दामन पर लगे दाग – अमित रत्ता : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi : गांव वालों ने पूरे परिवार के मुहं पर कालिख पोतकर पूरे गांव में घुमाया था उस कालिख का रंग तो उतर गया मगर जो दाग जिंदगी भर के लिए उनके दामन पर लग गया था जिसको मिटा पाना असंभव था।

कुछ दिन पहले की बात है घर का जरूरी सामान लेने के लिए मेरा बाजार जाना हुआ। खरीददारी करके में बस स्टैंड के पास बस लेने के लिए खड़ा था तो अचानक मेरी नजर एक लड़की पर पड़ी जिसका मुहं दुप्पटे से ढका हुआ था।

आंखे जमीन में गढ़ी थी पता नही क्यों बदन बेजान थका हुआ था। उसके हाथ में दो थैले थे जिसमें कुछ सब्जियां और दाल मसाले बगैरह रहे होंगे। मैंने देखा आसपास के सभी लोग उसकी तरफ देखकर फुसफुसा रहे थे।

कोई उसको ताने कस रहा था कोई हंस रहा था।मगर बो लाचार न कुछ बोलती थी न रियेक्ट करती थी बस चुपचाप खड़ी थी। लोगो के तंज अब हद से ज्यादा होने लगे थे और मैं परेशान था कि आखिर बो चुप क्यों है कुछ बोलती क्यों नही इनको जवाव क्यों नही दे रही।

अब मेरी सब्र का बांध टूट रहा था ये जानने के लिए की आखिर ये क्या हो रहा है क्यों सब लोग उसे ऐसी नजरों से देख रहे हैं। तब मैं साथ कि दुकान पर गया और दुकानदार को पूछा कि भाई मामला क्या है?

तब उसने बताया कि ये बेचारी तो किस्मत की मारी है गलती इसकी नही है कोई बल्कि इसका बलात्कारी बलात्कारी है।

पिछले साल की बात है इनके मोहल्ले में शादी थी शादी समारोह में इनके जान पहचान की एक लड़की आई थी जिसके बारे में लोग कहते हैं कि इसके भाई की लड़की के साथ दोस्ती थी या यूं कह लो दोनों एक दूसरे से प्यार करते थे।

घरवाले शादी में गए थे इसके भाई ने फोन करके लड़की को घर चाय पी बुला लिया। उस बक्त उसने शराब पी रखी थी और जैसे ही लड़की आई उसने दरवाजा बंद करके उसके साथ गलत हरकत कर दी।

बाहर निकलकर लड़की ने शोर मचाया लोग इकट्ठा हुए और पुलिस भी आ गई पुलिस उसे पकड़कर ले गई मेडिकल में रेप की पुष्टि भी हो गई अभी केस चल रहा है बो लड़का अब जेल में है।

अनजाने में कहो या नशे में उसने ऐसा दाग अपने परिवार पर लगा दिया जो जीते जी कभी मिट नही सकता है। गांव वालों ने सबके मुहं पर कालिख पोत दी थी बो कालिख तो धोकर सै हो गई मगर बो दाग जिंदगी भर का था जिस मिटाना असंभव था।

उस दिन से ये परिवार गांव से बेदखल कर दिया गया है कोई न इन्हें गांव के किसी समारोह में बुलाता है न इनके जाता है। अब इनको लोग बलात्कारी के परिवार से ही बुलाते हैं यही इनकी पहचान है।

इसका बाप जिस दिन से बेटा जेल गया है चारपाई पर पड़ा है न चल पाता है न उठा पाता है । बाप की अपनी हलवाई की दुकान थी यहां अच्छा ब्यापार था एक समय मे पूरा शहर उसे लालाजी के नाम से जानता था हर कोई उनकी इज्जत करता था ।

ये बेटी कॉलेज जाती थी पढ़ने में बहुत होशियार थी मगर बेटे की बजह से जो दाग पूरे परिवार पर लगा उसकी बजह से पूरा परिबार किसी को मुहं दिखाने लायक नही रहा। एक छोटी बहन भी थी इसकी जो दसवीं में पढ़ती थी

उसको स्कूल आते जाते लड़के इतना परेशान करते कभी उसका सरेआम हाथ पकड़ लेते कभी उल्टी सीधी हरकतें कर देते मानो उनको लाइसेंस ही मिल गया था उसको जलील करने का। इन सब हरकतों से तंग आकर एक फिन उसने जहर खाकर ऊनी जान दे दी।

इसकी मां ने उस दिन से घर से निकलना छोड़ दिया है बेचारी हर किसी से मुहं छुपाती है कभी गांव की प्रधान थी बहुत ही ईमानदार औरत गरीबो की मदद करने वाली हर एक कि समस्याओं का निपटारा करने में सक्षम थी।

बहुत ही संपन्न परिवार था बड़े बड़े नेताओं का अक्सर उनके घर आना जाना लगा रहता था। प्रधान जी की खासियत थी कि चाहे कोई गरीब आए आए या अमीर बिना चाय पानी किसी को जाने नही देती थी।

लेकिन अब उनके घर के हालात तरस योग्य हैं अभी तो कुछ पुरानी जमा पूंजी है लालाजी की जिससे घर का खर्च चल रहा है मगर बाद में कौन इनका हाल पूछेगा कौन इनका खर्च चलाएगा कौन इस लड़की से शादी करेगा भगवान जाने।

ये सब सुनकर मैं स्तबध था और सोचने लगा कि आखिर उस लड़के ने किसका बलात्कार किया ? अपनी बहन का जो हर किसी से मुहं छुपाती थी ?

अपनी मां का जो घर से बाहर ही नही निकल पाती थी? या अपने बाप की उम्मीदों का सपनो का ? आखिर उसने रेप तो किया किसी की बेटी का मगर इज्जत इज्जत तो अपने पूरे परिवार की लूटी थी।

उसके कुकर्मो की सज़ा आज पूरा परिवार भुगत रहा था। पूरे परिवार का रोज मानसिक बलात्कार हो रहा था मगर उनके दर्द से न किसी को कोई फर्क पड़ता था न सहानुभुति थी। 

                               अमित रत्ता

#दाग

                अम्ब ऊना हिमाचल प्रदेश

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