फर्क – नीलिमा सिंघल

कामिनी जी के पति को गुजरे हुए 18 साल बीत गए थे ,,वो अपने पीछे कामिनी जी के अलावा डी दो बेटे प्रतीक और अमन और एक बेटी मधु को छोड़ गए थे,,

कामिनी जी ने मेहनत से बच्चो को पाला था,,प्रतीक कामिनी जी का लाडला था क्यूंकि बड़ा बेटा था और मधु में उनकी जान बसती थी,,अमन को हालातों ने समझदार बना दिया था प्यार अमन से भी था कामिनी जी को पर फर्क सभी को नजर आता था और परिवार वाले कह ही देते थे,,”प्रतीक की पत्नि घर मे गढ्डा भी करेगी तो कामिनी कहेगी खजाने को तलाश रही है,,, वही अमन की पत्नि गढ्डा भरेगी तो कहेंगी बारिश का पानी इकट्ठा करने वाले गड्ढे को बंद करने पर तुली है। ।

मधु की शादी शहर मे ही अच्छा घर देखकर कर दी थी और फिर प्रतीक की शादी भी हो गयी उसकी पत्नि रीना अच्छे घर से थी.पर मूडी थी, 

4-5 साल बाद अमन की शादी भी हो गयी थी उसकी पत्नि तनुजा धीर गम्भीर समझदार थी,,

उसका मायका ज्यादा सम्पन्न नहीं था इसीलिए दोनों माँ बेटी को तनुजा कम पसन्द आती थी,,,पैसों के चक्कर मे ही मधु बिना बुलाए हर वार बड़े भाई भाभी के हर फंक्शंस मे पहुँच जाया करती थी,,,और तनुजा के बुलाने पर भी नहीं आया करती थी,,

आज तनुजा ने बहुत प्यार अपनी नन्द को फोन करके अपनी बिटिया के पाँचवें जन्मदिन पर बुलाया पर हर बार की तरह मधु ने फोन पर ही कह दिया “भाभी मेरा आना जरा मुश्किल हो जाएगा आपके जीजाजी भी बाहर गए हुए हैं,,हमेशा की तरह बहाना बनाते हुए मधु ने बोला। 

2 घंटे बाद अपनी तसल्ली के लिए माँ को फोन मिलाकर पूछा “माँ पिया का जन्मदिन कहां मना रहे हैं, कहीं बाहर का प्रोग्राम है क्या “

 “अरे ना बिटिया,,वो कहां बाहर मनाएंगे,घर पर ही केक कटेगा,,तू रहने दे क्या करेगी आकर खर्चा और होगा तेरा,,” माँ ने फुसफुसाहट भरी आवाज मे कहा 

“हाँ माँ सही कह रही हो लेन देन भी भाभी से नहीं हो पाता, पिछले साल जो साड़ी दी थी वो भी आउटडेटेड थी “

तनुजा सरल स्वभाव की थी मायके से चीजे लाना भी उसको अच्छा नहीं लगता था। 




पिया के जन्मदिन की सारी शाम बुआ के इंतजार में बीत गयी क्यूंकि अमन को पसन्द नहीं आता कि उसकी बहन के बिना केक कटे। 

2 महीने बाद उसके बड़े भाई भाभी की शादी की सालगिरह थी ।

3 दिन पहले तक इंतजार किया पर कोई खबर नहीं आयी तो माँ के पास फोन किया,,”माँ इस बार क्या भैया भाभी पार्टी नहीं कर रहे हैं “

“बेटा पता नहीं, पर होटल बुक की बात तो तेरी भाभी कर रही थी किसी से ” माँ ने दबी सी आवाज मे कहा 

“अच्छा माँ, हो सकता है सरप्राइज पार्टी प्लान कर रहे हों भैया भाभी,मैंने भैया के लिए शर्ट और भाभी के लिए सूट पहले ही खरीद लिया था”मधु ने खुश होते हुए कहा ।

Anniversary वाले दिन हमेशा की तरह बिन बुलाए पहुंच गयी थी मधु,,और बड़ी भाभी के कमरे मे जाकर उन्हें गले लगाने को आगे बढी तो रीना ने हाथ से रोकते हुए कहा “अभी बाल सेट करवा कर आ रही हूँ दीदी,,जरा ध्यान रखा करो”

“शादी की सालगिरह की बहुत-बहुत बधाई भाभी,  बहुत प्यारी लग रही हो, उपहार देते हुए मधुबोली “

“हाँ,,हाँ ठीक है ठीक है ” कहती हुई भाभी कमरे से बाहर जाने को हुई तब ही मधु ने फिर पूछा ” भाभी बच्चे कहां है? भैया भी नहीं दिख रहे “

“वो सब होटल मे है आपके भैया आ रहे होंगे मुझे लेने “

“मुझे लेने ,,,,इससे क्या मतलब भाभी, मैं और माँ भी तो—–” मधु की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि 

रीना बात काटते हुए बोली “नहीं दीदी होटल का प्रोग्राम सिर्फ फ्रेंड्स के लिए रखा है वहां ड्रिंक भी होगी तो परिवार वालों के साथ अच्छा नहीं लगेगा “

आप सभी के लिए खाना बाहर से ऑर्डर कर दिया है मिलकर खा लेना, कहती हुई रीना चली गयी, 




मधु का चेहरा बनता बिगड़ रहा था,” परिवार वालों के साथ उन्हें अच्छा नहीं लगेगा,,,ये क्या बोल गयी बड़ी भाभी माँ ” सकपकाते हुए मधु ने माँ से कहा ,

माँ को भी कुछ समझ नहीं आ रहा था बाहर से मँगाया खाना आ चुका था पर एक निवाला भी दोनों के मुहँ से नहीं उतरा,,

“माँ तनुजा भाभी हमेशा परिवार के साथ हर चीज मनाना पसन्द करती हैं यहां तक कि पिया का केक भी आपसे ही कटवाती हैं कितने प्यार से मनुहार से बुलाती हैं और हम,,,,और हम नखरे दिखाते हैं “

माँ क्या बोलती उन्होंने खुद भी तो पैसों को ही ज्यादा अहमियत दी थी,,गुण नहीं पैसों की चमक उन्हें प्रभावित करती थी “

तभी तनुजा उनके कमरे मे आयी और खाना देखकर पूछा “माँ आपने और दीदी ने अब तक खाना शुरू भी नहीं किया अब तो ठंडा हो गया होगा,,,गरम कर लाऊँ क्या “

मैं ने कहा “नहीं बहु ,,मुझसे इतना भारी खाना नहीं खाया जाएगा एक काम कर मुझे दलिया बनाकर देदे अगर दिक्कत ना हो तो “

“नहीं माँ कोई परेशानी नहीं होगी ” अचकचा गयी थी तनुजा हमेशा कड़क कर बोलने वाली उसकी सास की आवाज मे एक अपनापन महसूस हुआ था पहली बार “

तनुजा बाहर जाने को हुई तभी मधु ने बोला “भाभी इतनी मिर्ची का खाना मुझसे भी नहीं खाया जाएगा क्या आप मेरे लिए भी,,,,दलिया बना देंगी “

मधु की आवाज कटु भीगापन तनुजा को महसूस हो गया था,,उसने हाँ मे गरदन हिलायी और बाहर चली गयी,, उन दोनों को सोचो मे गुम छोड़कर। 

समय ने कांच और हीरे का फर्क और मोल दोनों माँ बेटी को समझा दिया था। 

इतिश्री 

 

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