आखिर सास भी तो मां ही है – Blog post by Sangeeta aggarwal

” क्या बात है नंदिनी बेटा थकी थकी लग रही हो ?” नंदिनी की सास मालती जी ने उससे पूछा।

” वो बस मम्मीजी थोड़ा सिर दर्द कर रहा है !” चाय का पानी चढ़ाती नंदिनी बोली।

” दिखाओ तो …अरे तुम्हे तो बुखार है तुमने बताया क्यों नही मुझे चलो तुम अभी अपने कमरे में मैं चाय बना कर लाती हूं कुछ खाकर दवाई लेना तुम !” मालती जी नंदिनी को छूकर बोली।

” नही मम्मीजी अभी तो सबका नाश्ता बनाना है वैसे ही छुट्टी है सबकी तो नाश्ता पसंद का करेंगे। अभी तो आराम की सोच भी नही सकती मैं!” नंदिनी चाय में पत्ती डालती हुई बोली।

” बेटा राघव ( नंदिनी का पति) को पता है तुम्हारी तबियत ठीक नहीं है ?” मालती जी दूसरी गैस पर आलू उबलने रखते हुए बोली !



” हां मम्मीजी मैने बोला था सिर दर्द है वो बोले मम्मी कल ही आई है उनके सामने मैं तो काम करूंगा नही तुम अभी मैनेज कर लो फिर दिन में आराम कर लेना !” नंदिनी बोली।

” चलो मेरे साथ !” मालती जी चाय की गैस कम करते हुए बोली और नंदिनी का हाथ पकड़ कर उसे ले गई।

कहानी को आगे बढ़ाने से पहले आपको सभी किरदारों से मिलवा दूं। नंदिनी और राघव दोनो पति पत्नी दोनो के दो बच्चे  एक प्यारा सा परिवार राघव जहां एमएनसी कंपनी में नौकरी करता है वही नंदिनी का घर के अगले हिस्से में छोटा सा बुटीक है। मालती जी राघव की माता जी जो अभी तक दूसरे शहर में अपने बड़े बेटे के साथ रहती थी अब उनके बेटे को दो साल के लिए विदेश जाना था । तो मालती जी राघव के पास आ गई। हालाकि उनके बड़े बेटे ने विदेश चलने को भी कहा था सब परिवार के साथ पर मालती जी ने बेटे बहु और बच्चों को भेज दिया और खुद यहां छोटे बेटे के पास आ गई। नंदिनी वैसे तो सास के आने से खुश है पर मन में एक डर भी था क्योंकि अभी तक मालती जी हफ्ते भर को ही यहां आती थी पहली बार इतने लंबे समय को आ रही है।

” लेटो यहां चुपचाप और राघव तुम बच्चों को उठाओ मैं नाश्ता बनाती हूं !” नंदिनी को लिटाते हुए मालती जी बेटे से बोली।

” पर मम्मी आप क्यों …मेरा मतलब नंदिनी कर लेगी आप कल तो आए हो !” राघव बोला।



” हां तो कल आई हूं तो क्या बहु बीमार है उसको बुखार भी है ऐसे में तो तुझे उसकी मदद करनी चाहिए और तू मुझे बोल रहा मैं क्यों नंदिनी कर लेगी!” मालती जी ने बेटे को झिड़की लगाई।

” मम्मी जी कोई बात नही वैसे तो ये मेरी मदद करते ही हैं बस आज … मैं नाश्ता बना देती फिर आराम कर लेती आप खामखा इतना परेशान हो रही हो !” नंदिनी बोली।

” मैं अच्छी खासी हूं तब परेशान हो रही हूं तुम बीमार होकर भी काम करोगी वाह ये कौन सा लॉजिक हुआ !” मालती जी हंस कर बोली।

” मम्मीजी बहु के होते सास काम करे ये भी तो लॉजिक नही हुआ !” नंदिनी बोली।

ओहो कितना सोचती हो बीमार हो आराम करो ठीक हो जाओ फिर कर लेना काम बहु हो तो क्या तुम बीमारी में आराम नही कर सकती और मैं सास हूं मेहमान नही वहां तुम्हारी जेठानी के साथ भी काम करती थी यहां भी करूंगी। बेड पर बैठ सेवा करवाऊं ऐसी सास नही मैं समझी तुम अब कुछ मत बोलना मैं रसोई में जा रही तुम आराम करो और राघव तुम खड़े हो जाओ जल्दी से !” मालती जी ये बोल फटाफट रसोई में चली गई।

जितनी देर में बच्चे नहा कर आए मालती जी ने पूड़ी आलू बना दिए जिसे देख बच्चे खुश हो गए नंदिनी के लिए उन्होंने दलिया बनाया और उसे खिला कर दवाई दे दी। शाम तक नंदिनी का बुखार तो उतर ही गया साथ ही सास को लेकर जो डर था वो भी उतर गया और वो समझ गई सास भी तो मां ही है।

दोस्तों मैं जानती हूं मेरी बहुत सी बहनों का सास को लेकर एक्सपीरियंस अच्छा नही होगा इसलिए वो यही कहेंगी ऐसा सिर्फ कहानियों में होता है पर मैंने ये हकीकत में देखा है। भले ही बहुत कम सास मां की तरह होती है पर होती तो हैं क्योंकि आखिर सास भी तो मां है।

आपकी दोस्त 

संगीता

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