सिपाही के पिता का दर्द” – भावना ठाकर’भावु’

वतन पर कुर्बान होने वाले तनय मेरे है ज़िंदाबाद तू,
सरहद की सीमाओं को सदियों तक रहेगा याद तू,
नाज़ है वतन को तुझ पर है माँ भारत की प्यारी औलाद तू।

मैं उस औलाद का पिता हूँ जिसने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने आप को कुर्बान कर दिया, सीने पर गोली खाकर दुश्मनों को मात दी और जग में मेरा नाम रोशन किया। आज बेटे के शहीद होने पर खुद को भाग्यशाली समझने वाला मैं कितना डरता था बेटे को फौज में भेजने से, सच में स्वार्थी था मैं। पर कौनसा बाप जीते जी अपने बेटे को मौत की कगार पर भेज दे, जहाँ पर ज़िंदगी का कोई भरोसा नहीं होता, कभी भी मौत बिना दस्तक दिए आ धमकती है। मानवीय मूल्यों में मोह अग्रसर होता है, मुझे भी अपने बेटे राहुल के प्रति बेतहाशा लगाव और मोह था।

एक बार उसकी स्कूल में फैशन ड्रेस प्रतियोगिता थी, राहुल ने कहा पापा में फौजी बनूँगा एक रायफल और वर्दी खरीद कर दीजिए न, सारे दुश्मनों को यूँ मार दूँगा। उस पर राहुल को मैंने एक थप्पड़ लगाते कहा था खबरदार फौजी बनने का ख़याल भी मन में लाया तो, बनने के लिए और बहुत सारे किरदार है समझे। उस वक्त तो राहुल चुप हो गया पर कहते है न पुत्र के लक्षण पालने में ही दिख जाते है। राहुल के मन ने बचपन से जैसे ठान लिया था एक सिपाही बनना। ग्रेजुएट ख़त्म होते ही मैंने कहा और, आगे कौनसी लाईन लेना चाहता है मेरा बेटा? राहुल बोला पापा मैं आर्मी ज्वाइन करना चाहता हूँ।


सुन कर ही मेरा खून जम गया। आज तो मैं हाथ भी नहीं उठा सकता था बेटा जवान जो हो गया था। दिल एक धड़क चूक गया, बेटे को खोने के डर से तन पसीज गया। मैंने कहा बेटा और कोई भी क्षेत्र चुन लो मैं तुम्हें फौज में नहीं जाने दूँगा, तू मेरा इकलौता बेटा है कल को तुझे कुछ हो गया तो मैं क्या करूँगा? तुम्हारी माँ भी नहीं रही मैं तो बिलकुल अकेला रह जाऊँगा, नहीं-नहीं मैं तुम्हें सरहद पर मरने नहीं भेज सकता।
राहुल मेरे पास बैठा और मेरा हाथ अपने हाथ में लेते बोला, पापा सोचिए अगर सारे लोग आपकी तरह सोचेंगे तो मातृभूमि की रक्षा कौन करेगा? सरहद पर लाखों सिपाही दिन-रात सीना तानें डटे है। मायनस ज़ीरो डिग्री ठंड और 45 डिग्री तापमान झेलते, भूख-प्यास की परवाह किए बगैर तभी हम चैन की नींद सोते है। अगर सरहद पर जानें के लिए कोई तैयार ही नहीं होगा तो हमारा देश निराधार हो जाएगा। मुश्किल से हम अपनी मिट्टी को आज़ाद कर पाए है, सब ऐसा सोचेंगे तो दुश्मन के हाथों देश तबाह हो जाएगा। फिर मौत का क्या है एक दिन तो आनी ही है, व्यर्थ जीवन बिताने से बेहतर है क्यूँ न देश की सेवा करते बिताऊँ। हमारी रक्षा के लिए कई माँ-बाप ने अपना संतान मोह छोड़ कर अपने बेटों को भेजा ही है न सरहद पर, तो मैं क्यूँ नहीं जा सकता माँ भारती की रक्षा करने।

जिस परिस्थिति से मैं भाग रहा था आज सामना हो ही गया। मैंने कहा बेटा मैं इतना हिम्मत वाला नहीं कि तुझे खुद अपने हाथों मौत के आगे धर दूँ। राहुल ने कहा पापा आप नकारात्मक क्यूँ सोचते है मुझे कुछ नहीं होगा। आपको खुद का मनोबल मजबूत करना ही होगा मैं अब पीछे नहीं हटने वाला। आपको बिना बताए मैंने एप्लाय कर दिया था और सारी फोर्मालिटी पूरी कर ली है, आज्ञा दीजिए मेरा ऑर्डर आ गया है कल निकलना है। भारी हृदय से राहुल को फौज में भर्ती होने की संमती दी पर पल-पल दहशत में रहता था मैं। टीवी में न्यूज़ देखना बंद कर दिया था कि कहीं अचानक कोई डरावनी खबर न मिल जाए।
राहुल को फौज में भर्ती हुए दो साल हो गए, आहिस्ता-आहिस्ता मैं सहज होने लगा। कारगिल से लेकर हर युद्ध में राहुल ने अपनी बहादुरी से परचम लहराए। कितने दुश्मनों को अकेले ने मार गिराया, बेटे के बहादुरी के किस्से सुनकर सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। अब दिल ने स्वीकार कर लिया की राहुल का फैसला गलत नहीं था। आए दिन दुश्मन देश हमारी सरजमीं को बम धमाकों से रक्त रंजीत करके चले जाते थे। कितने मासूम लोग मारे जाते थे। जाँबाज़ सिपाहियों ने एक-एक को मुँह तोड़ जवाब देकर लताड़ा था। आतंकवाद ने हद पार कर दी थी, अब जाकर दुश्मन की नाक को पैरों की जूती तले दबाने में कामयाबी मिली जिसमें अपने बेटे का योगदान देखकर मुझे गर्व हो रहा था।
ज़िंदगी अब सहज लग रही थी तो गौरी जैसी गुणवंती लड़की से राहुल की शादी कर दी और पोते विहान का दादा भी बन गया हूँ। अब घर हरा-भरा लगता है।
राहुल हर पाँच महीने में एक बार घर आता है। पिछली बार दिवाली पर आऊँगा बोलकर गया था। आज दिवाली भी आ गई। बहू सारी तैयारियां कर रही है, घर की दहलीज़ पर रंगोली सजाई है, तोरण टंगे है, दीये जले है बस घर के चिराग का इंतज़ार है। सच में राहुल के आते ही घर में रौनक आ जाती है, बहू का चेहरा खिल जाता है, बस अब जल्दी से राहुल आ जाए।
मैं विहान के साथ पटाखें जलाकर खुशियाँ मना रहा था। यहाँ चारों दिशाओं से पटाखों की गूँज सुनाई दे रही थी, पर हमें क्या पता सरहद पर बम और बंदूकों से गोले बारुदों की बौछार हो रही थी। अचानक से दुश्मन देश ने हमला कर दिया था। इधर हम दीये में तेल सिंचकर रोशनी कर रहे थे और उधर हमारे घर का चिराग सीने पर गोली खाते बूझ रहा था। पड़ोसी रमेश दुबे जी की बेटी आरती ने आकर कहा अंकल जल्दी से टीवी चालू कीजिए, देखिए न्यूज़ में क्या दिखा रहे है। मैंने काँपते हाथों से रिमोट उठाया और टीवी चालू किया कि सरहद पर दुश्मनों से लड़ते हुए मेजर राहुल तिवारी शहीद हुए इन शब्दों को सुनते ही एक दहशत मेरी रूह को झकझोर गई।


मेरी आँखों के आगे अंधेरा छाने लगा, मैंने बहू को आवाज़ लगाई। बहू ने आकर कहा क्या हुआ पापा? मैंने टीवी की तरफ़ ऊँगली की पति का शव देख गौरी ने कुछ पलों के लिए आँखें बंद कर ली, फिर सलाम करते जयहिन्द बोली और मुझे संभालते हुए बोली, पापा खड़े हो जाईये मेरी चिंता मत कीजिए मुझे अपने पति पर गर्व है। आपके बेटे ने गोली सीने पर खाई है पीठ पर नहीं और सिपाही आम मौत नहीं मरते, शहिदी उनकी लकीरों में लिखी होती है। एक दिन तो ये होना ही था, जज़्बा रखिए अभी तो हमें विहान को भी देश का सिपाही बनाकर सरहद पर भेजना है।
गौरी की हिम्मत और हौसला देखकर भी मैं इस सच्चाई को पचाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। महज़ तीस साल की गौरी को मैं ताज़िंदगी विधवा के रुप में कैसे देख पाऊँगा ये सोचकर कलेजा मुँह को आ गया। ज़िंदगी भर जिस परिस्थिति से हम डरते है, भागते है कुदरत वो हमारे सामने परोस ही देती है।
दूसरे दिन जवान बेटे का निश्चेतन शरीर देखकर सीना फटा जा रहा था, आँखें बेतहाशा रोए जा रही थी भविष्य डरावना लग रहा था। ऐसा महसूस हो रहा था मानों पूरी दुनिया में अंधेरा छा गया है, सुनने समझने की शक्ति चली गई थी।

जवान बेटे को कँधा देकर चिता पर सुलाना एक पिता के लिए सीना चीर देने वाली घटना होती है। बेशक भीतर से मैं नखशिख टूट रहा था, हाथ पैर काँप रहे थे पर जब कफ़न के रुप में बेटे के तन पर तिरंगे को पाया तो सर फ़ख़्र से ऊँचा हो गया, छाती चौडी हो गई और गरदन गर्व से ऊँची हो गई। उस पर भी सेना के नौजवानों की सलामी के संग जब खुद प्रधानमंत्री जी ने मेरे बेटे के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देते सलामी दी तब इस अदना से पिता को लगा की दुनिया का सबसे सम्मानीय और धनवान इंसान मैं ही हूँ। लगा कि मौत हो तो ऐसी जिसकी मृत्यु पर पूरे देश को फ़ख़्र हो।
पंडित जी ने विहान के हाथ में मटकी देकर आगे किया तब मेरी नज़र गौरी पर गई, गजब की हिम्मत थी इस लड़की में। गौरी की आँखों में आँसू की जगह ख़ुमारी थी एक शहीद की पत्नी कहलाने की। विहान को उसके पिता के आख़री दर्शन करवाते बोली, बेटा पापा के सर पर हाथ रख कर कसम उठाओ कि मैं भी बड़ा होकर सिपाही बनूँगा और देश की सेवा करूँगा। विहान ने जब कसम उठाई तो आज मुझे डर नहीं लगा बल्कि फ़ख़्र महसूस हुआ की मेरे खानदान में वीर पैदा हुए है। अपने खून पर नाज़ हुआ। और खासकर आज गौरी के तेवर और ख़ुमारी ने मेरे अंदर एक उर्जा और आत्मविश्वास का बीज बो दिया। एक डरपोक पिता आज बेटे को खोकर भी हिम्मतवान बन गया था। आज गर्व से कहूँगा कि मैं एक जाँबाज़ सिपाही का पिता हूँ जिसने हंसते-हंसते मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने आप को कुर्बान किया। जय हिन्द
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भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर

 

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