भाभी ! मुझे अपना स्वाभिमान बहुत प्यारा है- कीर्ति महरोत्रा 

बुआ ! मेंहदी , हल्दी और शादी सबके लिए थीम रखी गई है उसी के अनुसार कपड़े रेडी करवाने हैं ” भाई की बेटी शुभांगी खुशी से चहकते हुए बोली । सोना ने हां तो कह दिया और मन में सोचने लगी ” आजकल शादियों में फिजूलखर्ची कितनी बढ़ गई है आम आदमी के तो वश की बात ही नहीं है । पहले एक दो बनारसी साड़ी में मां पूरे खानदान , अड़ोस-पड़ोस , दोस्तों सबकी शादी ब्याह निपटा देती थी लेकिन आज जो कपड़ा एक बार पहन लो उसे दोबारा पहनने में बेइज्जती महसूस करते हैं लोग ये फिजूलखर्ची नहीं तो क्या है ? मैं तो ऐसी फिजूलखर्ची नहीं कर सकती मुझे अपने पति की जेब देखनी है ना कि शो-ऑफ करना है ।

लोग मुझे हेय दृष्टि से देखें तो देखते रहें लेकिन मैं एक शादी में जरा देर के लिए ये फिजूलखर्ची नहीं करने वाली ……. सोना एक मध्यमवर्गीय परिवार की गृहिणी वो संयुक्त परिवार में सास-ससुर सबके साथ रहती पति की आय का श्रोत सिर्फ एक दुकान जिससे उसके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और घर परिवार का खर्च चल जाता लेकिन फालतू खर्च करने के लिए कुछ नहीं बचता । सोना बड़ा खींचतान कर घर का खर्च चलातीं लेकिन कभी किसी के सामने अपने घर की परेशानियों का रोना नहीं रोती । वो जल्दी किसी के घर भी नहीं आती जाती । अब इस बार तो खुद‌ के भाई की बेटी की शादी थी और आजकल की हाय फाय शादियों का ट्रेंड सबसे ज्यादा मध्यमवर्गीय परिवार की जेब पर भारी पड़ता है। उसने सोचा सोचकर सबकी बराबरी करके परेशान होने की बजाय समझदारी भरा निर्णय लिया कि शादी तो एक दिन की है वहां इतना खर्च करने से अच्छा मैं वो पैसे बच्चों की पढ़ाई लिखाई के आकस्मिक खर्चों के लिए संभालकर रखूं। मैं कुछ भी पहनकर जांऊ कोई मुझे भगा तो नहीं देगा । उसके पास जो भी कपड़े थे वो उन्हीं में तैयार होकर पूरे आत्मविश्वास के साथ हल्दी के फंक्शन में ग‌ई । वहां उसे देखते ही उसके सभी रिश्तेदारों के मुंह बन ग‌ए सब आपस में खुसुर फुसुर करने लगे ।

तब तक सोना की भाभी जया जी बेहद खूबसूरत पीले रंग के शरारे कुर्ते में भारी भरकम जेवरों से लदीफदी उसके पास आई और उसका हाथ पकड़कर खींचती हुई एक कोने में ले जाकर बोली ” जीजी ! हद करती हैं आप भी ,भतीजी के हल्दी फंक्शन में कोई ऐसी साधारण सी साड़ी पहनकर आता है और किसी चीज की कोई मैचिंग नहीं ,आजकल तो कितने अच्छे अच्छे ड्रेसेज और लहंगों का ट्रेंड चल रहा है साड़ी तो बहुत ओल्ड फैशन्ड लोग पहनते हैं । आपके पास नहीं था तो आप हमें बता देती हमारे पास तो ड्रेसेज से अलमारी भरी पड़ी है ।




हम तो एक बार पहनने के बाद दोबारा पहनते भी नहीं । अरे भाई ! सोशल मीडिया पर पिक्स अपलोड होंगी तो लोग क्या कहेंगे ” इनके पास तो एक ही ड्रेस है ” अपने स्टेटस का तो ख्याल रखना ही पड़ता है जल्दी से कमरे में चलकर चेंज कर लीजिए वरना हमारी क्या इज्जत रह जाएगी रिश्तेदारों और दोस्तों के बीच और शादी के लिए भी आप हमारी ही कोई ड्रेस ले लीजिएगा और मैचिंग ज्वैलरी भी ” अपनी बात कहकर वो सोना की तरफ इस उम्मीद से देखने लगी कि उनके कहते ही तुरंत लपककर पहनने के लिए खुशी खुशी तैयार हो जाएगी लेकिन सोना तो स्वाभिमानी नारी ठहरी उसने अपना हाथ जया जी के हाथों से छुड़ाते हुए कहा ” भाभी ! आप‌ रिश्तों को कपड़ों से तौलती हैं मतलब आपसी प्यार अपनेपन का कोई मोल नहीं आज रिश्ते दिखावे पर टिके हैं ।

मुझे लगा कि अपने ऊपर फालतू खर्च करने से अच्छा मैं अपनी भतीजी को उपहार में सोने का कोई गहना या रूपयों का चैक बनवाकर दूं जो स्त्री धन के रूप में उसके साथ जाएगा । एक दिन की शादी में फालतू दिखावे के लिए अपने पति का दीवाला क्यों निकालूं ? मैं पहनकर आई हूं तो मुझे बुरा नहीं लग रहा ना तो मैं भीड़ से अलग दिख रही हूं फिर आप इतनी चिंतित क्यों हो रही हैं । जो भी कहें आप साफ साफ शब्दों में कह दीजिए मेरी ननद इतनी संपन्न नहीं है जो हाय फाय शादियों के कपड़े गहनों का खर्च उठा सकें इसलिए वो‌ तो अपनी रखी हुई पहले की पुरानी साड़ी पहनकर चली आई । मैं तो सिर्फ अपनी भतीजी शुभांगी से प्यार और लगाव की वजह से आई थी ,बचपन से उसे अपने हाथों से पाला पोसा और खिलाया है उसे गोद में खिलाकर अपने अंदर मातृत्व को महसूस किया है मैंने लेकिन ये नहीं पता था कि यहां मेरी भाभी इस तरह से मेरे प्यार अपनत्व का मखौल उड़ाकर अपमान करेंगी ” कहते हुए अपमान से सोना की आंखें छलछला आई वो जल्दी से छुपाकर पोंछने लगी कि कहीं कोई ये ना कह दे कि भतीजी की शादी में अपशकुन करने चली आई ।




” बुआ ! आप मुझसे एक बार कह देती तो मैं ये सब बवाल नहीं करती आपकी इज्जत और परिस्थितियों का ख्याल रखती क्योंकि मुझे आपसे प्यार है इन फालतू की रस्मोरिवाज की चकाचौंध से नहीं जहां हर चीज बनावट और दिखावे से भरी होती है । आपकी गोद में मैंने जो ममता महसूस की है वो अनमोल है मेरे लिए ना कि ये गहने कपड़े ,मेरी शादी में मेरी प्राणों से प्यारी बुआ की उपस्थिति अनिवार्य है ना कि सोशल मीडिया पर गहने कपड़ों का दिखावा । मां ! आपने आज बुआ के साथ साथ मेरा भी बहुत दिल‌ दुखाया है ” ये कहकर शुभांगी अपनी बुआ सोना के गले लगकर रोने लगी । ना बिटिया रानी ! आज के शगुन में आंसू नहीं निकलने चाहिए तुम तो हंसती मुस्कुराती खिलखिलाती चिड़ियों की तरह चहचहाती ही अच्छी लगती हो । मुझे बहुत अच्छा लगा कम से कम तुमने मेरे स्वाभिमान मेरी ममता की लाज रखी “।

” तो बुआ ! आप मेरी शादी के सारे फंक्शन अटैंड करेंगी और अब से कोई ड्रेसकोड नहीं जिसके पास जो भी है वो‌ पहनकर आने के लिए फ्री है ” । ” सोना ! हमारी गलती के लिए हमें भी माफ कर दो अनजाने में तुम्हारा अपमान करके बहुत दिल‌ दुखाया है ” । ” आइंदा से ध्यान रखिएगा भाभी ! मुझे मेरा स्वाभिमान और पति की इज्जत बहुत प्यारी है मैं उन औरतों में से नहीं हूं जो फालतू के शो ऑफ के लिए अपने घर में अव्यवस्था और अशांति फैला दूं । मैं एक समझदार नारी हूं जो इस बात में विश्वास करती है कि ” जितनी चादर हो‌ उतने‌ ही पैर‌ पसारने चाहिए ” । ” हैट्स ऑफ यू बुआ ! आपका ये गुरू मंत्र मैं भी हमेशा याद रखूंगी ” । दोस्तों आपको मेरी ये स्वरचित और मौलिक रचना कैसी लगी कृपया पढ़कर अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया जरूर दें आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है मुझे फॉलो भी जरूर करें । जल्दी ही मिलती हूं आपसे अपने न‌ए ब्लाग के साथ तब तक के लिए
किर्ति महरोत्रा
राम राम 🙏

# स्वाभिमान

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