आधुनिकता के नाम पर अपनी मर्यादा ना भूले— राशि रस्तोगी 

आज सुबह नीताजी जब मॉर्निंग वाक पर गयी, तो उन्हें उनके बेटे का दोस्त राहुल मिला |

रोहन और राहुल दोनों मित्र पुणे में जॉब करते थे और साथ फ्लैट में रहते थे |

“अरे, तू कब आया राहुल पुणे से? रोहन को भी ले आता अपने साथ ” यूँ हसते हुए उन्होंने राहुल से कहा

“आंटी, मै और रोहन अब साथ में नहीं रहते, मुझे लगा आपको पता होगा ” राहुल निगाह नीचे किये बोला |

“क्यूँ बेटा, क्या हुआ तुम दोनों का झगड़ा हुआ क्या? मुझे तो कुछ बताता ही नहीं रोहन आज कल!” नीता जी बोली|

“आंटी, झगड़ा नहीं | पता नहीं आपको कैसे बताऊं… हम्ममम.. रोहन अब एक लड़की, नैना के साथ रहने लगा है.. ” राहुल

“क्या!!” रोहन की मम्मी को अपने कानों पर विश्वास ही ना हुआ, “फिर से बताना जरा” त्योंरिया चढ़ाते हुए वो बोली |

” आंटी, सच में रोहन आपको कुछ नहीं बताता ” इतना बोल राहुल  जॉगिंग करता हुआ आगे निकल गया |

नीतजी ने, घर आते ही गुस्से में, रोहन को फ़ोन मिलाया |

” हेलो रोहन, ये मै क्या सुन रही हूँ? “

” गुड मॉर्निंग मम्मी, क्या बात हुई, आज सुबह सुबह फ़ोन! ” रोहन

” तू राहुल के साथ नहीं रहता, किसी लड़की के साथ रह रहा है, सच बोलना, तूने मुझसे इतनी बड़ी बात छिपाई ” नीतजी ने कड़ी आवाज़ में बोला |




“बड़े बड़े शहरों में छोटी छोटी बातें होती ही रहती है स्वीट मम्मी” रोहन ने हसते हुए माँ के मूड को बदलने की कोशिश की |

” चुप कर, ये ज्यादा बड़े शहर वाला मत बन समझा, तेरा जन्म छोटे शहर में हुआ है और तेरे माँ, पिता आज भी इसी छोटे शहर में रहते है |

नौकरी के लिये बाहर भेजा है तो ये नहीं मेरे दिए हुए सारे संस्कार भूल जाओ |

तू कैसे मेरी दी हुई शिक्षा भूल गया, कि तेरी वजह से किसी लड़की की आँखों में आसू ना आये” |

” माँ, मैने किसी से कोई जबरदस्ती नहीं की है | मै और नैना प्यार करते है, शादी के बारे में भी सोच रहे है |

ये शादी से पहले साथ रहने को लिव इन रिलेशन कहते है, इससे पता लग जायेगा कि शादी के बाद हमारी आपस में बनेगी या नहीं |

शादी के बाद यूँ घुट घुट के रहने से अच्छा है ना एक दूसरे को पहले ही परख ले “

रोहन अब सीरियसली बात करने लगा |

” बस, बहुत हो गयी तुम दोनों की परख, कैसा प्यार है तुम लोगो का, जिसमे भरोसा ही नहीं अभी तक | अच्छा अगर इस लड़की के साथ रहना अच्छा नहीं लगा, फिर? फिर क्या करेगा ” नीता जी 

रोहन अब चुप था |

” बेटा, रिश्ते टेस्ट और ट्रायल पर नहीं चलते है |

इन्हे सींचना पड़ता है विश्वास और प्यार से, अगर अभी भी भरोसा नहीं बना तो भविष्य में भी नहीं बनेगा , ये मेरा अनुभव है |ये लिव इन रिलेशन छोड़, दोनों आज़ाद रहो | मन से साथ रहो और एक दूसरे को जानो | रिश्तों की मर्यादा को समझो”

“हां, मम्मी शायद मै ही भटक गया था, सॉरी मम्मी

मै नैना को भी समझाता हूँ, जो आपने मुझे समझाया “

इतना बोल रोहन फोन रख देता है |

@स्वरचित 

आधुनिक होने के दिखावे में लोग रिश्तों की मर्यादा को भूलते जा रहे है! आप सभी के इस बारे में क्या विचार है कमेंट में अवश्य साझा करें |

कहानी अच्छी लगे तो लाइक करें और कमेंट करें , धन्यवाद

–राशि रस्तोगी 

 

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