मैं किसी भी बेटी की चुनरी में दाग़ नहीं लगने दूंगी – सुषमा यादव : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi : कमला का अपने पति से तलाक का मुकदमा चल रहा था।

उसके एक अठारह साल की बेटी थी। बार-बार थाने और कोर्ट का चक्कर लगाते लगाते उसकी जान पहचान एक इंस्पेक्टर से हो गई।

वो उसके साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करता, उसे अपनी मोटरसाइकिल से घर छोड़ने जाता तो औपचारिकता दिखाते हुए कमला उसे अपने घर पर चाय के लिए पूछने लगी। एक दो बार मना करने के बाद वह चार पीने अक्सर घर में आ जाता।

कमला की बेटी नीला चाय बना कर ले आई। नमस्ते अंकल, नमस्ते, कहकर इंस्पेक्टर उसे अपलक निहारने लगा। कमला ने कहा,ये मेरी बेटी है। अच्छा, बहुत प्यारी है।कहकर मुस्कुराने लगा।

अब वो कमला को कोर्ट भी ले जाने लगा। कई ऊपरी काम भी कर देता।

कमला को उसका मदद करना बहुत अच्छा लगता।वह अपनी बेटी से कहती,बेटा, अंकल बहुत भले आदमी हैं , हमारी बहुत सहायता करतें हैं।जी मम्मी, कहकर नीला अपने कमरे में चली गई,पर उसे वो अंकल बिल्कुल अच्छे नहीं लगते थे। उसे कितनी गन्दी नजरों से घूरते हैं।

एक दिन कमला ने इंस्पेक्टर से कहा,कल वो सुबह किसी काम से अपनी सहेली के घर जायेगी।शाम तक वापस आयेगी।

तो आप मुझे लेने नहीं आना।

इंस्पेक्टर की बांछे खिल उठी।

दूसरे दिन दोपहर को इंस्पेक्टर कमला के घर गया, दरवाजा खटखटाया। नीला ने भागते हुए दरवाजा खोला, मम्मी आप आ गईं।पर सामने इंस्पेक्टर को देख कर घबरा गई, अंकल,आप, मम्मी तो नहीं हैं। हां, मुझे मालूम है। वो आ रहीं हैं,आज उनकी कोर्ट में पेशी है, लेने आया हूं। पानी पिला दोगी क्या।

नीला जैसे ही पानी लेने अंदर गई। इंस्पेक्टर ने झट से दरवाजा बंद कर दिया। नीला को खींच कर बेडरूम में ले गया। नीला चिल्लाने लगी, अंकल आप क्या कर रहे हैं। प्लीज़ मुझे छोड़ दीजिए। अरे जानेमन, कैसे छोड़ दूं, बहुत तड़पाया है तुमने।

शिकारी  रोते, गिड़गिड़ाते हुए शिकार को अपने काबू में करने की कोशिश कर रहा था। इतने में बाहर दरवाजा पीटने की आवाज आई,कमला अपनी बेटी की चीख-पुकार सुनकर अपने होश खो बैठी। दरवाजा खोलो, क्या हुआ बेटा। 

मां मुझे बचाओ,इस कमीने से।

नीला के साथ आये हुए वकील ने कहा, दरवाजा खोलो वरना तोड़ दूंगा। मैं अभी पुलिस को बुलाता हूं। यह सुनकर इंस्पेक्टर जल्दी से आया और दरवाजा खोल कर भागना चाहा, परंतु दोनों ने मिलकर उसे दबोच लिया, वकील ने खूब मारा और पुलिस को बुला कर उनके हवाले कर दिया।

कमला बेचारी सन्न रह गई,इसे भला पुरुष माना था यह तो वासना का पुतला एक राक्षस निकला। अपनी बेटी को गले लगा कर चुप कराते हुए उसने कठोर फैसला लिया।

इंस्पेक्टर ने अपने समय में अपराधियों को खूब पीटा मारा था, जेल में सबने मिलकर उसकी अच्छी खासी धुलाई करके अपना बदला ले लिया।

इंस्पेक्टर बहुत पहुंच वाला था,कमला को केस वापस लेने के लिए खूब दबाव डाला गया। पैसों का लालच दिया गया।

पर कमला टस से मस नहीं हुई।

वह पत्थर बन चुकी थी। इंस्पेक्टर ने गिड़गिड़ाते हुए कहा, मुझसे बहुत बड़ी ग़लती हो गई, मुझे माफ़ कर दो। मैं अब किसी भी लड़की की तरफ आंख उठाकर भी नहीं देखूंगा । मेरी नौकरी पर दाग लग जायेगा हमेशा के लिए।

मुझे बचा लो।

कमला ने घृणा से उसे देखते हुए कहा, अच्छा, तुझे बचा लूं,केस वापस ले लूं।तेरा दिया गया धन मेरी बेटी के दामन में यदि दाग लग जाता तो क्या उसका दाग धो देता।, ये दाग तो जिंदगी भर उसके साथ रहता।  बदनामी और कलंक का दाग लेकर वो जिंदा रह सकती क्या ?

मैं तुझे छुड़वा कर ना जाने कितनी बेटियों की चुनरी दागदार करवा दूंगी। ना जाने तूने कितनी बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ किया होगा? 

” नहीं, नहीं,अब मैं किसी भी बेटी की चुनरी में दाग़ नहीं लगने दूंगी” 

वकील और कमला तथा उसकी बेटी की गवाही से इंस्पेक्टर को कड़ी से कड़ी सजा सुनाई गई। कमला को कोर्ट के फैसले से बहुत राहत मिली।

सुषमा यादव प्रतापगढ़ उ प्र

स्वरचित मौलिक अप्रकाशित

#दाग

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