लत – कंचन आरज़ू

कहते हैं लत कोई भी अच्छी नही पर लग जाए तो कोई क्या करे ,लाख जतन कर लो पर छूटती नहीं। अब अम्मा को ही ले लो सबके इंतज़ार करने की बुरी बीमारी लगी है , वहीं दलान में बैठे बैठे हर आने जाने वाले पर नज़र रखती है।

क्या मजाल कि उनकी नज़र से बचके कोई चला जाए।

और इ मुई घड़ी तो और जी का बाय है टुकुर टुकुर हर वक्त ताकती रहती है।

और अम्मा की आंख है कि हर वक्त उसी पे टिकी रहती है।

कौन कितने बजे आया कौन कितने बजे गया नहीं आया तो काहे नहीं आया ,गया तो काहे गया।

हजार सवाल का जवाब देने पड़ते हैं तभी तो रानी उनके सामने जाने से कतराती हैं ।अरे उनके का वो तो हर एक से कतराती हैं।

सबके कोई न कोई बुरी आदत है।

अब भौजी के ही ले लो हर वक्त काम में ही लगी रहती है दो पहर बैठके कभी सुस्ताते नहीं देखा ।एकदम अम्मा पे गई है ।

ओहर होरी काका के देख लो तो हर समय हुक्का गुड़गुड़ा ते रहते है।

जब कि दया के मरीज हैं हाई वी.पी और सुगर अलग है।


अरे चलो वो पीछे है तो पीएं ,कोई जिम्मेवारी नहीं है सब जिम्मेदारी से मुक्त हो गए पर पर दादा के का कहे।

वो भी काम धंधा तोड़के उन्ही के साथ बैठे रहते हैं।

अब बिचारी भौजाई अकेले कितना घर संभाले।

तीन गो बच्चे हैं सबके पढ़ाई लिखाई खाना खर्चा सब तो है।

हम देखते हैं पर वो चुप रहती है एक शब्द बोलती तक नहीं।अब दिक्कत परेशानी तो दादा के समझे चाही ना।

इतने में किसी से दरवाजा खटखटाया बुआ बुआ पापा…….पापा ।

अवाक डरी सहमी सी दौड़ती भागती बाहर आई ।

और बोली का हुआ पापा को……।

बुआ बुआ पापा गिरे पड़े हैं अम्मा दुकान गई है हमसे उठ नहीं रहे हैं।

कहती हुई घसीटते हुए कमरे में ले गई।

तो उसने देखा वो बेहोश पड़े थे और उसकी सांस तेज तेज चल रही थी।

इतने में भाभी भी आ गई।किसी तरह लाद फाद कर सब अस्पताल ले गए।


वहां पहुंच कर तो इलाज हो गया पर , डाक्टर ने हार्ट अटैक बताया साथ ही तमाम नशीली पदार्थों से दूर रहना को कहा।वो तो सब ठीक है पर घर कैसे चले ,बिल जो लम्बा चौड़ा बन गया

और पास में उतने पैसे थे नहीं लिहाजा पत्नी को अपने जेवर गहन रखकर अस्पताल का बिल भरना पड़ा।

तब जाके वो घर आए।

पर इसी के साथ उनके दीमाग में ये बात घर कर गई कि अगर हम तम्बाकू न खा रहे होते तो शायद आज इसे अपने गहने गहन न रखने पड़ते।

ब उसी समय उन्होंने प्रण किया कि अब से वो तम्बाकू या नशे जैसे किसी भी पदार्थ का सेवन नहीं करेंगे।

साथ ही इन्होंने काका को भी न सेवन करने की हिदायत दी।

जिसे सुन सुरेखा बुआ बहुत खुश हुई कि चलो कम से कम इसी बहाने ही सही पर इनकी लत तो छूटी।

स्वरचित

कंचन आरज़ू

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