वचन (भाग -1)- माता प्रसाद दुबे

गीता के मन में भय समाया हुआ था..कि कही रवि के मम्मी पापा उसे अस्वीकार न कर दें..एक हादसे ने उससे उसका सब कुछ छीन लिया था..पहले पिता फिर उसकी मां भी उसका साथ छोड़कर परलोक सिधार गई थी।

एक रवि के सिवा उसका साथ देने वाला और कोई नहीं था।रवि दो साल पहले ही उनकी सोसाइटी में आया था..उसका गांव शहर से दूर था..रवि प्रतिष्ठित कम्पनी में सर्विस करता था..वह अकेला ही रहता था धीरे-धीरे रवि और गीता में नजदीकियां होने लगी वे एक दूसरे को पसंद करने लगे उसकी मम्मी भी रवि को पसंद करती थी,उसे बेटे की तरह प्यार करती थी..रवि ने उसकी मम्मी के अंतिम समय में गीता का हाथ कभी न छोड़ने और जीवन भर का साथ निभाने का वचन दिया था।

रवि गीता के साथ अपने घर पहुंच चुका था..उसके साथ एक लड़की को देखकर गांव के लोगों की नजरें उन्हें घूर रही थी। रवि के घर में उसकी मां जानकी देवी पिता ब्रजभान सिंह जो गांव के प्रतिष्ठित व्यक्ति थे उनके साथ उसकी बड़ी दीदी प्रभा एवं जीजा अपने दो बच्चों के साथ रहते थे। रवि के बाहर रहने के कारण प्रभा जिसका घर गांव से कुछ किलोमीटर दूरी पर स्थित था वह अपने पति के साथ अपने पिता के घर पर ही रहती थी।




घर के सामने मां को देखकर उनके चरणों को स्पर्श करने के बाद रवि अपनी मां जानकी देवी से लिपट गया।”बहुत दिन बाद आया है बेटा!और यह लड़की कौन है तेरे साथ?” जानकी देवी गीता की तरफ इशारा करते हुए बोली। गीता! यह मेरी मम्मी है?”रवि गीता की ओर देखते हुए बोला। गीता ने झुककर जानकी देवी के चरणों को स्पर्श किया

। खुश रहो बेटी?”जानकी देवी गीता को आशीष देते हुए बोली।चलो मम्मी! अंदर चलों?”कहकर रवि गीता के साथ घर के अंदर जाने लगा।”किसे ले आए रवि भैया अपने साथ अपनी दीदी को नहीं बताओगे?”रवि की बड़ी बहन प्रभा गीता की ओर देखते हुए बोली।

दीदी! प्रणाम?”कहते हुए रवि ने प्रभा के चरण स्पर्श किए।सब कुछ बताउंगा दीदी!”रवि गीता को बैठने का इशारा करते हुए बोला।”मामा! मामी को लेकर आए हैं मम्मी?”प्रभा का बेटा बंटी खुश होते हुए बोला।”चुप हो जा बदमाश,सबको अपनी मामी बनाने लगता है?”प्रभा बंटी को डांटते हुए बोली। रवि बंटी की ओर देखकर मुस्कुरा रहा था।

गीता बुत की तरह चुपचाप बैठी थी। “आ गया शहर से दो महिने क्यों नहीं आया..फोन करके काम बताता रहा हमें भी तो पता चले क्या काम फस गया था?”रवि के पिता अंदर आते हुए बोले।”कुछ नहीं पापा बाद में बताऊंगा?”रवि ब्रजभान सिंह के चरण स्पर्श करते हुए बोला। खुश रहो..यह लड़की कौन है?

“ब्रजभान सिंह रवि से सवाल करते हुए बोले। गीता ने रवि के पापा के चरण स्पर्श किए उन्होंने उसे आशीर्वाद दिया। पापा! अभी तो मैं आया हूं बाद में बताऊंगा?”रवि विनती करते हुए बोला। ठीक है बेटा!”ब्रजभान सिंह मुस्कुराते हुए बोले।

“अब उससे सवाल ही करते रहोगे या उसे कुछ खाने पीने नहीं देंगे आप सफर करके आया है?”जानकी देवी गुस्साते हुए बोली।सब लोग शांत हो गए रवि और गीता थके हुए थे खाना खाकर वे जल्दी सो गए।

प्रभा परेशान थी उसके मन में अनगिनत सवाल उठ रहे थे अपने पति रिंकू सिंह के आने पर वह देर रात तक गीता के बारे में ही वे लोग बात करते रहे।

दूसरे दिन सुबह रवि ने अपनी मम्मी पापा को गीता के बारे में सारी बातें बिना किसी संकोच के बताया और उसे अपना जीवन साथी बनाने के फैसले एवं गीता की मां को दिए गए वचन के बारे में सारी बातें स्पष्ट रूप से अपने माता-पिता के सामने रख दिया  “देखने में तो सुंदर सुशील लड़की है मुझे तो पसंद है?

“जानकी देवी खुश होते हुए बोली। “ठीक है..मगर उसकी जाति क्या है बेटा!” ब्रजभान सिंह रवि से सवाल करते हुए बोले। पापा!वह गुप्ता है ठाकुर नहीं है?”रवि हिचकिचाते हुए बोला। सुनकर ब्रजभान सिंह खामोश हो गए वह कुछ नहीं बोले “ठीक है..

अब मैं दामाद जी और अपने नाते रिश्तेदारों से इस बारे में राय मशविरा करके जवाब दूंगा?” कहकर ब्रजभान सिंह कमरे से बाहर चले गए।”तू चिंता मत कर बेटा! मुझे गीता बेटी पसंद है?” जानकी देवी रवि को दिलासा देते हुए बोली।

प्रभा और उसके पति रिंकू सिंह ने बृजभान सिंह को भड़काना प्रारंभ कर दिया और उन्हें रिश्ते नाते और इज्जत का हवाला देकर बृजभान सिंह को गीता और रवि की शादी करने के खिलाफ करने में कामयाब हो गये।”रवि बेटा!

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वचन (भाग -2)

वचन (भाग -2)- माता प्रसाद दुबे

#बहु 

माता प्रसाद दुबे

मौलिक स्वरचित

अप्रकाशित कहानी

लखनऊ

 

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