भाई की शादी के लिए मोटी पार्टी फसाई है – मंजू तिवारी

   अरे कोई तो बचाओ,,,, यह आदमी मुझे बिल्कुल मारे डाल रहा है,,, पीटती पीटती प्रतीक्षा लहूलुहान हो चुकी थी,,, कमरे से मारता हुआ पति उसे दरवाजे के बाहर पटक के झाड़ू से मार रहा था झाड़ू और डंडे टूटते जा रहे थे प्रतीक्षा गांव में सभी से कहती इसने मेरा फोन तोड़ दिया है कोई मुझे फोन दे दो तो अपने पापा बात करूं वह मुझे यहां से ले जाये ,,,लेकिन यह सब तमाशा देखने वाले थे किसी ने भी प्रतीक्षा को फोन नहीं दिया उसका पति शराब के नशे में उसे जानवरों की तरह कूट रहा था 

उसके पेट पर पसलियों पर पीठ पर मोटे मोटे नीले चोट के निशान आ चुके थे पिटते पिटते बेहोशी आ चुकी थी प्रतीक्षा की दादी सास बड़ी अच्छी नेक दिल उसके पति को रोकती,, लेकिन रोक पाने में असमर्थ,,, उनके छोटा बेटा यानी प्रतीक्षा के चाचा ससुर वह भी घर पर नहीं थे जो थोड़ा बहुत सहयोग कर देते थे जब वह घर आते हैं तब प्रीतीक्षा को फोन मिलता है अपने पापा को  फोन करती है। आप मुझे यहां से ले जाओ मुझे बहुत मारा है। प्रतीक्षा के पापा उसे लेने जाते हैं दादी सास उसके पिता से कहती है बेटा आप अपनी बेटी को अपने पास ही रखना हम इसकी सुरक्षा नहीं कर पा रहे पिता अपने प्राणों से प्यारी बेटी को अपनी छाती से चिपका कर घर ले आते मां का फोन प्रतीक्षा की बड़ी बहन के पास जाता है

 आज प्रतीक्षा को उसके पति ने बहुत मारा है जैसे ही प्रतीक्षा घर आती है उसकी मां उसकी छाती पीठ पसलियों चेहरे पर पर नीले निशान देखकर चीख निकल जाती है अपनी बड़ी बेटी को भी दिखाती हैं। जब व्हाट्सएप पर बड़ी बेटी अपनी छोटी बहन के मार के निसानों को देखकर व्याकुल हो जाती है और उसे उस व्यक्ति और उसके परिवार से बहुत नफरत हो जाती है। और अपनी मां और बहन से कहती तुम्हारी बस यही नौटंकी रहती है किसी दिन वह आदमी, परिवार वाले इस को मार डालेंगे यह पारिवारिक झगड़ा बिल्कुल भी नहीं है यह दारू और जेठ जेठानी के लालच का परिणाम है जब भी समझौता होता बड़ी बहन को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता क्योंकि वह अच्छी तरह से समझ चुकी थी 

सुधार की कहीं भी गुंजाइश नहीं है आज भी बड़ी बहन अपनी छोटी बहन की चोट के निशानों को नहीं भूल पाई हैं इस व्यथा को लिखते हुए घाव ताजे हो रहे है आंखों से अश्रु धारा अनवरत बह रही शायद शब्दों में वेदना को व्यक्त नहीं कर पा रही हूं उसकी बहन ने घर आकर बताया पापा जेठानी जेठ और सास खड़े हुए तमाशा देख रहे थे पीटने के लिए यही लोग उसको उकसाते थे गांव वाले भी मूकदर्शक बने हुए थे आज तो लग रहा था उसके पति पर खून सवार है प्रतीक्षा को बिल्कुल मार कर ही दम लेगा ,,इस बार प्रतीक्षा गांव में थी कोरना लॉकडाउन की वजह से उसके पति की नौकरी चली गई थी इसलिए यह तमाशा गांव वालों को देखने को मिला जब वह अपने पति के साथ बाहर रहती थी

 तब भी कई बार ऐसा हुआ लेकिन जेठ जेठानी सास गांव में किसी को हवा नहीं लगने देते थे जब पहली बार प्रतीक्षा अपने पति के साथ एटा में थी तब दारू पीकर उसके पति ने इतना मारा कि उसके बच्चे की पेट में ही ग्रोथ रुक गई क्योंकि उसने दोनों पैर खींच कर उसको  गिरा दिया था इससे उसका मरा हुआ बेटा पैदा हुआ जब इसकी शिकायत  प्रतीक्षा के पापा ने उसकी जेठ से की  प्रतीक्षा को लेने  पहुंच गए लेकिन लोक लज्जा की डर से उन्होंने उसे अपनी नानी के  घर छोड़ दिया जिससे गांव में किसी को कुछ पता ना चल पाए कि हम कर क्या रहे हैं। जब प्रतीक्षा ने फोन करके पापा से कहा तो उसके पिता को तो कुछ समझ में ही नहीं आया कि यह हो क्या रहा है वह तो यह पति पत्नी का साधारण झगड़ा समझ रहे थे प्रतीक्षा की बड़ी बहन प्रेरणा से जब बात हुई तब सब समझ में आया है 



यह कोई साधारण घर का झगड़ा नहीं है। यह तो अप्रत्यक्ष रूप  से जेठ द्वारा पैसे के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था क्योंकि प्रेरणा और प्रतीक्षा अपनी मां माता पिता की 2 बेटियां थी घर में कोई भाई नहीं था रिश्ता प्रतीक्षा की जेठानी के पिता ने करवाया था प्रतीक्षा के पिता को लड़का इसलिए पसंद आ गया क्योंकि लड़के ने एमबीए लखनऊ से कर रखी थी और बैंक में नौकरी भी करता था लड़के के हिस्से में प्रॉपर्टी भी अच्छी थी प्रतीक्षा के पिता को अपनी बेटी के की योग्यता के हिसाब से योग्य वर लगा लेकिन उसके शराब पीने की दिन-रात की लत को छुपा लिया गया जो बहुत ही बड़ा अवगुण था दूसरा जेठ जेठानी को अपने पैसे की भूख पूरी होती नजर आ रही थी

 जिसके कारण कई जिंदगियां बर्बाद हो गई पिता और बेटी के साथ बहुत बड़ा धोखा किया गया जेठ शादी से इतना खुश था उसे लग रहा था इस शादी के माध्यम से उसका सारा लालच पूरा हो जाएगा क्योंकि उसके भाई को तो उसकी ससुराल से बहुत धन मिलने वाला है जब लॉकडाउन में प्रतीक्षा गांव में रही तो कई लोगों ने उसे बताया तुम्हारे जेठ ने कई लोगों से कहा अपने छोटे भाई की शादी के लिए मैंने बड़ी मोटी पार्टी फसाई है। दो बहने हैं घर में कोई भाई नहीं है इसलिए बहुत प्रॉपर्टी हमें मिलेगी हुआ भी ऐसा ही था जब प्रतीक्षा ब्याह कर उस घर में गई थी तो उसकी जेठानी उससे कहती प्रतीक्षा हम तो सोच रहे थे तुम्हारे पापा बड़ी कार देंगे तुम्हारे पापा ने तो बहुत छोटी कार दी है। हमने तो तुम्हारी बड़ी कार की वजह से अपनी भी कार बेच दी और तुम्हारे पापा ने कैश भी नहीं दिया जिससे मिलाकर हम बड़ी कार ले लेते दीदी आप अगर बड़ी कार लेना चाहते तो ले लो मेरे पापा के पास तो बस जो था वह उन्होंने मुझे दिया लेकिन उनकी नियत प्रतीक्षा भलीभांति समझती जा रही थी ,,

 पति की जितनी भी सैलरी आती अपने शराब पीने का महीने भर का खर्चा मकान का किराया निकालकर सारे पैसे शुरू से  भाई को ही देता रहा था कि वो अपने बड़े भाई को पिता समान मानता था दोनों भाइयों को पिता बहुत छोटी सी अवस्था में ही छोड़कर स्वर्ग सिधार गए थे दोनों भाइयों की उम्र में भी विशेष अंतर नहीं था बड़ा भाई छोटे भाई से कुल 3 साल बड़ा है सारी जमीन  खुद ही करता था बड़े भाई को सिर्फ उसके पैसों से मतलब होता वह कितना पी रहा है क्या कर रहा है उससे उसका कुछ लेना देना नहीं। 

प्रतीक्षा के  पापा के दिए हुए स्त्री धन पर भी पूरी तरह से कब्जा कर लिया और प्रतीक्षा को घर में भी रहने के लिए जगह नहीं दी पूरे मकान पर खुद का कब्जा जमा रखा है प्रतीक्षा की पति की कोरोना में नौकरी चली गई तब भी उस ने खेती में जो कुछ होता था उसका जरा सा भी उसको नहीं दिया ,,पीने की आदत तो पहले ही थी अब घर खर्च कैसे पूरे हो उसमें अब बच्चे भी आ चुके थे बेटी 4 साल बेटा 1 साल का था बच्चों के अपने भी खर्च होते हैं जेठ जेठानी देने के लिए उनके हक का भी तैयार नहीं थे वह तो चाहते प्रतीक्षा यहां से चले जाएं और अपने मायके में  रहे और साथ में उसका पति भी अपनी ससुराल में ही रहे हमें उनके हिस्से का कुछ भी ना देना पड़े और अपनी ससुराल से लाकर हमारी पूर्ति करेंपति को भी मारने पीटने के लिए उकसाती थी



और वह मारपीट करता रहता था पुलिस कंप्लेंट होती पुलिस वाले 2 घंटे बाद उसको छोड़ देती किसी तरह से अप्रत्यक्ष रूप से धन जेठ जेठानी को ही चाहिए था पति को तो सिर्फ दारू की बोतल की ही जरूरत होती इसका प्रबंध को किसी तरह से कर लेते बच्चे और प्रतीक्षा भूखे मरते रहते थे बच्चों की जो प्रतीक्षा की सारी व्यवस्था उसके पापा करते रहते थे उनको तो करना ही है क्योंकि उनकी तो वह अपनी बेटी है प्रतीक्षा की सास प्रतीक्षा के पति से हमेशा कहती “सड़वा रिश्ता नहीं चलता”अर्थात प्रतीक्षा अपनी बहन से अपना रिश्ता ना चलाएं प्रतीक्षा बहुत उदास हो जाती उसका तो एक ही खून का रिश्ता है जो बहन का है उसको भी  चलाने के लिए सास पति को मना करती ,,, 

जब प्रतीक्षा ज्यादा दुखी हो जाती है दीदी ऐसे बोलते हैं तब प्रेरणा हमेशा कहती कोई बात नहीं प्रतीक्षा जब यह पीना छोड़ देंगे तब हम रिश्ते चला लेंगे रिश्ते ना भी चले तू अपने घर किसी तरह से खुश रहे मुझे तो बस यही चाहिए,, तो दोनों बहनों की बात भी बहुत ही कम हो पाती थी बहन का बहन से रिश्ता खत्म सा ही लग रहा था मारपीट करने के बाद उसके पति से समझौता हो जाता इस पर प्रेरणा को बहुत गुस्सा था क्योंकि वह ना तो प्रतीक्षा को छोड़ता ही था ना उसको प्रेम से रखता ही था वह अपनी बहनों माता-पिता से नाराज हो जाती क्योंकि प्रेरणा  अब समझ चुकी थी की प्रतीक्षा का पति उसकी कभी भी इज्जत नहीं करेगा ना उसके घर वाले इज्जत करेंगे क्योंकि बहू परिवार की इज्जत होती है और यह परिवार तो उसे बार-बार उसकी मजबूरी का फायदा उठा कर बेइज्जत कर रहे थे

 इसलिए वह बहन अपने मां बाप से बोलना छोड़ देती,, प्रेरणा अपने परिवार की बड़ी बेटी है। जो व्यावहारिक रूप से सोच रही थी उसकी बहन और पिता का भावनात्मक रूप से फायदा उठाया जा रहा था,,  जिस पिता ने आठ से 10 लाख की शादी की हो उसकी बेटी को इतनी प्रॉपर्टी होते हुए भी भूखों मरना पड़ा अगर प्रतीक्षा की जेठ को प्रॉपर्टी की इतनी ही भूख थी तो अपने शराब के लती भाई की शादी करने की भी आवश्यकता क्या थी उसकी सारी जमीन  जायदाद किसी ना किसी दिन जेठ को ही मिलने थी क्योंकि उसकी शराब की लत के चलते जिंदगी का कोई भरोसा ना था मारपीट इस कदर होती की प्रतीक्षा के 70 साल के पिता जहां-जहां प्रतीक्षा का पति नौकरी करता वहां अपनी बेटी को घायल अवस्था में लेने जाना पड़ता प्रतीक्षा का दुख देखकर प्रतीक्षा की मम्मी पापा बेटी के दुख से बूढ़े हो चुके हैं प्रतीक्षा का पति का भी सड़क दुर्घटना में देहांत हो चुका है



 जेठ में सारी प्रॉपर्टी पर कब्जा कर रखा है सास ने अपने नाम की सारी प्रॉपर्टी जेठ के नाम लिख दी है क्योंकि मरने के बाद कहीं प्रतीक्षा और उसके बच्चों को ना मिल जाए प्रतीक्षा अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ अपने पापा के घर रहती है पापा 70 साल के हो चुके हैं। जो अपनी बेटी के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं कोर्ट कचहरी कर रहे हैं,,, धोखे से शादी करने वालों के लिए सरकार ने अभी तक सजा का कोई प्रावधान नहीं बनाया है लोग धड़ल्ले से झूठ बोलकर किसी की बेटी की जिंदगी बर्बाद कर देते हैं जिसका भुगतान बेटी के पिता मां स्वयं बेटी और उसके बच्चे भुगतते हैं जाने वाला चला जाता है। उनको तो कोई फर्क नहीं पड़ता,,, प्रेरणा और प्रतीक्षा के मम्मी पापा ने कभी इस तरह से नहीं सोचा था कि हमारे बेटे नहीं है

 मेरे घर में बेटे के रूप में इस तरह का दामाद आएगा लालच की पूरी पटकथा प्रतीक्षा की जेठ जेठानी और जेठानी के पिता ने शादी से पूर्व ही रच रखी थी  जिन मां बाप ने अपनी बेटी को फूलों की तरह पाला था कांटों की पथ पर चलना पड़ रहा है वह उसके बच्चेअपने हक की कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं इसमें पैसा भी खर्च होता है आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं पति जब जीवित था तब भी वह सारी प्रॉपर्टी को अपने कब्जे में लिया था आज जब नहीं है तब भी उस प्रॉपर्टी पर कब्जा करके बैठा है। और प्रतीक्षा के पापा का दिया हुआ सोने और गहने पर भी कब्जा किए हैं।,,,,  

जो शराब का लती भाई अपने बड़े भाई के लिए सब कुछ छोड़ रखा था सब कुछ उसी देता था अपनी बीवी को प्रताड़ित करता था आज जब वह दुनिया में नहीं है तो उसी के बच्चों को बड़ा भाई फूटी आंखों नहीं देखता है और उसके हिस्से पर कब्जा जमा कर बैठा है,,,,,,, जब किसी का उद्देश्य लालच होता है  तो रिश्ते गौण हो जाते हैं पैसा प्रमुख होता है। जेठ ने सारा परिवार बर्बाद कर दिया पत्नी ने पति को खोया,, बच्चों ने बाप को खोया,, इसका दोषी केबल जेठ और जेठानी जिन्होंने लालच के वशीभूत होकर एक बाप को धोखा देकर बेटी की जिंदगी बर्बाद की,,, प्रतीक्षा अब न्याय की प्रतीक्षा में,, भगवान की अदालत में भी न्याय की प्रतीक्षा,, इंसान की अदालत में भी न्याय की प्रतीक्षा,,,,,,, 

समाज ऐसे लोगों का बहिष्कार क्यों नहीं करता,,,,?प्रेरणा को भी अपनी बहन और माता पिता के साथ हुए धोखा करने वालों की सजा का इंतजार,, जब बेटी और बेटी के पिता के साथ इस तरह की घटनाएं होंगी तो भला बेटी पैदा कोई क्यों करेगा,,, अगर इस तरह की जगन्ना घटनाएं समाज में अगर होती हैं तो भगवान किसी को भी बेटी का पिता ना बनाएं प्रभु से प्रार्थना है अगर बेटियों के साथ ऐसा होता है तो पृथ्वी पर बेटियों का अवतरण ही बंद हो जाए,,,, क्योंकि अब झेलने का समर्थन नहीं है। सजल आंखों से प्रभु मेरी प्रार्थना स्वीकार करें,,,,  कुछ दिनो पूर्व की सत्य घटना,,

#धोखा

मंजू तिवारी, गुड़गांव

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