एक बार फिर (भाग 44 ) – रचना कंडवाल : Moral stories in hindi

राजशेखर वेड्स प्रिया हल्दी स्पेशल

अगले दिन सुबह सब हल्दी की रस्म की तैयारियां कर रहे थे।

दी दोनों बच्चों को तैयार करके प्रिया के पास आ गई।

प्रिया को देख कर उनको गुस्सा आ गया।

प्रिया तुम अभी तक तैयार नहीं हु‌ई हल्दी मेरी है या तुम्हारी????

आपको देख कर तो लग रहा है कि आपकी है,वो मुस्कुराई।

पीले रंग की साड़ी दी के स्किन को कांप्लीमेंट कर रही थी। उनकी गोल नथ एक दम शाही लुक दे रही थी। गोल्ड से लदी हुई दी एकदम अलग लग रही थीं बिल्कुल राजरानी जैसी।

दी आप तो एक दम रानी लग रही हैं।

मैं तो जो भी लगूं लग्न तो तुम्हारा है और खूबसूरत तुम्हें लगना है।

आपके आगे मुझे कौन देखेगा???

अच्छा! तो वो तुम्हारा दीवाना जो बेसब्री से तुम्हारा इंतजार कर रहा है उसका क्या ???दी ने हंस कर उसके गालों को छुआ।

आज तो मैं तुम्हें भर भर कर हल्दी लगाऊंगी।

वो कौन सा गाना है “हल्दी लगाओ रे तेल चढ़ाओ रे बन्नी का गोरा बदन दमकाओ रे” दी गुनगुनाते हुए बोलीं।

घर से तुम्हारे लिए एक खास उबटन तैयार करके लाई हूं देखना उसे लगा कर खिल उठोगी।

प्रिया की आंखें छलक पड़ीं वो उनके गले लग कर जोर से रोने‌ लगी दी का गला भर आया।

दी मां बहुत याद आ रही है। मुझे भी…… दोनों बहनें गले लग कर रोती रही।

दी ने उसकी पीठ थपथपाई बस अब नहीं बहुत हो गया ज्यादा रोओगी तो शक्ल बिगड़ जाएगी।

मैं पंडित जी को देखती हूं।

शायद आ ग‌ए हैं पूजा की तैयारी करनी है।

दी कविता कहां है????

मैडम को यहां होना चाहिए पर वो तो नदारद है प्रिया ने नाराजगी जताई।

शेखर की इकलौती भाभी है तो वो वहां पर तैयारियां कर रही होगी।

मैं मांजी को लेकर आती हूं।

दी अपनी सासू मां को लेने चली गई।

प्रिया ने कविता को फोन लगाया रिंग जा रही थी पर उसने उठाया नहीं।

प्रिया को बेचैनी और घबराहट हो रही थी महसूस हो रहा था ऐसे में फ्रैंड्स, बहनों, रिश्तेदारों का होना कितना जरूरी होता है कविता उसकी इकलौती सखी है वो भी इत्तेफाक से शेखर की भाभी है। और सारे रिश्तों के नाम पर दी और जीजा जी की फैमली है।

नर्वसनेस के कारण उसने बेड पर बैठ कर अपने पैर हिलाने शुरू कर दिए।

तभी दी की बेटी चीनू और दी की सासू मां आ ग‌ए।

चीनू मासी को बड़े ध्यान से देख रही थी।

मासी! आप तो बिल्कुल बार्बी लग रही हो वह चहक उठी।

सच में मेरी बेटी बहुत सुंदर लग रही है दी की सासू मां ने

उसकी नजर उतार कर उसके माथे को चूमा और उसे गले लगा लिया।

मां आप मुझे छोड़कर कहीं मत जाना वो उनके गले से लिपट कर इमोशनल हो गई।

नहीं जाऊंगी, बल्कि तुम मुझे अपने ससुराल भी ले जाना।

आप मजाक कर रही हैं उसने उन्हें देख कर नजरें झुका ली।

मासी मेरी अच्छी सी‌ हेयर स्टाइल बना दो मम्मी ने कितना गंदा बनाया है।

प्रिया  चीनू का हेयर स्टाइल बनाने लगी।

प्रिया तुमने कुछ खाया???

मां! अब तो पूजा के बाद ही‌ खाऊंगी, ये फ्रूट्स खा लो उन्होंने प्लेट उसे पकड़ा दी।

तभी दी तेजी से आ गईं चलो बाहर चलते हैं शेखर के यहां से हल्दी आ रही है।

सब बाहर चल दिए।

पंडित जी पूरी तैयारी कर चुके थे उन्होंने सबको समझाया कि कैसे कैसे करना है??

कविता और उसके पतिदेव हल्दी लेकर आए थे, उन्होंने हल्दी दी को दी।

कविता उसके पास आ गई, मेहंदी दिखाओ प्रिया ने हाथ‌ उसके आगे कर दिए।

इसलिए ही शेखर के दिलो-दिमाग पर तुम्हारा कब्जा है मेरी जान ।

जनाब बेसब्री से तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं उसने उसके कान में कहा।

वो जाने को मुड़ी तो प्रिया ने उसे टोका, मुझसे तो तुम्हारा कोई मतलब नहीं है।

माना कि वो तुम्हारे देवर हैं तो मैं भी तो‌ कुछ हूं तुम तो बस चल दी।

हां भ‌ई तुम्हें हल्दी लगा कर ही जाऊंगी, वैसे तुम्हें कोई चिट्ठी या संदेशा तो नहीं देना है तुम्हारे उनको।

भाड़ में जाओ प्रिया ने धीरे से कहा।

ठीक है मैं शेखर को कह दूंगी वो हंसी, तो प्रिया घबरा गई पागल हो तुम

तुम्हें तो मैं देख लूंगी।

पंडित जी ने दुल्हन को चौकी पर बैठने का इशारा किया।

प्रिया बैठ गई।

पंडित जी ने कहा पांच पांच तेल बान होंगे।

पहले कन्या लगाएगी।

सबसे पहले चीनू ने मासी को हल्दी लगाई।

फिर दी आई उन्होंने उसके ऊपर चांदी का सिक्का वार कर कलश में डाला फिर बान दिए।

कविता, दी की सासू मां, सब महिलाओं ने एक एक कर प्रिया को हल्दी लगाई।

ये रस्म चल ही रही थी अचानक से कविता ने हल्दी उठाई और प्रिया के जीजा जी को रंग दिया।

जीजा जी बेचारे देखते रह गए।

ये हल्दी है कविता कोई होली नहीं जीजा जी ने हंसते हुए उसकी तरफ देखा।

जीजा जी होली तो हर साल होती है पर ये हल्दी की रस्म है जो लाइफ में एक बार होती है।

उसने और हल्दी उठाई और नया शिकार ढूंढने लगी।

तभी दी ने आकर उसे रंग दिया और जोर से हंसीं मैंने अपने पतिदेव का बदला ले लिया।

कविता उनके पीछे चल दी छोडूंगी नहीं मैं आपको

तभी कविता के पतिदेव पीछे से आए और उन्होंने दी को हल्दी लगा दी।

आपको लगनी तो जरूरी है चारों तरफ हंसी गूंज रही थी सब लोग पीले पीले नजर आ रहे थे।

सच में हमारी परंपराओं और रस्मों का अपना एक अलग ही मजा है हर चीज का अलग ही महत्व है।

निभा और कविता तुम लोगों का हो गया है तो दुल्हन को हल्दी का उबटन ढंग से मलो दी की सासू मां ने कहा।

तभी कविता ने आगे बढ़ कर प्यार से दी की सासू मां को हल्दी लगाई।

बेटी की शादी की हल्दी तो आपको भी लगाना बनता है।

फिर दी और कविता प्रिया को उबटन लगाने लगे।

नहा धोकर जब प्रिया आ गई उसको चुनरी ओढ़ा कर पूजा करवाई गई।

हल्दी बहुत अच्छे से हो गई थी।

ये सब बहुत थका देने वाला था। थोड़ा बहुत खा कर सब शाम के बारे में बात कर रहे थे।

प्रिया तुम आराम करो फिर तुम्हें तैयार करने वाले आ जाएंगे।

मैं और तुम्हारे जीजाजी बाहर का काम देखते हैं।

प्रिया ने आंखें मूंद ली तभी उसका फोन बज उठा।

क्रमशः

एक बार फिर भाग 43

एक बार फिर (भाग 43 ) – रचना कंडवाल : Moral stories in hindi

रचना कंडवाल

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