कहाँ लिखा है की बेटियां सहारा नहीं बनती – संगीता अग्रवाल

कल की चिंता मे तुम आज का सुकून खो रही हो पायल..साथ ही रिश्ते भी….. अभी हमारे बेटे की उम्र ही क्या है… कल जब वो बड़ा होगा तब तक उसके लिए भी इंतज़ाम हो जायेंगे अभी भाई साहब की बेटियों की पढ़ाई उनके सपने ज्यादा जरूरी है..! मुदित ने अपनी पत्नी पायल को समझाते हुए कहा.

” पर मुदित मैं तो ये कहती हूँ भाई साहब को जरूरत क्या बेटियों को पढ़ाने की इतना… एक दिन जाना तो उन्हे ससुराल ही है ना.. फिर क्यों भाई साहब अपनी पूंजी के साथ- साथ हमारे पैसे भी उडाने मे लगे उनपर!” पायल गुस्से मे बोली.

” पायल तुम खुद औरत होकर उन बच्चियों को नही समझ पा रही कितनी होशियार हैं वो दोनो ये तो तुमने देखा ही है रिया का सपना है डॉक्टर बनाना और दिया आई. पी. एस ऑफिसर बनना चाहती ये भी तुमसे छुपा नही…भैया तो बोले भी थे अपनी दुकान बेचने की मैने ही मना किया उन्हे उनकी बेटियां हमारी भी बेटियां हैं!” मुदित बोला.

” तुम्हे जो करना करो दानवीर कर्ण बनते बड़े कल को जब यही बेटियां तुम्हे पूछेगी नही तब पता चलेगा!” ये बोल पायल सो गई.

मुदित और तरुण दो भाई हैं दोनो एक ही घर मे अलग अलग हिस्से मे रहते पर दोनो के सुख दुख सांझा हैं… तरुण के जहाँ दो बेटियां है वही मुदित के केवल एक बेटा यूँ तो पायल की अपनी जेठानी शालिनी से अच्छी पटती है… बच्चियों को भी पायल प्यार करती है….पर बात पैसे की हो तो एक दीवार खिंच ही जाती.. तरुण एक दुकान चलाता है जबकि मुदित अच्छी नौकरी मे है जिसकी तनख्वाह भी अच्छी है… तरुण की बेटी का दाख़िला एम.बी.बी.एस. मे करवाने के लिए पैसों की जरूरत है जिसके लिए मुदित ने एक बड़ी राशि देने की बात की है इसलिए पायल नाराज है.

” चाची मेरा दाख़िला हो गया आप सबकी बदोलत… मैं बहुत खुश हूँ !” रिया चाची के गले लगते हुए बोली .

” अच्छी बात है!” पायल ये बोल अपने कमरे मे आ गई .


शालिनी समझ गई पायल नाराज है.. नाराजगी का कारण भी वो जानती है .. इसलिए ही उसने तरुण को दुकान बेचने की कहा था पर भाई जैसे देवर को भी नाराज नही करना चाहती थी.

इधर रिया की एम.बी.बी.एस. चल रही थी उधर् दिया भी अपनी हर परीक्षा पास करती रही और आगे बढ़ती रही.

आज रिया और दिया दोनो अपना मुकाम पा चुकी हैं दोनो इसे लिए अपने माँ बाप के साथ साथ अपने चाचा चाची को भी पूरा श्रेय देती हैं! मुदित और पायल का बेटा भी बारहवीं की परीक्षा दे चुका है।

” मुदित कितनी देर मे पहुँच रहे हो घर जानते हो ना आज अर्श का अठारवां जन्मदिन है!” एक दिन पायल ने मुदित को फोन किया.

” हैलो.. जी मैं चंदन बोल रहा हूँ जिनका ये फोन है उनका एक्सीडेंट हो गया है पुलिस उन्हे होस्पिटल लेकर गई है!” उधर से एक अंजानी आवाज़ आई.

” क्या…….!” पायल चिल्ला पड़ी.

” चाची क्या हुआ… किसका फोन है दिया पायल की आवाज़ सुन दौड़ी आई.

पायल कुछ बताने की स्थिति मे नही थी तो दिया ने फोन ले कान पर लगाया… अभी दूसरी तरफ से फोन कटा नही था सब बात पता लगते ही दिया ने रिया को फोन किया.

” माँ जल्दी आओ… चाचा का एक्सीडेंट हो गया आप चाची को संभालो मैं अर्श के साथ होस्पिटल जा रही हूँ… दीदी को भी फोन कर दिया मैने… पापा को रास्ते से कर दूंगी… चाची आप घबराना मत हम सब हैं ना… चाचा को कुछ नही होने देंगे!” दिया ये बोल अर्श के साथ निकल गई.

” रिया दी पापा कैसे हैं..!” अस्पताल पहुँच अर्श ने रिया से रोते हुए पूछा.

” रो मत छोटे हम सब हैं ना चाचा ठीक हो जायेंगे!” रिया उसे गले लगाते हुए बोली.

” कैसे हैं मुदित… !” तभी वहाँ पायल और शालिनी पहुंचे

” चाची इलाज चल रहा है… सिर मे चोट आई है तो टेस्ट के बाद ही साफ होगा सब आप चिंता मत कीजिये!” रिया बोली.


मुदित के कई जगह प्लास्टर चढ़ा था साथ ही सिर मे भी गहरी चोट थी 10-12 दिन अस्पताल मे रहने बाद उसे घर लाया गया… पर कई महीने उसे बिस्तर पर रहना था अब… रिया डॉक्टर थी तो उसने सारे इंतज़ाम अच्छे से अच्छे किये थे.

” इसलिए मैं आपसे कहती थी पैसे बचाने को… अब अर्श की इंजीनीयरिंग का खर्च था.. पर ये सब हो गया… तब तो आपने सुनी नही… होस्पिटल का खर्च… ऊपर से नौकरी पर खतरा..कैसे होगा सब….!” एक दिन पायल मुदित से बोली.

” पायल जो होगा देखा जायेगा अभी भगवान के लिए चुप रहो!”मुदित बोला.

बाहर से आती रिया ने ये सब सुन लिया ” चाची क्या हम पराये हैं जो आप ऐसा बोल रही हो .. क्या अर्श हमारा भाई नही!”रिया आँखों मे आँसू ला बोली.

” नही बेटा….. वो… ऐसी बात नही है!” पायल झेपते हुए बोली.

” चाची आप सब फिक्र छोड़ दो आपका एक नही तीन बेटे हैं समझी आप!” तभी दिया वहाँ आ बोली.

“रिया दी आप यहाँ का देखो मैं जयपुर जा अर्श का दाख़िला करवा कर आती हूँ उसका होस्टल भी देख आऊँगी साथ ही सारे इंतज़ाम भी करवा आउंगी!” दिया रिया से बोली.

” पर बेटा तुम…!”मुदित बोला.

” चाचा हम दोनो आज जो भी हैं वो आप दोनो के कारण है बहुत किया है आपने हमारे लिए अब हमारी बारी है अपने इस माँ- बाप और छोटे भाई के लिए कुछ करने की!” रिया बोली.

” बेटा वो सब मैने कुछ पाने की इच्छा से नहीं किया था मेरे लिए जैसा अर्श वैसे तुम दोनो तो ये तो मेरा फर्ज था।” मुदित बोला।

” हां तो चाचा अब हमें हमारा फर्ज निभाने दो!” दिया बोली।

मुदित और पायल की आँखों मे आँसू आ गए… पायल ने दोनो को गले लगा लिया.. !


“मुदित आप सच कहते थे कल की चिंता आज के सुकून को छीन लेती है उस वक़्त जो आपने किया बिल्कुल सही किया तभी तो आज मुझे एक बेटे की माँ होने के साथ- साथ दो प्यारी प्यारी बेटियों की माँ बनने का सौभाग्य भी मिला है.!”पायल् बोली.

” बिल्कुल सही… और हमे दो दो माँ पापा का प्यार मिला!”दिया बोली.

” क्या बात है आज तो लगता है चाची सारा प्यार लुटा देगी तुम पर! शालिनी तरुण के साथ आती हुई बोली.

” चाची नही छोटी माँ…!” दोनो बेटियां ये बोल फिर से पायल के गले लग गई.

सच है दोस्तों भविष्य के लिए सोचना अच्छी बात है पर उसके लिए वर्तमान का सुकून खोना कहाँ तक सही…मुदित के तब के एक सही फैसले ने जहाँ रिया दिया के सपने पूरे करने मे मदद की वहीं आज ऐसी मुश्किल घडी मे उसका सहारा भी वही फैसला बना. ये बात पायल को भी देर से ही सही समझ आ गई. वैसे भी ये कहाँ लिखा है की बेटियां सहारा नही बन सकती.

कैसी लगी आपको कहानी बताइयेगा जरूर.
#बेटी हमारा स्वाभिमान
आपकी दोस्त
संगीता

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