बहू तुम्हारे मायके वाले हैं या मुसीबत (भाग 2)- स्वाति जैंन : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : नाश्ता कराते समय उसे शर्म महसूस हो रही थी और वह सोच रही थी कैसी दुविधा हैं , मैं चाहकर भी आज अपने ही मम्मी पापा को अपने घर खाना नहीं खिला पा रही हुं !!

निधि के मम्मी पापा चाय नाश्ता कर अपने घर के लिए रवाना हो गए !!

निधि की सास अलका जी भी अपनी सहेली के साथ घूम फिरके घर आ चुकी थी !!

अलका जी ने जैसे ही रसोई में पडे फल और मिठाई देखी वे समझ गई यह सब सामान निधि के मायके से आया हैं !!

उन्होने जोर से निधि को आवाज लगाई , निधि के आते ही वे बोली यह कैसे सडे गले फल लेकर आए हैं तुम्हारे मायके वाले ??

केले गीले हो चुके हैं , सेव बिल्कुल लाल नहीं हैं , अंगूर बहुत ज्यादा खट्टे लग रहे हैं और यह मिठाईयां कितनी पुरानी लग रही हैं , ऐसा सामान कौन खाएगा हमारे घर में ?? अब यह सारा सामान कल कामवाली बाई को देना पड़ेगा !!

अगली बार तुम्हारे मम्मी पापा से कह देना कि हमारे घर ऐसा सडा गला सामान ना लाए !! अगर अच्छा सामान देने की औकात नहीं हैं तो कोई बात नहीं मगर कम से कम ऐसा बेकार सामान तो ना दें और पता नहीं कैसे बेटी के घर आकर यह लोग चाय नाश्ता कर लेते हैं , उन्हें पता नहीं क्या कि बेटी के घर का तो पानी भी नहीं पीते !!

तुम्हारे मायके वाले तो मुसीबत ही हैं एक तरह से , वे लोग यहां ना आए वही बेहतर होगा !! जब भी वे लोग आते हैं मुझे ऐसे लगता हैं कोई मुसीबत घर आ रही हो !! बेटी ब्याहने के बाद बार बार क्या बेटी से मिलना ?? अब बेटी को अपना घर संभालने दो !!

सास की कड़वी बातें सुन निधि के आंखों के कोर गीले हो चुके थे !!

उतने में डोरबेल बजी !!

निधि ने दरवाजा खोला तो सामने उसकी नंनद राशी खड़ी थी जो कॉलेज से आई थी !!

राशि ने अंदर आकर देखा तो उसकी मां के हाथ में फल और मिठाइयां थी !!

राशि को देखते ही अल्का जी फिर से अपना राग सुनाने लगी !!

यह देख तेरी भाभी के मायके वाले कैसा सामान लेकर आए हैं ??

राशि भी मुंह नाक सिकोड़कर बोली भाभी के मायके वालों की औकात यही तक हैं मम्मी !!

वे लोग ऐसी फटीचर चीजे ही लाकर दे सकते हैं यहां !!

सास तो सास , नंनद की बातें सुनकर निधि की आंखों से आंसू बह निकले और वह अपने कमरे में जाकर रोने लगी !! उस दिन निधि पुरे दिन रोती रही !!

रात को जब उसने सारी बात विवान को बताई तो विवान बोला निधि मुझे इन सब घर की बातों से दूर ही रखो प्लीस !!

तुम तो जानती ही हो मेरे लिए मेरा परिवार सर्वोपरि हैं और मैं घर में कोई क्लेश नहीं चाहता !! घर में शांती बनाए रखना चाहती हो तो सभी की बातों को हजम करना सीखो और यह आंसू बहाना बंद करो क्योंकि मैं मेरी मां और बहन को जाकर कुछ नहीं बोलुंगा मगर मैं तुम्हें भी रोते हुए नहीं देख सकता !!

निधि समझ चुकी थी विवान अपने परिवार से कुछ नही कहेगा और निधि में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह अपनी सास से बहस कर पाए इसलिए निधि ने सोच लिया कि अब वह अपने मम्मी – पापा को कभी अपने घर नहीं बुलाएगी !!

निधि को हर रोज सास और नंन्द से एक नया ताना सुनने मिल जाता !! वे दोनों खुद तो कुछ काम नहीं करती थी मगर निधि के हर काम में नुक्स जरूर निकालती !!

काफी समय ऐसे ही बीत गया , निधि को बहुत समय से उसके मायके तक नहीं जाने मिला था क्योंकि यहां सास अलका जी का कहना था कि तुम मायके जाओगी तो यहां घर का काम कौन करेगा ??

राशि कॉलेज जाती है और मेरी भी तबीयत सही नहीं रहती इसीलिए कोई जरूरत नहीं तुम्हें तुम्हारे मायके जाने की !!

निधि हर बात पर मन मसोस कर रह जाती मगर कर भी क्या सकती थी ??

निधि के पापा आलोक जी एक बार फिर ऑफिस के कुछ काम से निधि के शहर आए हुए थे , बेटी को देखें बहुत महीने हो चुके थे इसलिए वे अचानक बेटी के घर पहुंचे !!

निधि अपने पापा को देखकर बहुत खुश हुई !!

आलोक जी फिर अपने साथ कुछ फल और मिठाइयां लेकर आए थे जो उन्होंने निधि को थमा दिए !!

सास को नापसंद होते हुए भी निधि ने इस बात अपने पापा को अपने हाथ का खाना खिलाया और बोली पापा अगली बार मां को भी साथ में लेते आइएगा , मां को देखें भी बहुत समय हो गया है !!

यह सब देखकर अलका जी मन ही मन निधि के मायके वालों के लिए जल भून रही थी !! आलोक जी के जाते ही अल्का जी  रसोई में रखे फल और मिठाईयां थैलियों में से निकालकर बोली !! यह लो फिर आ गया इसके मायके से सड़ा- गला और पुराना सामान !! लाख समझाओ मगर इसको और इसके मायके वालो को कहां समझ आने वाला हैं !!

अलका जी को आदत पड़ चुकी थी निधि और उसके मायके वालों को ताने मारने की और निधि के मायके से आई हर चीज में नुक्स निकालने की !!

अल्का जी अपनी बेटी राशि को बुलाकर बोली राशि जा यह सब सामान मेरे कमरे में रख दें , या तो कामवाली बाई को दे देंगें या किसी जरूरत मंद में बांट देंगें !!

निधि सोचने लगी सासू मां हर बार सारा सामान अपने कमरे में क्यों रखवा देती हैं ?? और निधि तो कभी देख ही नहीं पाई कि सासू मां यह सारा सामान कामवाली बाई को कब देती हैं. ??

एक बार कामवाली भी बता रही थी कि मालकिन ने तो मुझे कुछ सामान नहीं दिया कभी !!

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