आत्मनिर्भरता बनी पहचान (भाग 1) – निशा जैन: Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : लीना मध्यम वर्गीय परिवार की पढ़ी हुई सभ्य , सुशील लड़की थी। पढ़ाई में शुरू से ही होशियार थी । अब तक की पूरी पढ़ाई प्रथम श्रेणी से पूरी की थी और दसवीं कक्षा में तो उसे गार्गी पुरस्कार भी मिला था जो सरकार की तरफ से मिलता है। बहुत गर्व था उस पर उसके सारे घर वालों को।

              बी ए, एम ए (हिंदी) करने के बाद उसका बीएड में भी नंबर आ गया तो अब उसके पास प्रोफेशनल डिग्री भी हो गई थी।

              उसकी शादी भी अच्छे लड़के से हो गई थी जो अच्छी कंपनी में अच्छी पोस्ट पर  था। कुल मिलाकर अब तक की जीवन यात्रा लीना के लिए खुशियों से भरी हुई थी।

शादी के बाद उसके ससुराल वाले चाहते थे कि बहू घर पर ही रहकर उनके बेटे का ध्यान रखें क्योंकि बेटे की नौकरी आई टी सेक्टर में थी तो देश के किसी भी राज्य में ट्रांसफर हो सकता था पर लीना की पढ़ाई उसके राज्य  से हुई थी तो उसकी सरकारी नौकरी उसके ही राज्य के अंतर्गत आने वाले ही किसी गांव या शहर में लगती। फिर बेटे बहु को अलग अलग रहना पड़ता तो सबने यही सोचा और लीना ने भी सहमति दे दी ये सोचकर कि डिग्री तो मेरे पास है ही कभी भी प्राइवेट नौकरी करके आत्मनिर्भर बन सकती हूं और शादीशुदा जिंदगी में भी कोई दिक्कत नही आयेगी।

              पर शादी के कुछ दिनो बाद ही लीना को अपने ससुराल वालों का अलग ही रूप देखने को मिला। वो लोग आए दिन लीना को उसके रहन सहन को लेकर टोकने लगे ।  लीना सादा विचारों वाली सिंपल सी रहने वाली लड़की थी। उसे मेक अप करना बिलकुल पसंद  नही था तो वो जैसी थी वैसी ही रहती और इसलिए उसके पास कुछ सामान भी नही था सिवाय सिंदूर और लिपिस्टिक , बिंदी आदि के अलावा तो बस उसकी ननद उसका मजाक बनाती यह कह कर  कि “भाभी आपको कुछ आता भी है, बिलकुल गांव की गंवार लगती हो आप जब ऐसे रहती हो ,आपको देखकर कोई कह नहीं सकता कि आप इतना पढ़ी हो “और उसकी सास भी अपनी बेटी का पक्ष लेती और लीना चुपचाप उनकी बाते सुनती क्योंकि उसके मम्मी पापा ने सिखाया था कि अपने सास ससुर को अपने मां बाप समझना और कभी उल्टा मत बोलना उनसे। पर मन ही मन उसको बहुत दुख होता और सोचती काश मै भी आज नौकरी कर आत्मनिर्भर बन गई होती तो ये सब मेरा मजाक नही बनाते

               एक दिन उसके घर कुछ रिश्तेदार  आए थे लीना के मामा ससुर और उनका परिवार। लीना ने उन सबकी खूब आवभगत की ,वो सब बहुत खुश हुए और बोले जीजी आपकी बहू तो बड़ी समझदार और सुशील है इतनी पढ़ी हुई है फिर भी कितनी सादा रहती है।

               तभी तपाक से ससुर जी बोले “अजी हिंदी में एम ए पास भी कोई डिग्री है भला , कौड़ी के भाव भी नही पूछता इस डिग्री को कोई।कुछ काम की नही है ये डिग्री दिखाने के अलावा ।”

               लीना रसोई में खड़ी हुई सब सुन रही थी तो उसे बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई सबके सामने । और  मन ही मन बोली

              ( जब शादी करके लाए थे तब सब कुछ पता करके ही तो लाए थे मेरे बारे में, फिर ऐसे बार बार लज्जित क्यों कर रहे हैं कि कभी  गांव की गंवार लगती हूं  कभी कुछ काम की नही हूं । और अब उसे अपने ही निर्णय पर पछतावा हो रहा था और सोचती काश मैने उस समय एक कदम बढ़ा लिया होता तो आज कितने कदम आगे निकल गई होती)

              थोड़े दिनो बाद लीना के देवर की भी शादी हो गई और उसकी  देवरानी भी आ गई । वो  घर से ही एमवे कंपनी का ऑनलाइन का  छोटा मोटा ही काम करती थी पर कहने को तो बिजनेस ही करती थी तो अब तो लीना को और भी सुनना पड़ता सबसे कि देखो छोटे की बहु को कितनी स्मार्ट है, घर सम्हालने के साथ साथ साथ पैसे भी कमाती है।

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आत्मनिर्भरता बनी पहचान (भाग 2) – निशा जैन: Moral Stories in Hindi

स्वरचित और मौलिक

निशा जैन

दिल्ली

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