रिक्त स्थान (भाग 19) – गरिमा जैन

पता है रेखा मैं ,पूनम, स्वाति, नैना सब बचपन में एक साथ, एक ही स्कूल में पढ़ते थे । नैना हमारे ग्रुप में नहीं थी लेकिन हमारी अच्छी दोस्त जरूर थी। नैना बचपन में ऐसी नहीं थी जैसी वह बड़ी होकर बन गई लेकिन इसमें उसकी भी क्या गलती थी!!मुझे आज भी याद है हम क्लास 5th में थे जब उसकी मम्मी इस दुनिया में नहीं रही थी ।कुछ दिनों बाद मालूम पड़ा था कि उसकी नई मां आ गई।उसके बाद से नैना बदलती चली गई ।उसके बात करने का अंदाज़ ,उसके कपड़े पहनने का  तरीका। फिर दसवी कक्षा में तो आते आते उसे ड्रग्स लेते पकड़ा गया था फिर हम सबने खासकर मैंने उससे दूरी बना ली थी। मालूम पड़ा था कि उसकी नई मां शराब भी पीती थी और शायद ड्रग्स भी लेती थी।

उस समय हमारे लिए यह सब नई नई चीज थी ।हम सब बहुत घबरा गए थे ।नैना के लिए बहुत बुरा लगा था लेकिन नैना तब बहुत बदल गई थी। पढ़ाई में उसके ग्रेड भी गिरते जा रहे थे ,फिर 12वीं पास करते करते हम सब अपनी अलग-अलग मंजिल की तरफ चल दिए।

नैना से कई वर्षों तक मुलाकात नहीं हुई ।फिर उस शाम जब मेरी और स्वाति की सगाई थी तब मैंने नैना को देखा था और हम में से कोई भी उसे पहचान नहीं पाया था ।नैना बिल्कुल बदल चुकी थी ।उसने मुझसे मिलते ही बड़ी अजीब सी बात कही उसने मुझसे कहा “जितेंद्र तुमने तो मुझे धोखा दे दिया” मैं उसे अचरज भरी नजरों से देखने लगा ।मैंने उससे कभी कोई वादा ही नहीं किया था। हां बचपन में आठवीं कक्षा में उसे वैलेंटाइन डे पर कार्ड जरूर दिया था ।सबसे खूबसूरत लड़की जो थी हमारी क्लास की। लेकिन वह सब तो बचपन की बात थी। हंसी मजाक में वह बात कहां चली गई मैं तो भूल भी गया लेकिन नैना शायद नहीं भूली थी ।उसने उस बात को बहुत सीरियसली ले लिया था ।फिर वह मेरे ऑफिस में ही काम करने लगी तो हम लोग का मिलना अक्सर होता लेकिन मुझे उसकी बातों में बनावटी पन लगता। वह बचपन वाली नैना नहीं  थी इतने साल विदेश में रहने के बाद उसकी सोच भी बहुत बदल गई थी लेकिन तब भी नैना से मेरी कोई दुश्मनी नहीं थी जब तक वह शाम नहीं आई थी।

रेखा जितेंद्र से पूछती है “कौन सी शाम ??क्या हुआ था?? आखिर ऐसा क्या हुआ नैना के साथ जिसका बदला आज तक तुमसे ले रही है।”

” बड़ी खराब शाम थी । शहर में नया नया डिस्को खुला था मेरे दोस्त ने खोला था ।उसकी ओपनिंग में हम सब इनवाइटेड थे ।मैं स्वाति ,पूनम ,नैना और हमारे कई दोस्त। हम सबको वहां पर तरह तरह के मास्क लगाकर जाना था पार्टी का यही ड्रेस कोड था ।हम सब बहुत मजा कर रहे थे। म्यूजिक पर डांस करना ,ड्रिंक्स ,मस्ती जैसा अक्सर यंगस्टर्स करते हैं। रेखा तुम किस डिस्को में जाती हो?

रेखा सोच में पड़ गई, डिस्को तो वह कभी नहीं गई ,हां शादी में उसकी डांस की तारीफ कई लोगों ने की थी।वह सोचने लगी जितेंद्र क्या सोचेगा वह इतने बड़े शहर में रहकर आज तक डिस्को तक नहीं गई ।वह कुछ नहीं कहती है ।

जितेंद्र आगे बताता है “उस दिन मैंने और स्वाति ने बहुत मजा किया, डांस करते करते अचानक स्वाति बहुत तेज से चीखी ।किसी ने उसे पिन चुभा दी थी । सच में उसके हाथ से खून का एक कतरा बाहर आया था। मैंने देखा एक ऊंची सैंडल पहने लड़की तेजी से बाहर की तरफ से जा रही है। मैं समझ गया इसी ने स्वाति को जख्मी किया है ।उन दिनों यह बात आम हो गई थी ।कहते थे कि ड्रग्स पिन में भरकर  इंजेक्ट कर लेते थे ।मैं उस लड़की के पीछे दौड़ा लेकिन तभी मुझे बहुत तेजी से गिरने की आवाज आई ।पीछे पलट के देखा तो स्वाति बेहोश होकर गिर गई थी। मैं उसे लेकर तुरंत हॉस्पिटल गया और मेरे कई दोस्त भी साथ थे। डॉक्टर ने कहा कि इसे बहुत ही कंसंट्रेट मात्रा में ड्रग्स इंजेक्ट कर दी गई है। स्वाति को अस्पताल लाने में थोड़ी और देर  हो जाती तो उसकी जान पर  बन आती। 15 दिनों तक वह अस्पताल में भर्ती रही ।उसे चलने में भी दिक्कत होने लगी थी। काफी कुछ वही हाल हुआ था जो हमारा हुआ था।

रेखा यह  सुनकर बहुत आश्चर्य में पड़ गई।

बाद में तहकीकात से यह मालूम पड़ा कि वह नैना मल्होत्रा थी।सीसीटीवी  कैमरे मे वाह साफ दिख रही थी।उसकी  गाड़ी का नंबर भी ट्रेस हो गया था लेकिन क्योंकि नैना के पिता से हमारी बहुत पुरानी दोस्ती थी इसलिए उनके कहने पर किसी ने भी पुलिस में कंप्लेंट नहीं की थी नहीं तो शायद नैना लंबे समय के लिए जेल जा सकती थी। स्वाति को इस बात की भनक भी नहीं लगने दी गई कि नैना ने उसके साथ ऐसा किया था। हमेशा हम यही कहते रहे कि पुलिस इन्वेस्टिगेट कर रही है जल्दी ही वह लड़की मिल जाएगी। लेकिन यह मेरी बहुत बड़ी गलती थी मुझे समझ में ही नहीं आया था कि नैना ने आखिर स्वाति पर ऐसा जानलेवा हमला क्यों किया था ?अगर मैं समझ गया होता तो आज मेरी जिंदगी चौराहे पर नहीं खड़ी होती ?शायद स्वाति आज भी जिंदा होती!! मैं समझ ही नहीं पाया कि नैना मुझसे एक तरफा मोहब्बत करने लगी थी और आज से ही नहीं वह कई वर्षों से करती थी!!

“लेकिन जितेंद्र इसमें तो आपकी भी गलती हुई ना

आठवीं कक्षा में आपने उसे वैलेंटाइन डे वाले दिन कार्ड दिया ।लड़कियों के दिल बहुत कोमल होता है ।नैना की मां नहीं थी ।जरा सा प्रेम का एहसास उसे दिल की गहराइयों तक छू गया होगा ।उसी समय आपको दिल दे बैठी होगी। और आपके लिए यह  बचपन की बात थी। उस प्यार का एहसास लिए वह पढ़ने बाहर चली गई लेकिन जब वो लौटी तो आप और स्वाति एक साथ थे। उसके दिल पर क्या बीती होगी मैं समझ सकती हूं ।पहले प्यार की असफलता का दंश वह सह नहीं पाई होगी लेकिन उसने जो रास्ता अपनाया वह बिल्कुल गलत था। उसने एक तरफा प्यार करने की बहुत बड़ी गलती की थी जिसकी कीमत वह आज तक चुका रही है ….

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रिक्त स्थान (भाग 18) – गरिमा जैन

गरिमा जैन 

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