ये दाग अच्छे हैं..! : सीमा प्रियदर्शिनी सहाय : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi : ” हेलो…हैलो डॉ सिन्हा इट्स टू इमरजेंसी… आप आप जल्दी से आ जाइए…!आपकी पेशेंट सीरीयस हो गई है!” डॉ रिद्धि ने घबराते हुए अपने सीनियर डॉक्टर संजना सिन्हा को फोन करते हुए कहा।

डॉक्टर संजना सिन्हा  शहर की जानीमानी  गायनोकॉलिजिस्ट थी।

 उसके क्लिनिक  में एक सीरियस पेशंट आई थी। पेशेंट का नाम गीता था।

 गीता प्रेगनेंट थी लेकिन उसे बहुत ही ज्यादा कॉंप्लिकेशन था, जिसके कारण बच्चे और मां दोनों की जिंदगी को खतरा हो गया था।

 डॉ संजना ने बड़ी मेहनत ,जिंदादिली  और अपने अनुभव से उसे हर खतरे से बचाती आ रही थी।

 उसके प्रसव का समय नजदीक आ रहा था।

एक दिन संजना को ड्यूटी में किसी सरकारी अस्पताल में जाना पड़ा।

उसने अपने असिस्टेंट डॉक्टर रिद्धि को बोलकर चली गई थी।

“सुबह तक तो ठीक थी ,अचानक क्या हो गया?”  संजना हड़बडाते हुए फोन पर बात करते हुए ही बाहर निकल गई।

उसने कहा” रिद्धि, पेशंट पर नजर रखना। मेरी मेहनत बेकार नहीं होनी चाहिए! मैं बस पहुंच ही रही हूं।”

वह  हड़बढ़ाते हुए गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर बैठ गई। बदकिस्मती से आज उसका ड्राइवर भी नहीं था। उसे खुद ही ड्राइव करके शांतिनिकेतन,अपने क्लिनिक जाना था।

 संजना गाड़ी चलाने लगी। वैसे तो गाड़ी चलाना उसका काफी पुराना शौक था लेकिन पिछले कई सालों से वह ड्राइवर के भरोसे ही रहा करती थी।

आज ड्राइवर छुट्टी पर था।उसे गाड़ी चला कर ही अपने क्लीनिक पहुंचना था।

 जैसे संजना ने गाड़ी को बैक कर गाड़ी को सीधा कर  मेन रोड पर लेकर आई, उसके पीछे खड़ी गाड़ी में उसकी गाड़ी से हल्की सी टच  हो गई।

वह गाड़ी से उतर कर पीछे वाले खड़े गाड़ी के पास पहुंची।

 उसने देखा उसकी गाड़ी से हल्का डेंट उसकी गाड़ी में लग गया है।

उसने उस आदमी से जाकर माफी मांगते हुए कहा “आपकी गाड़ी को थोड़ा सा स्क्रैच लगा दिया जो भी आपका खर्चा आएगा , मैं आपको पेमेंट कर दूंगी।

 आप मुझे अपना नंबर दे दीजिए !”

वह गाड़ी वाला सनकी था। उसने चिल्लाते हुए उसे गाली गलौज करने लगा।

संजना ने उसे हजार बार समझाने की कोशिश की 

” मैं चोर नहीं हूं। मैं भाग नहीं रही हूं। मैं आपकी गाड़ी में जितना भी खर्चा लगेगा मैं उसका खामियाजा भरने के लिए तैयार हूं ,प्लीज आप मुझे जाने दीजिए!”

 लेकिन वह व्यक्ति वहां लोगों का हुजूम तैयार कर लिया और उन लोगों ने डॉक्टर सिन्हा के ऊपर मारपीट भी शुरू कर दी ।

संजना  बहुत टेंशन में थी। उसने हाथ जोड़ा और कहा

” प्लीज मेरा पेशेंट बहुत खतरे में है !मुझे जाने दीजिए, मैं आपके सारे पाई पाई चुका दूंगी।”

 लेकिन वह आदमी और उसके साथ खड़े हुए लोग यह सुनने के लिए तैयार नहीं थे।

 संजना को मारपीट करते हुए उन लोगों ने उसे जख्मी कर दिया।

 किसी तरह से खड़े कुछ लोगों ने पुलिस को फोन कर दिया। पुलिस के आने के बाद वे लोग वहां से भाग गए।

संजना को भी मेडिकल की जरूरत  थी।उसने पुलिस अधिकारी से कहा

” मेरी चिंता छोड़ दीजिए। मेरे कैरियर में आज तक किसी ने कोई दाग नहीं लगाया। आज एक दाग मेरी आत्मा में लग जाएगा यदि मैं सही समय पर नहीं पहुंची तो!

 यदि हो सके तो आप लोग मुझे मेरी क्लीनिक तक पहुंचा दीजिए।”

 सजना के हाथ,माथे, चेहरे से खून बह रहा था फिर भी उसने कोई उपचार नहीं लिया।

 वह तुरंत पुलिस की मदद से अपनी क्लीनिक पहुंची।

 पेशेंट के काफी सीरियस हो चुकी थी।

 संजना को जख्मी हालत में देखकर सभी लोग घबरा गए।

वह फर्स्ट एड लेकर डिलीवरी रूम में घुस गई। बड़ी बारीकी से उसने गीता की सारी रिपोर्ट पर ध्यान देने के बाद दोनों बच्चों को जन्म कराया।

गीता शरीर से कमजोर थी।  तमाम कॉंप्लिकेशन के बावजूद इसके दोनों बच्चे सकुशल पैदा हो गए।

संजना बहुत खुश थी। डॉक्टर  रिद्धि ने संजना के चेहरे के जख्म साफ करते हुए कहा

” मैम, यह दाग तो आपके चेहरे पर रह ही जाएगा।”

 डॉक्टर संजना मुस्कुराते हुए बोली

” कोई बात नहीं रिद्धि, अगर दाग चेहरे पर लग गया तो कोई हर्ज नहीं… मेरी आत्मा भी नहीं लगना चाहिए था!

 वैसे भी हम अपने अंदर के इंसानियत को खोते जा रहे हैं तो कुछ दाग तो हमारे ऊपर जिंदगी भर ही रहेंगे। हम उनसे कैसे बरी हो सकते हैं?”

 पुलिस ने उन बदमाशों के खिलाफ रिपोर्ट लिखा और तहकीकात शुरू कर दी थी।

उन्होंने  संजना को आश्वासन दिया  

“हम  दिनों के भीतर इन अपराधियों को पकड़कर सजा दिलाएंगे।”

 संजना उन्हें धन्यवाद देकर अपने काम में लग गई।

#दाग

प्रेषिका–सीमा प्रियदर्शिनी सहाय

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