कभी सौतन कभी सहेली

लक्ष्मी की सास को अपने बहू की कोख से सबसे पहले बेटा चाहिए था लेकिन बेटे की चाह मे लक्ष्मी 4 लड़कियों को जन्म दे चुकी थी। पांचवी बार लक्ष्मी माँ नहीं बनना चाहती थी, इस महंगाई के जमाने में चार लड़कियों का पालन-पोषण करना ही बड़ी बात है।

लेकिन उसने मन बना लिया था कि अब जो भी होगा लेकिन वह माँ नहीं बनेगी अब वह अपनी बेटियों को पढ़ाएगी लिखाएगी और इन्हें लड़कों जैसा मान-सम्मान देगी। लेकिन लक्ष्मी की सास को यह मंजूर नहीं था, अब  लक्ष्मी और उसकी सास में आए दिन रोजाना बॅक झक होने लगी थी

लक्ष्मी की सास, रोजाना कोई ना कोई बहाना बनाकर लक्ष्मी को ताने देती रहती थी। कई बार तो लक्ष्मी और उसके पति में भी लड़ाई करवा देती थी गुस्से में लक्ष्मी का पति लक्ष्मी को कई बार मार भी देता था। लक्ष्मी का पति सच्चाई से रूबरू नहीं था वह अपनी मां का लाडला था जो मां कहती थी उसे बिना परखे मान लेता था। 

जब लक्ष्मी ने साफ मना कर दिया कि वह अब माँ नहीं बनेगी तो उसने अपने बेटे से दूसरी शादी करने को कहने लगी। अपने बेटे का ब्रेनवाश कर दिया था “बेटा, परिवार का नाम तो बेटे से ही होता है अगर हमारे कुल में बेटा पैदा नहीं हुआ तो हमारा वंश  तो यहीं खत्म हो जाएगा।” 



लक्ष्मी के पति राजेश ने भी लक्ष्मी से कहा कि मैं दूसरी शादी करना चाहता हूं। लक्ष्मी ने लाख समझाया कि आजकल लड़के-लड़कियों में कोई अंतर नहीं है। अगर लड़कियों को भी लड़के की तरह उचित शिक्षा दिया जाए तो वह उनका नाम रोशन कर सकती है।  

लेकिन राजेश को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ा उसने लक्ष्मी से कहा कि मैंने यह बात तुम से सलाह लेने के लिए नहीं बताई है बल्कि तुम्हें मैंने बताया है कि मैं दूसरी शादी करने जा रहा हूं।अगले सप्ताह ही लक्ष्मी की सास ने राजेश की शादी एक गरीब घर की लड़की से करा दी।

उस लड़की का नाम रजनी था वह पैसे से भले ही गरीब घर की थी लेकिन सुंदरता में इतनी धनी थी कि लड़कियां उसके आगे पानी मांगे। राजेश शादी के बाद रजनी के आगे पीछे ही घूमने लगा, अपनी पहली पत्नी लक्ष्मी और बच्चों की सुध बुद्ध लेना भी भूल गया था।

कई बार लक्ष्मी और राजेश की लड़ाई होने लगी थी, राजेश कई बार बोल देता था तुम्हें नहीं रहना है इस घर में तो चली जाओ. लेकिन लक्ष्मी इस घर को छोड़कर कैसे चली जाती और फिर वह जाएं भी तो कहां जाएं इस घर के एक-एक ईंट को उसने जोड़कर मकान से घर बनाया है।

होली का त्यौहार आने वाला था लक्ष्मी की सास ने नई बहू के लिए बनारसी साड़ी खरीद कर लाई थी और लक्ष्मी के लिए ऐसे ही सिंपल वाला साड़ी खरीद कर ला दी थी और उसकी लड़कियों के लिए तो कुछ भी नहीं खरीदा था। 

लक्ष्मी को पता चला कि नई बहू के लिए तीन हजार की साड़ी और मेरे लिए सिर्फ 500 रुपये की साड़ी और मेरे बच्चों के लिए कुछ भी नहीं, लक्ष्मी, बहुत ही गुस्से में हो गई, उसने अपनी सास से कहा, “यह कैसा न्याय है माँ जी , होली का त्यौहार सब के लिए है अगर लाना था तो आप सबके लिए  कपड़े लेकर आतीं, 

वरना किसी के लिए नहीं लेकर आतीं। लक्ष्मी की सास ने कहा, “अभी मेरे पास इतना ही रुपया था और पैसे जब आएंगे तो तुम्हारी लड़कियों के लिए भी कपड़े खरीद दूंगी” लक्ष्मी ने कहा कि जब आपके पास पैसे नहीं थे तो रजनी के लिए 3000 रुपये की साड़ी खरीदना जरूरी था?

सब को उसी में बराबर-बराबर का खरीद के लाते, साल भर में एक बार त्यौहार आता है उस दिन भी लड़कियां पुराने कपड़े पहने क्या यह शोभा देता है। लक्ष्मी की सास ने कहा, “मेरी इच्छा मैं जो चाहूँ करूंगी तू बोलने वाली कौन है। 

अभी नई बहू के खाने खेलने के दिन है तू चाहती है कि अभी से ही उसे दुनिया के झंझट झमेले में डाल दूँ यह मुझसे नहीं होगा। तुम भी नई नई शादी करके आई थी तो तुम्हें भी मैंने 1 साल तक तो कुछ भी नहीं करने दिया था।  



तुम्हें जो सोचना है सोचती रहो मैं कुछ नहीं करने वाली। तुम्हे भी भगवान ने 2 हाथ और 2 पैर दिए हैं। हमने तो शादी इसीलिए किया था कि बीएड करी  हुई हो टीचर की नौकरी लग जाएगी घर में दो पैसे आ जाएंगे।  लेकिन तुम्हें तो लड़की पैदा करने से फुर्सत मिले तब तो नौकरी करोगी। 

रुपए पैसे कोई पेड़ पर नहीं उगते और ना ही आकाश से गिरते हैं जो मैं जब चाहूं सब की फरमाइश पूरी करती रहूं। लक्ष्मी ने कहा तो मैं क्या इस घर की नौकरानी हूं जो पूरे दिन घर का सारा काम करती रहूं 15 सालों से इस ईंट के मकान को घर बना दिया। उसका यही फल मिल रहा है अब तो मैं कुछ भी नहीं करूंगी। आप लोगों को जो करना है करो।

यह बात लक्ष्मी के दिल पर लग गई और उस दिन से लक्ष्मी ने भी सोच लिया कि वह अब  अपनी बेटियों की जिंदगी के लिए जॉब करेगी वह अपने बेटियों को ऐसे तरसते हुए नहीं देख सकती हैं। शाम को राजेश जब नौकरी से वापस आया तो लक्ष्मी की सास ने बातों में मिर्च मसाला लगाकर लक्ष्मी की बुराई की। 

राजेश भी अपनी नई पत्नी रजनी के प्यार में इतना डूब चुका था कि उसे एक पत्नी और बेटियां भी हैं उसे यह याद भी नहीं रहता था उसने जब मां की बात सुना कि रजनी को उसने बुरा भला कहा है वह सीधे लक्ष्मी के पास पहुंच गया और जाकर कहने लगा, “सुनो  लक्ष्मी, जैसे  मां रख रही है वैसे ही रहो।  अगर नहीं रहना है

तो यह घर छोड़ कर चली जाओ।”  राजेश यह बात हर बार कहता था लेकिन हर बार लक्ष्मी अनसुना कर देती थी लेकिन इस बार उसने घर छोड़ने का फैसला कर लिया। उसने अपने पति से कहा, “अब ये घर छोड़ कर जा रही हूं आज के बाद मैं समझ लूंगी कि तुम मेरे लिए मर गए हो मैं एक विधवा हो गई हूं।

लक्ष्मी ने अपने बेटियों का हाथ पकड़ा और घर से बाहर निकल गई। घर से लक्ष्मी निकलते हुए सोच रही थी कि राजेश उसे बाहर नहीं जाने देगा आखिर उसने राजेश के साथ 15 साल बिताए हैं इतना प्यार करता था उसे, कैसे छोड़ देगा, जब वह शादी करके आई थी तो यह घर सिर्फ मकान था

उसने अपने प्यार और त्याग से मकान को घर बनाया लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ राजेश ने जैसे ही लक्ष्मी को रोकने के कहना चाहा  उसके मुंह पर रजनी ने हाथ रख दिया और राजेश चाह कर भी लक्ष्मी को रोक ना सका, लक्ष्मी को लगा कि राजेश उसे रोक नहीं रहा है



लेकिन राजेश भी करें भी तो क्या करें। राजेश अपने पुरुषत्व को खो चुका था रजनी के प्यार में इतना अंधा हो चुका था कि उसे अब सच या झूठ कुछ भी दिखाई नहीं देता था। लक्ष्मी अपने बच्चों के साथ अपने मायके चली गई।

लक्ष्मी के भाइयों को यह बात पता चला तो वह बहुत गुस्सा हुए वे लोग यहा तक बोले कि दीदी चलो आज जीजा जी की औकात दिखा देते हैं दूसरी शादी किया चलो ठीक है, लेकिन उनको यह किसने हक दिया कि वह मेरी बहन को घर से बाहर निकाल देंगे।

लक्ष्मी अपने भाई से बोली  कि उन्होंने निकलने के लिए नहीं कहा मैं खुद निकल कर आई हूं।  दीदी बात एक ही है लड़ाई किस घर में नहीं होती है इसका मतलब अगर कोई गुस्से में बाहर निकलने लगे तो क्या वह उनको रोकने का अधिकार नहीं है।

लक्ष्मी बोली, जाने दो भाई वह अगर इस नई वाली पत्नी के साथ खुश है तो रहने दो बस मैं तुमसे इतना चाहती हूं कि कुछ दिनों के लिए मुझे एक कमरा किराए पर दिलवा दो और 1 महीने का किराया तुम अपनी तरफ से दे देना मैं नौकरी ढूंढ रही हूं जैसे ही नौकरी लग जाएगी मैं किराया देने लगूँगी। 

तभी लक्ष्मी की भाई की पत्नी बोली, “दीदी आप किराए पर बाहर क्यों रहेंगी जब तक आप की नौकरी नहीं लगती है, आप तब तक यहीं रहेंगी जब आपकी नौकरी लग जाएगी तो भले आप किराए पर कमरा ले लेना। लक्ष्मी ने ऐसा ही किया दो-तीन दिनों के अंदर ही लक्ष्मी का प्राइवेट स्कूल में संस्कृत टीचर का जॉब लग गया 

क्योंकि लक्ष्मी ने संस्कृत से बीए ऑनर्स किया था और फिर B.Ed भी की हुई थी। वेतन भी सही मिलने लगा था।  14 हजार महीने एक व्यक्ति के लिए कम भी नहीं था उसने एक कमरा किराए पर ले लिया और फिर अपनी  बेटियों को भी उसी स्कूल में पढ़ाने लगी।

इधर राजेश की नई पत्नी को भी लड़का पैदा हुआ जब यह खबर लक्ष्मी को पता चला राजेश एक लड़के का बाप बन गया है और आज उसके घर में नामकरण संस्कार है तो वह सोच रही थी कि जाकर राजेश और रजनी के बेटे को अपनी तरफ से कुछ गिफ्ट देकर आएगी।  

आखिर हो ना हो उस लड़के से लक्ष्मी का भी नाता है।  है तो वो भी उसकी बड़ी माँ ही। लेकिन लक्ष्मी की बेटियों ने अपनी मां को जाने से मना कर दिया।  मां तुम कैसी इंसान हो जिस घर से तुम्हें एक बार भी नहीं कहा गया है कि तुम यहां आ जाओ और न ही आज तक पापा ने हमारा हाल चाल पूछा, हम कैसे रह रहे हैं ?  

और तुम उनके घर की चिंता करती रहती हो। लक्ष्मी ने कहा बेटी तुम लोग अभी नहीं समझोगी तुमने अभी तक किसी से प्यार नहीं किया है ना, मैंने 15 साल बिताए हैं तुम्हारे पापा के साथ इतनी आसानी से कैसे भूल जाऊंगी। लक्ष्मी की बेटियों ने कहा कि मां, पापा भी तो आखिर तुम्हारे साथ 15 साल बिताए हैं वह भी तो तुमको भूल ही गए ना।



धीरे धीरे दिन, महीने, साल बीतते गए और इधर लक्ष्मी की लड़कियां भी बड़ी हो गई और दो लड़कियों की शादी भी लक्ष्मी ने कर दिया था।  उधर लक्ष्मी की सौतन रजनी का बेटा भी बड़ा होकर इंजीनियर बन गया था और उसकी भी शादी हो गई थी वह अपनी पत्नी के साथ हैदराबाद में रहता था।

कुछ दिनों के बाद लक्ष्मी को पता चला कि राजेश आजकल बहुत बीमार रहता है कब उसकी मृत्यु हो जाए कहा नहीं जा सकता है उसका मन राजेश से मिलने को कर रहा था और ना चाहते हुए भी अपने पति राजेश से मिलने के लिए चली गई।  वहां गई तो पता चला कि राजेश को आखिरी स्टेज का कैंसर हुआ है

और कब उसकी मृत्यु हो जाए कहां नहीं जा सकता अब उनके पास इतना पैसा नहीं था कि वह बाहर बड़े हॉस्पिटल में जाकर राजेश का इलाज करा सके।  बेटे ने भी शादी के बाद माता-पिता से दूरी बना लिया था कभी कभार फोरमल्टी निभाने के लिए फोन कर लेता था।

 लेकिन एक रुपए भी खर्चे के लिए नहीं भेजता था यहां तो घर चलाना भी मुश्किल हो गया था। क्योंकि राजेश बीमारी की वजह से अब काम कर नहीं पाता था। लक्ष्मी जब अपने ससुराल में पहुंची।   राजेश दरवाजे पर ही सोया हुआ था राजेश ने लक्ष्मी को देखकर दूर से ही रोना शुरू कर दिया था, 

लक्ष्मी ने राजेश को विश्वास दिलाया उसे कुछ नहीं होगा, वह ठीक हो जाएगा, तभी रजनी आई और उसने देखा की लक्ष्मी आई हुई है। उसने लक्ष्मी के पैर छुए और पानी लायी। लक्ष्मी ने अपनी सास के पैर छुए और उनसे पता चला कि ऑपरेशन करने के लिए राजेश को 3 लाख चाहिए होगा। 

लेकिन उन्होंने अपने बेटे से कहा तो उसने देने से साफ मना कर दिया है अगर 3 लाख  होते तो राजेश का ऑपरेशन हो जाता और वह शायद ठीक हो जाता। लक्ष्मी की सौतन रजनी ने लक्ष्मी से कहा, “दीदी समझ में नहीं आता है क्या करूं यहां तो घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा है। 

ऑरेशन कैसे हो, एक यही घर में कमाने वाले थे, अब तो ये भी घर बैठ गए हैं और बेटा भी कभी कभार एक-दो हजार भेज देता है उसे क्या होगा। अब तो मन करता है कि मैं ही जाकर किसी के घर में नौकरी कर लू। 

लक्ष्मी ने कहा, “रजनी कैसी बात करती हो अब हमारे इतने बुरे दिन आ गए हैं कि तुम घर में जाकर झाड़ू पोछा बर्तन करोगी। तुम्हारी दीदी अभी जिंदा है।लक्ष्मी ने कहा कि कल तैयार रहना राजेश को हम हॉस्पिटल ले चलेंगे।  मैं इलाज कराऊंगी।

लक्ष्मी ने अपनी बेटियों को फोन लगाकर कहा,”तुम्हारे पिता बीमार हैं और उन्हें 3 लाख की जरूरत है।” लक्ष्मी की बड़ी लड़की ने कहा, “मां तुम भी ना बिल्कुल नहीं समझती उन्होने तुमको घर से निकाल कर बाहर फेंक दिया तुम फिर वही पर चली गई। तुम्हें कैसे समझाया जाए। ” लक्ष्मी ने अपनी बेटी को डांटा, “मैंने तुम्हें यही संस्कार

दिए हैं आखिर जो भी है राजेश है तो तुम्हारे पिता न और तुम्हारे पिता के बारे में मैं एक भी गलत शब्द नहीं सुन सकती हूं।”  अगले दिन राजेश को शहर के कैंसर हॉस्पिटल में भर्ती किया गया और उसी दिन जांच के बाद इलाज शुरू हो गया 1 महीने के अंदर ही राजेश का ऑपरेशन हो गया था उसके बाद ठीक होकर वह घर वापस आ गया था।

राजेश अपनी बेटियों से नजरें नहीं मिला पा रहा था जिन बेटियों को उसने असहाय और कुल नाशनी समझ कर बाहर कर दिया था।  उन्हीं बेटियों ने आज उसे नई जिंदगी दी है। राजेश ने अपनी बेटियों को गले लगाया और सब से बोला अब कोई भी बाहर नहीं रहेगा हम सब साथ ही रहेंगे।

एक महीने बाद दुबारा से राजेश नौकरी जाने के लिए कहने लगा। लेकिन लक्ष्मी ने साफ मना कर दिया अब तुम कहीं कमाने नहीं जाओगे अभी तो ऑपरेशन हुआ है। राजेश की  लड़कियों ने भी मना कर दिया कि पापा अब आप कमाने नहीं जाओगे हम आपके घर के खर्चे के लिए पैसे भेज दिया करेंगे।

लेकिन यह बात राजेश के लड़के को पता था कि राजेश का ऑपरेशन होने वाला है लेकिन वह एक बार भी फोन नहीं करता था उसे लगता था कहीं फोन करूं तो पैसे ना मांग ले।  जब राजेश का ऑपरेशन हो गया और वह ठीक हो गया तब राजेश का बेटा अपनी बीवी के साथ मिलने घर आया। 

राजेश की दूसरी बीबी रजनी ने देखा कि बेटा घर मे अंदर घुस रहा है। वो बोली, “वहीं खड़ा हो जा, आज के बाद तेरा इस घर में कोई जगह नहीं है अब यह घर तुम्हारा नहीं है जब तुमने अपने बेटा होने का फर्ज नहीं निभाया तो फिर इस घर में आने का हक़ भी नहीं है 



रजनी ने उसे घर के अंदर नहीं आने दिया। लक्ष्मी की सास जब शोर-गुल  सुनकर बाहर आई तो देखी कि उसका पोता बाहर खड़ा है।  आज उसे भी अपने पोते पर प्यार नहीं आ  रहा था जिसके लिए उसने अपनी बड़ी बहू को घर से बाहर निकाल दिया था कि पोता कुल का नाम रोशन करेगा, 

उसने तो इस कुल का नाम ही डूबा दिया।  बल्कि बेटियों ने ही कुल के नाम को रोशन किया है उसने भी अपने पोते को मना कर दिया, “बेटा यह घर अब तुम्हारा नहीं है तुम्हें जहां जाना है चले जाओ लेकिन इस घर के दरवाजे तुम्हारे लिए हमेशा के लिए बंद हो गए।

दोस्तों इस कहानी का इतना ही आशय है कि आप ये मत सोचिए कि लड़का आपके कुल खानदान का नाम रोशन करेगा। लड़कियों को भी अगर आप उचित शिक्षा और मार्गदर्शन दें तो वह आपके खानदान का नाम रोशन कर सकती हैं।

लेखक: मुकेश कुमार

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