श्रीमती कनकलता देवी जी का कहना था कि … Read more

रिश्ते अनमोल होते हैं – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

” ये क्या भाभी…आप कैसी साड़ी लेकर आईं हैं?बड़े घर में लेन-देन कैसे करना चाहिये…इसका सलीका आपको बिल्कुल भी नहीं है।आखिर मिडिल क्लास की जो ठहरीं…।” कहते हुए चारु ने गुस्से-में अर्चना भाभी द्वारा लाई हुई साड़ी को पलंग से उठाकर नीचे फेंक दिया।उसकी भाभी रोती हुई चली गई।तब उसकी सास उसे समझाते हुए बोली,” … Read more

मेरे हमसफ़र -विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

आज सुबह से ही आनंदी जी के शरीर में गज़ब की फ़ुर्ती थी।कभी सुगना को कहतीं कि मलाई कोफ़्ते में नमक ठीक से डालना तो कभी घर के नौकर नंदू को आदेश देती ,” छोटे भईया के कमरे में पानी रखना मत भूलना।” दरअसल आज उनकी शादी की पचासवीं सालगिरह थी।शाम को उन्होंने पार्टी रखी … Read more

बेटा है तो क्या हुआ…- विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

 ” अरी जन्मजली…ये क्या अनर्थ कर दिया तुमने! अपने ही कोख जाये को सज़ा दिलवाते हुए तेरी जीभ नहीं जल गई…।” कोर्ट से बाहर निकलते हुए रामरति देवी ने अपनी बहू कलावती को दुत्कारा पर वह चुपचाप सुनती रही।वह तो एक ज़िन्दा लाश बन चुकी थी।यंत्रवत चलते हुए सबके साथ वह गाड़ी में बैठ गई।गाड़ी … Read more

दिल के रिश्ते -विभा गुप्ता Moral stories in hindi

 ” नीतू…अब तुम्हें इन लोगों की गुलामी नहीं करनी पड़ेगी।मुझे दिल्ली में नौकरी मिल गई है… हम अगले महीने ही वहाँ शिफ़्ट हो जाएँगे..।” सिद्धार्थ ने धीरे-से अपनी पत्नी से कहा जो तह किये हुए कपड़ों को अलमारी में रख रही थी।सुनकर वह आश्चर्य-से बोली,” सच!…लेकिन फिर अम्मा जी को क्या कहेंगे..।”     ” माँ को … Read more

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