दिल से बंधा खूबसूरत रिश्ता – संगीता अग्रवाल

“मिताली अगले हफ्ते राखी है तो दीदी आ रही हैं राखी लेकर एक दिन पहले बोल रही थी रात को रुककर राखी वाले दिन सुबह निकल जाएंगी उनकी नन्दों को भी आना है ना इसलिए !” मिताली के पति चेतन ने ऑफिस से आकर कहा।

“हम्म …हां कुछ कहा क्या आपने?” मिताली जो कहीं खोई थी अचानक हड़बड़ा कर बोली।

” क्या बात है मिताली तुम ठीक तो हो …मैने कहा अगले हफ्ते दीदी राखी के लिए आ रही हैं तुमने सुना ही नहीं!” चेतन उसके पास बैठता हुआ बोला।

” हां अगले हफ्ते तो राखी है…पर मेरा भाई तो…!” इतना बोल मिताली फूट फूट के रो दी।

” मिताली तुम्हारा भाई तुम्हारे साथ है कहीं नहीं गया वो। देश के लिए शहीद हुए लोग मरा नहीं करते समझी तुम अब रोना बन्द करो चलो मैं अभी फ्रेश होकर आता हूं!” चेतन उठते हुए बोला।

मिताली जिसकी शादी अभी नौ महीने पहले ही चेतन  से हुई है। मिताली के परिवार में उसके मम्मी पापा हैं और था एक बड़ा भाई मनन जो फौजी था और नक्सलियों से लोहा लेते अभी तीन महीने पहले ही शहीद हुआ था। इधर चेतन के परिवार में चेतन के मम्मी पापा हैं और बड़े भाई भाभी हैं जोकि गांव में रहते हैं और एक बड़ी बहन है जो इसी शहर में ही ब्याही गई है। मिताली की शादी के बाद ये पहली राखी थी पर राखी बांधने को भाई की कलाई नहीं थी इसलिए वो राखी का नाम सुन फूट फूट कर रो पड़ी।

तय समय पर मिताली की ननद राखी ले आ गई मिताली ने अच्छे से उनका स्वागत सत्कार किया पर अपने चेहरे की उदासी को नहीं छिपा पाई वो।

” क्या बात है मिताली सब ठीक तो है चेतन और तुम्हारे बीच?” मिताली की ननद वसुधा ने पूछा।

” हां दीदी आपको ऐसा क्यों लगा!” झूठी हंसी में अपने गम छिपा मिताली बोली।

“तो फिर इतना उदास क्यों हो?” वसुधा ने फिर पूछा।

” वो दीदी आप तो जानती हो मिताली के भाई अभी तीन महीने पहले ही शहीद हुए हैं और कल राखी है तो !” जवाब चेतन ने दिया उसकी बात सुन मिताली फिर फूट फूट कर रो दी।

” देखो मिताली तुम्हारा दुख बहुत बड़ा है पर जो हुआ उसे कोई बदल नहीं सकता। तुम्हे अपने बारे में नहीं अपने मम्मी पापा के बारे में सोचना चाहिए उनका तो बुढ़ापे का सहारा छिन गया! मैं कल सुबह चली जाऊंगी चेतन को राखी बांध उसके बाद तुम इस के साथ अपने पीहर चली जाओ तुम्हे भी अच्छा लगेगा और तुम्हारे मम्मी पापा को भी!” वसुधा प्यार से बोली।

“दीदी!” मिताली ननद का प्यार देख गले लग गई उसके।

अगली सुबह वसुधा राखी बांध कर निकल गई अपने घर को और मिताली और चेतन मिताली के पीहर के लिए निकल गए।



” अरे बेटा तुम लोग अचानक बताया भी नहीं तुमने!” मिताली और चेतन  को देख उसकी मम्मी सरिता जी बोली।

” मम्मी मायका है मेरा यहां आने के लिए क्या बताना वैसे भी आज तो राखी है ना!” मिताली मां के गले लग बोली।

” पर बेटा तू राखी …किसके…? हमें तो लगा तू आज नहीं आएगी ” सरिता जी दुख और असमंजस में बोली।

” हम हैं ना मिताली बहन हमारे बांधेगी राखी!” तभी वहां एक साथ कई स्वर गूंजे।

मिताली , सरिता जी और चेतन जैसे ही पलटे वहां चार फौजियों को खड़े पाया।

” जी आप ?” मिताली ने हैरानी से पूछा।

” हम मनन के दोस्त हैं और अपनी बहन से राखी बंधवाने आए हैं बंधोगी ना तुम राखी ?” उनमें से एक बोला।

” लेकिन आपको किसने बताया?” मिताली ने पूछा।

” मनन ने आप सबके बारे में हमे बताया था सब कुछ जानते हैं हम। और उसकी शहादत पर हमने खुद से वादा किया था मनन का परिवार हमारा परिवार है। हम तो तुम्हारे ससुराल गए थे पर वहां ताला देख यहां चले आए। अब जल्दी से राखी बांधो बहन! खून का रिश्ता ना सही हम अपनी छोटी बहन से दिल का रिश्ता तो बना और निभा सकते है ना । ” दूसरा फौजी भाई बोला।

” पर मैं राखी तो लाई नहीं!” मिताली ने भरी आंख से कहा।

” हम लाए हैं ना। राखी पर किसी बहन की आंख में आंसू अच्छे नहीं लगते !” उनमें से एक मिताली के आंसू पोंछता बोला।

मिताली ने आंसू पोंछ खुशी खुशी चारों के राखी बांधी उन्होंने मिताली को उपहार के साथ साथ आजीवन सुरक्षा और प्यार का वचन दिया। मिताली के माता पिता की आंख इस दिल के रिश्ते को देख  भर आई।

“और हां जब तक भारत माता का बुलावा नहीं आ जाता तब तक हर साल आएंगे राखी बंधवाने तो अब राखी खरीद के रखा करना समझी!” उनमें से एक हंस कर बोला। जवाब में मिताली भी मुस्कुरा दी। 

” मैं चाहूंगी जब तक मैं जिंदा हूँ मेरे चारों भाइयों की कलाई पर राखी बांधती रहूँ !” मिताली बोली चारों ने अपनी नई बनी बहन को गले लगा लिया और उसके माता पिता के पैर छू विदा ली।

इस राखी मिताली जहां अपने भाई मनन को याद कर दुखी थी क्योकि खून के रिश्ते भुलाये नही जाते पर एक कि जगह चार भाई मिलने की उसे खुशी भी थी क्योकि दिल के रिश्ते भी बहुत मायने रखते है । वहीं मिताली के माता पिता और चेतन भी दिल् से बने इस खूबसूरत रिश्ते को देख खुश थे।

कैसी लगी आपको ये कहानी बताइएगा जरूर।

#दिल_का_रिश्ता

आपकी दोस्त 

संगीता

(v)

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