त्यौहार तो बहाना है परिवार की एकता बनाना है – सरगम भट्ट 

इस दिवाली पर रीता ने कुछ अलग ही करने को सोच रखा था , उसने पूरे परिवार को एक करने की कसम जो खा रखी है । पूरे परिवार के नफरत को खत्म करके , सबको प्यार से एक साथ देखना चाहती है । यह उसके लिए एक सपना ही था ।

हुआ यह था कि , जब वह शादी करके आई थी , वह इस घर से बिल्कुल अनजान थी । उसने अपनी चाची सास ( मीना जी ) जो कि उसकी जेठानी ( सुमन ) की बुआ थी , उनके पैरों में दर्द था , तो रीता ने उनके पैरों की सिकाई गर्म पानी से कर दी ।

बस इतनी सी बात को लेकर उसकी सास ( कलावती जी ) आग बबूला हो गई । उन्होंने अपनी बड़ी बहू सुमन पर यह इल्जाम लगा दिया कि , तुमने ही कहा होगा करने के लिए , वह क्या जाने इस घर में क्या होता है ! क्या नहीं !

सुमन और रीता ने लाख अपनी सफाई दी , लेकिन कलावती जी को कोई फर्क नहीं पड़ा , और उन्होंने हंगामा मचा दिया ।

यह सब देख कर सुमन के पति अमर ने अपना ट्रांसफर करवा कर, अपनी पत्नी के साथ दूसरे शहर चला गया ।

और कुछ ही दिनों में रीता भी अपने पति समर के साथ , उसके पोस्टिंग वाली जगह चली गई ।



तभी से सुमन , रीता और कलावती जी में नाम मात्र ही संबंध रह गया था , दूरियां इतनी बढ़ गई थी कि , लोग एक दूसरे को देखना नहीं चाहते थे ।

रीता तो हर त्यौहार में आती थी , लेकिन सुमन किसी भी त्योहार में नहीं आई ।

रीता खुद को इसके लिए हमेशा दोषी मानती थी , जबकि उसका कोई कसूर भी नहीं था ।

उधर सुमन भी अपने आप को दोषी मानती थी , कलावती जी भी समझ चुकी थी कि इसमें दोनों बहू का कोई कसूर नहीं है , लेकिन यह बात मानने के लिए उनका अहम आड़े आ रहा था ।

इस बार रीता ने प्लान किया , और सुमन के पास फोन करके बोली, भाभी इस बार मैं नहीं जा रही दीपावली में।

और फोन रख दिया, सुमन यह सुनकर परेशान हो गई कि अकेले मम्मी जी कैसे मैनेज करेंगी, दिवाली में उसने आने की तैयारी बना ली।

दीपावली के 2 दिन पहले घर पहुंची तो ,अपने स्वागत नहीं पूरे परिवार को खड़ा देखकर, उसकी आंखों से आंसू बहने लगे।

वह समझ गई यह सब रीता नें हीं किया है।

वह रीता के गले लग कर रोने लगी और भगवान को धन्यवाद देने लगी इतनी प्यारी और समझदार बहन जैसी देवरानी देने के लिए।

आप सभी को मेरी यह कहानी कैसी लगी जरूर बताएं साथ ही लाइक कमेंट करें और मुझे फॉलो कर सकते हैं।

सरगम भट्ट 

गोमतीनगर लखनऊ

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