एक बार फिर (भाग 32 ) – रचना कंडवाल : Moral stories in hindi

अब तक आपने पढ़ा कि शेखर प्रिया की दी के यहां डिनर पर जाता है। जहां प्रिया शेखर से मिल कर प्राब्लम साल्व कर लेती है। वो रियलाइज करती है कि शेखर उसके लिए सबसे इम्पोर्टेंट है। दोनो दोबारा से दोनों एक हो जाते हैं

अब आगे –

प्रिया ऑफिस में फाइल्स चैक कर रही थी। सुबोध राय के टोंट से उसका दिमाग भन्ना‌ गया था।

ग्यारह बज चुके थे तभी चपरासी ने आकर बताया कि मैम आपसे मिलने कोई लड़की आई है।

कौन है???

कह रही है कि बहुत जरूरी काम है।

ठीक है मैं देखती हूं।

उसने कंचन को बुला कर पूछा।

क्या किसी को टाइम दिया है। नो मैम‌ इस समय तो किसी को नहीं बुलाया है।

उसे मना कर दो, आज वैसे भी बहुत बिजी शेड्यूल है।

अभी बारह बजे मुझे मीटिंग लेनी है।

मैम उन्होंने नाम भिजवाया है चपरासी ने आकर बताया।

मैम कोई “राधिका गेरा” हैं, खुद को विक्रांत खन्ना की सेक्रेटरी बता रही हैं।

विक्रांत खन्ना का नाम सुन कर प्रिया चौंक ग‌ई।

उसने उसे अंदर बुला लिया।

आने वाली लड़की काफी स्मार्ट और खूबसूरत थी।

हैलो मैम,

कहिए

मैं मिस्टर विक्रांत खन्ना की सेक्रेटरी हूं।

मिस रिनी खन्ना आपसे मिलना चाहती हैं।

क्यों??? मैं तो उन्हें नहीं जानती हूं।

उन्हें आपसे कुछ बात करनी है।

उन्होंने होटल “सन व्यू” में आज शाम साढ़े सात बजे मीटिंग टाइम फिक्स किया है।

आप अपनी मैम से कहिए कि वो मुझसे मिलना चाहती हैं मैं नहीं इसलिए जगह और वक्त मैं डिसाइड करूंगी वो नहीं।

और मैं बहुत बिजी हूं इसलिए मुझे फोन नंबर दो।

उस लड़की के जाने के बाद प्रिया का ध्यान रिनी खन्ना की ओर चला गया।

वो मुझसे मिल कर क्या करेगी ??? कल रात भी मैंने उसका फोन सुना था।

इस बारे में शेखर को बता देती हूं पर कहीं वो परेशान हो गए तो?? कल रात मैंने उनकी हालत देखी थी।

न बताने से तो नाराज हो जाएंगे बताना ठीक रहेगा।

सोचते सोचते उसे टेंशन हो गई।

उधर कुंदन शेखर के साथ उसकी गाड़ी में था।

सर! विक्रांत खन्ना की सेक्रेटरी आपकी वाइफ से ‌मिलने उनके ऑफिस ग‌ई थी।

अंदर क्या बातचीत हुई अभी पता नहीं है। पर जल्द ही पता चल जाएगा।

गुड तुम अपना काम करते रहो।

उसके जाने के बाद शेखर परेशान हो गया। रिनी प्रिया से मिलने की कोशिश कर रही है वो मुझे प्रिया से अलग करना चाहती है और मैं ऐसा होने नहीं दूंगा।

तभी प्रिया का कॉल आ गया।

हैलो! हां बोलो मेरी जान उसकी आवाज में नरमी थी।

आप कहां हैं ???

ड्राइव कर रहा हूं साइट पर जाऊंगा।

प्रिया को उसकी आवाज में कुछ महसूस हुआ।

आप परेशान हैं???

नहीं तो, फिर आवाज में उलझन क्यों है???

कुछ नहीं है ड्राइव कर रहा हूं इसलिए लग रहा होगा।

मैंने आपको कुछ बताने को फोन किया है।

बोलो,

विक्रांत खन्ना की सेक्रेटरी मेरे ऑफिस आई थी।

क्यों?? क्या कहा उसने? उसने गाड़ी साइड पर लगा दी।

वो कह रही थी कि रिनी खन्ना मुझसे मिलना चाहती है।

आज शाम साढ़े सात बजे होटल “सन व्यू” में

फिर तुमने क्या कहा??? उसकी आवाज की बेचैनी प्रिया ने महसूस की।

मैंने कहा उसे मुझसे मिलना है मुझे नहीं इसलिए जगह और वक्त मैं डिसाइड करूंगी।

“दैट्स माई वाइफ” उसकी आवाज में खुशी झलक उठी।

“मिसेज बाधवा” ऐसी ही होनी चाहिए एक बात ध्यान में रखना तुम राजशेखर बाधवा की वाइफ हो तुम्हें यही एटीट्यूड सूट करता है।

मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं।

अभी मिसेज बाधवा बनी कहां हूं?? प्रिया हंस पड़ी

वो तो तुम चाहो न चाहो मैं तुम्हें बना कर रहूंगा।

उस जगह पर,मेरी जिंदगी पर मुझ पर सिर्फ तुम्हारा हक है कहते हुए वह इमोशनल हो गया।

यकीं कर लूं आपकी बात पर??? प्रिया धीरे से बोली

मैं तो शादी के बगैर ही वो जगह तुम्हें देना चाहता हूं पर तुम करीब आने का मौका देती ही कहां हो?? उसने उसे छेड़ते हुए कहा।

कुछ देर की चुप्पी के बाद शेखर ने कहा तुम सचमुच उससे मिलना चाहती हो?

हां, सिर्फ आपके लिए मिलना चाहती हूं।

मेरे लिए मतलब??? शेखर वो आपको ब्लैकमेल कर रही है कि वो मुझे सब कुछ बता देगी और मैं इस किस्से को खत्म कर देना चाहती हूं।

जिससे हमारी जिंदगी में कोई डर न रहे।

मैं उसे आपके मन से हमेशा के लिए निकाल देना चाहती हूं।

मैं उससे मिलूंगी जरूर पर वहां आप भी मौजूद रहेंगे।

चाहे आप सामने न हों पर उसकी बातें सुन सकेंगे।

काश! तुम इस समय मेरे पास होती तो मैं तुम्हें बाहों में लेकर जबरदस्ती तुम्हारे ओंठो को चूम लेता।

क्योंकि तुम्हारे साथ तो जबरदस्ती ही चलेगी आसानी से तो तुम हाथ नहीं आओगी।

अच्छा मैं अब फोन रख रही हूं।

क्या होगा तुम्हारा ??? इतना शरमा कर कहां जाओगी??

मन ही मन “बेशर्म” कह कर उसने फोन रख दिया।

अलबत्ता उसका चेहरा सुर्ख हो गया था।

विक्रांत खन्ना अपने ऑफिस में बैठा हुआ किसी से बात कर रहा था।

तभी रिनी अंदर आते हुए बोली।

भाई क्या राधिका आ गई ??? नो “शी इज ऑन द वे”

वो बेचैन हो कर चहल-कदमी करने लगी। इतना परेशान क्यों हो?? बैठ जाओ।

भाई शेखर ने उसके लिए मुझे छोड़ दिया मैं देखना चाहती हूं कि आखिर वो है कैसी??

जिसने रिनी खन्ना की खूबसूरती, स्टेटस, नाम सबको फेल कर दिया।

एक मिनट रिनी यहां तुम गलत हो।

शेखर तुम्हें काफी पहले छोड़ चुका था। परन्तु मैं तुम्हारा साथ इसलिए दे रहा हूं कि मुझे शेखर को मजा चखाना है। मैं उसे गम देना चाहता हूं। उसने हमारी पार्टनरशिप तोड़ी थी उसे उसका भुगतान तो करना ही होगा।

ये सिर्फ तभी हो सकता है जब उससे उसकी सबसे प्यारी चीज छिन जाए।

और मैंने उसकी आंखों में देखा है कि वो उस लड़की से बहुत प्यार करता है उसके लिए बेखौफ होकर वो हमारे घर चला आया था।

रिनी तड़प उठी, बस भी करो भाई

वो सिर्फ मेरा है आज के बाद वो लड़की उसे खुद छोड़ देगी।

देखते हैं।

राधिका आ चुकी थी।

मे आई कम इन सर?

आओ इतनी देर कैसे हुई??? रिनी ने उसे देखते हुए कहा।

मीटिंग का बता दिया उसे?

उन्होंने मना कर दिया,

कहा है कि मिलना आप चाहती हैं वो नहीं इसलिए टाइम और जगह वह तय करेंगी।

उसकी इतनी हिम्मत??? उसने रिनी खन्ना को मना किया। उसकी मुट्ठियां गुस्से में तन गई।

तुम जाओ?? विक्रांत ने राधिका को कहा।

उसके जाने के बाद विक्रांत रिनी की तरफ मुड़ा। तुम बेवकूफ थी और हमेशा रहोगी।

बाहरी लोगों के सामने ओवर रिएक्ट मत करो।

फिर क्या करूं??? हाथ पर हाथ धर कर बैठ जाऊं ??

ऐसा किसने कहा??? सही समय और सही मौके का वेट करो। वैसे भी तुम जल्दबाजी में सब कुछ बिगाड़ चुकी हो।

शेखर तुम्हारे हाथ से जा चुका है तुम जितनी जल्दी समझ जाओ तुम्हारे लिए ही अच्छा होगा।

नहीं भाई एक आखिरी दाव बाकी है।

इतने में उसका (रिनी) फोन बज उठा।

क्रमशः

©® रचना कंडवाल

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