सर्वगुण संपन्न – रचना कंडवाल

कितनी बार कहा है ज्यादा मत बोला कर।ऐसे दांत निकालने का क्या मतलब है? ससुराल जाएगी तो बस हम सबकी नाक कटवा कर ही मानेगी ये लड़की।ये प्रवचन थे हमारी माता जी के हमारे लिए। हां हां ठीक है। नहीं ‌हंसते तुम कहो तो चौबीस घंटे रोते रहें

ऐ लड़की! हम तो चुप रहते हैं। ससुराल में जब वो लोग ये ढंग देखेंगे तो….. तो क्या? ज्यादा न बोलो चावल बीन रही हो उसे बीनो। तब तक ‌दादी ने भी बहती गंगा में स्नान कर लिया। बहू ये लक्षण कहां से आए इस लड़की में हमारा बेटा तो गाय है। जरुर तुम्हारे गुण आ गये हैं इसके अंदर। मां ने गुस्से से हमें घूरा तो हम उठ कर चल दिए। दोनों सास‌ बहू ‌प्रंचड प्रकोप से निहार रही थी।

 रिश्ता आया था हमारे लिए। हमें बताया कि लड़का बहुत स्मार्ट है। सुशील है। ऊपर से सरकारी नौकरी है। घर बार बहुत अच्छा है जमीन जायदाद वाले लोग हैं…पर मां हम तो कतई सुशील नहीं हैं। तुमने उन्हें हमारे बारे में बताया? क्या? वही जो तुम कहती रहती हो। बदतमीज, बेवकूफ,गज भर लंबी जुबान और भी जिन गुणों से नवाजा हुआ है तुमने। हां वो सब बता दें। तब तो हो गया रिश्ता तुम्हारा। यहीं पड़ी पड़ी बूढ़ी हो जाओगी। वैसे जाने किस बेचारे के नसीब फूटे होंगे।जो तुम्हें ले जायेगा। शाम को देखने आ रहें हैं। 

अच्छे से तैयार होना।जो कुछ पूछें गर्दन हिला कर जवाब देना। जितनी जरूरत हो सिर्फ उतना ही बोलना बस। आ गये शाम को। पिता जी काफी कुछ नाश्ता, मिठाई लाए। सब‌ कुछ सजा दिया गया नाश्ता भी और हमें भी।अब हम सुंदर तो थे ही। मां और दादी ने इतनी तारीफ कर दी सोलह कलाओं में निपुण। हमें आश्चर्य हुआ कि ये दोनों कितनी झूठी हैं। हमारे अंदर कितने गुण हैं। हैं हम तो सर्वगुण सम्पन्न हैं। हमें आज ही पता चला। दोनों सास बहू कितनी बुरी हैं। फिर हमें लड़के के आगे बिठा दिया।

 उसने हम से सवाल जवाब किए हमने भी नीचे सिर झुका कर हां ना में जवाब दिए। हमारी दशा बिल्कुल उस बैल जैसी हो गई थी जो हांकने पर मुंडी हिला कर हां ना करता है। लड़के ने हमें कहा आपकी इच्छा क्या‌ है?ऐसे पूछा जैसे आखिरी इच्छा हो? बोलना तो चाह रहे थे कि हमें बोलने दिया जाय।पर चुप‌ रहे। उनके जाने के बाद मां ने बोलीं तुमने ज्यादा तो नहीं बोला। ज्यादा पटर पटर करने से बात बिगड़ सकती है। 

 अरे मां! सच्ची हमने कुछ नहीं बोला।पर कहीं ये हमें ऐसे ही गूंगा तो नहीं बना देंगे। हम ऐसे नहीं रह सकते। पर लड़के वालों ने हां कर दी। कभी कभी मति मारी जाती है। फिर हमारा रिश्ता हुआ और शादी भी। और शादी के बाद हम बोलते रहते हैं । और पतिदेव सुनते रहते हैं।  और सुनिए मजे की बात हमारी सासू मां ने भी हमें कुछ तमगों से सम्मानित किया है वो हम यहां नहीं बताना नहीं चाहते।

वैसे एक पते की बात है।कोई हमारे अंदर कितनी भी कमी ढूंढे।पर हमें अपने आप को सर्वगुण संपन्न समझना चाहिए।लोग तो किसी के बारे में अच्छा बोलने से रहे। इसलिए अपने बारे में  अच्छा अच्छा सोचिए।अपनी पर्सनल प्रशंशा करते रहना बहुत जरूरी है।हम तो बहुत मितभाषी और मृदुभाषी हैं। फिर भी हमने कभी घमंड नहीं किया।

 

© रचना कंडवाल

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