चाँद – गरिमा  जैन 

भाभी — कुछ तो खा लो। अब तो चांद निकल आया क्या तुमने कसम खा ली है कि भाई के हाथ से ही कुछ खाओगी? अरे कुछ नहीं तो पानी ही पी लो , तुम तो जानती हो भैया कितने लापरवाह हैं, उन्हें तो शायद याद भी नहीं होगा कि तुम पूरे दिन उनके लिए भूखी प्यासी हो , मम्मी ने भी पानी पी लिया है तुम भी मेरी बात मानो भाभी पानी पी लो नही तो चक्कर आएंगे ।

अरे प्रिया यह नहीं मानेगी , एक ही रट लगा के रखी हुई है कि विनीत के हाथ से ही पानी पिएगी। विनीत ही ना पता नहीं कहां है ।फोन भी स्विच ऑफ दे रहा है। मेरा तो मन घबरा रहा है। शाम को ही मैंने 5:00 बजे उसे फोन कर दिया था कि 7:00 बजे तक घर आ जाए अब तो 8:30 बज रहे हैं। प्रिया विनीत के दोस्त को तो फोन कर , शायद उसे पता हो?

कौन शरद भैया जो ऑफिस में साथ काम करते हैं।

हां हां शरद को फोन लगा पूछना विनीत कहां है?

तभी कॉल बेल् बजी

मम्मी मम्मी भैया आ गए और मैंने भागते हुए नीचे जाकर दरवाजा खोला ,तो शरद भैया थे, बोले विनीत आ रहा था लेकिन अचानक उसका एक्सीडेंट हो गया है। वह हॉस्पिटल में है। मैंने उसे एडमिट करा दिया ,घबराने वाली कोई बात नहीं है, शायद फ्रैक्चर हो गया है।

यह सुनते ही मेरे आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा, मुझे खुद से ज्यादा भाभी की चिंता हुई। करवा चौथ के दिन यह कैसा अपशकुन हो गया ! पूरे घर में कोलाहल मच गया। हम सब फॉरेन शरद भैया के साथ गाड़ी में बैठकर हॉस्पिटल पहुंचे। वहां देखा विनीत भैया बेड पर लेटे हैं और उनके पैर पर प्लास्टर बंधा है ।


जैसे हम अंदर गए सबसे पहला शब्द उनके मुंह से निकला “निशा ने कुछ खाया या नहीं? उन्हें जैसे अपना दर्द मालूम ही नहीं पड़ता था ।सबसे पहले चिंता हुई तो भाभी की! फौरन बगल में रखा पानी का ग्लास उन्होंने हाथ में उठाया और निशा के आगे बढ़ाया, भाभी की आंखों से तो आंसू छलक पड़े ।वह अपने दिनभर की भूख प्यास गुस्सा सब भूल गई थी। उन्होंने छलकते आंसू से पानी पिया और विनीत भैया ने अपनी जेब से चॉकलेट निकाली और उसे भाभी को देते हुए कहा -लो पहले अपना व्रत तोड़ लो।

  सच भैया और भाभी की ऐसे तो अरेंज मैरिज थी, मैं हमेशा सोचती थी कि लव मैरिज में ही  इतनी गहरी मोहब्बत होती होगी लेकिन उस दिन भैया भाभी को देखकर ऐसा लगा जैसे शादी सच मे आसमाँ में ही बनती है। मुझे शादी में बड़ा गहरा विश्वास हो गया था। कितनी बार मैंने भाभी से कहा लेकिन भाभी ने सारे कष्ट बर्दाश्त किये थोड़ा बहुत गुस्सा भी किया लेकिन अपना व्रत नहीं तोड़ा। अभी उनका यह पहला ही तो करवा चौथ था ।भैया से मिले दिन ही कितने हुए थे ।शादी को अभी 2 महीने ही हुए थे ।

2 महीने में क्या किसी से इतना प्रेम हो सकता है कि उसके लिए इतना कष्ट सहा जाए और भैया वह तो इतने लापरवाह थे कि उसे एक काम कहो तो सौ 100 दिन तक ना करें आज मेरा दिल भर आया। भाभी ने चॉकलेट खाई और आधी चॉक्लेट जबरदस्ती मुझे और भैया को खिला दी ।वहां सब खड़े हंसने लगे ।

इस बात को सालों बीत गए, मेरा आज पहला करवा चौथ है। चांद के इंतजार में जब छत पर मैं अकेली बैठी थी तो मुझे अनायास ही यह बात याद आ गई मेरे चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ गई ।मेरी शादी को भी अभी दो ही महीने हुए हैं। आज मेरा भी हाल भाभी जैसा ही है। मुझे अपने पति अनिल को मिले ऐसे तो 6 महीने हो चुके हैं सगाई के बाद हमने एक-दूसरे से खूब बातें की लेकिन साथ रहते तो 2 महीने ही… फिर अचानक मेरा मन घबराने लगा ,कहीं अनिल के साथ कुछ बुरा तो नहीं हो जाएगा !

मैंने घड़ी देखी अभी 8:00 बजने में 5 मिनट बाकी थे चांद नहीं निकला था। मैंने अनिल को फोन मिलाया। अनिल का फ़ोन बन्द था। मेरा दिल जोरो से धड़कने लगा । मुझे समझ में नहीं आ रहा था मैं क्या करूं ?मैंने झट से मम्मी को फोन मिलाया ।मैंने कहा मम्मी मेरा मन बहुत घबरा रहा है ,अनिल का फोन स्विच ऑफ आ रहा है ।मम्मी ने कहा परेशान नहीं हो वो जल्दी घर आ जाएगा लेकिन उनकी सांत्वना मेरे काम नहीं आई ।मैंने झट से अपनी कार निकाली और उसी तरह सजी संवरी मैं ना जाने उन्हें कहा तलाश करती  सड़क पर निकल गई ।


एक दो बार उनके ऑफिस तक गयी थी, मुझे रास्ता बहुत अच्छे से याद नहीं था लेकिन गूगल  के सहारे मैं आगे बढ़ने लगी । मेरी नजर सड़क पर दाएं बाएं घूमती, कहीं कुछ अनहोनी तो नहीं हो गई ।अनिल का फोन क्यों स्विच ऑफ आ रहा है? 8:00 बज के 10 मिनट हो चुके हैं वह कहां रह गए उन्होंने तो कहा था कि वह 7:00 बजे तक घर आ जाएंगे।

मैं आगे बढी तभी रास्ते में मुझे एक जगह बहुत भीड़ इकट्ठा दिखाई थी ,मैं बहुत घबरा गई, मैंने कार किनारे लगाई और बहुत भारी कदमों से आगे बढ़ी । मेरा मन बार-बार कह रहा था ,कुछ अनहोनी तो हो ही गई है । मै जल्दी-जल्दी आगे बढ़ि, एक आदमी खून से लथपथ जमीन पर पड़ा था । सब लोग उसे उठाकर एक गाड़ी में रख रहे थे। जैसे ही उसे पलटा गया मेरा चेहरा धक्क  से हो गया ,वह अनिल नहीं थे । मैं समझ नहीं पा रही थी कि मैं रोऊ या खुश हूँ, कोई इसका भी तो शायद घर पर इंतजार कर रहा था ।

मैं गाड़ी की तरफ जाने लगी तभी किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया ।मैं बहुत जोर से डर गई ।मैंने बहुत बड़ी गलती की थी ,मैं सोने के बहुत से गहने पहन  सुनसान सड़क पर अकेले निकल पड़ी थी। अब मुझे अपनी गलती का एहसास हो रहा था। मैंने आव देखा ना ताव और अपने पर्स में हाथ डाला। मैं अपने पास में एक मिर्ची वाला स्प्रे हमेशा रखती हूं ।भाभी कहती थी जब भी अकेले निकलो तो अपनी अपनी सुरक्षा अपने हाथ में रखो। मैंने स्प्रे अपने हाथ से निकाला उसका ढक्कन खोला और पीछे पलट कर बटन दबाने ही वाली थी कि देखा मेरे सामने अनिल खड़े थे! उन्हें देखकर मेरी आंखों से आंसू निकलने लगे और मैं उनसे लिपट के बहुत जोरों से रोने लगी ।

आप कहां रह गए थे ?कहां थे ?तभी मैंने देखा उनकी शर्ट पर खून के धब्बे हैं ।मेरा डर और बढ़ गया ।क्या हो गया है? आपको, आपको चोट लगी है? पहले हॉस्पिटल चलिए !अनिल मुझे अजीब निगाहों से देख रहे थे !  क्या हो गया तुझे? क्यों इतना परेशान हो रही है ?देखा नहीं अभी मेरे दोस्त का कितना बड़ा एक्सीडेंट हो गया है उसी को मैं उठाकर गाड़ी में रखवा रहा था। तुम वही  थी पर तुमने मेरी

तरफ देखा ही नहीं !

मेरा फोन भी ऑफ हो गया था मैं समझ रहा था कि तुम बहुत परेशान होगी पर इस तरह सुनसान सड़क पर  मुझे खोजने के लिए कहां भटक रही थी!  मैं उनकी आंखों में ही देखती रह गयी। मैं उनसे क्या कहती कि मुझे उनसे कितनी मोहब्बत है ये मैं खुद नही जानती…

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