एक बार फिर (भाग 21) – रचना कंडवाल : Moral stories in hindi

शेखर के घर में प्रिया और शेखर दोनों के लिए पूजा रखी जाती है। पूजा के बाद प्रिया शेखर को अपने अतीत के बारे में बताती है। शेखर को डीजीपी का फोन आता है कि हमलावर पकड़ा गया। आपको आना होगा। शेखर चला जाता है। शेखर के जाने के बाद प्रिया बहुत परेशान
हो जाती है उसे घबराहट होने लगती है कि कहीं उसने गलत तो नहीं कर दिया
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शेखर ने मुझसे बात नहीं की वो तुरंत चला गया।
दी को अगर पता चला तो वो भी बहुत नाराज होंगी। मैंने सब कुछ खत्म कर दिया।
उसे एंग्जाइटी होने लगी आंखों से आंसू बहने लगे।
मैं ऐसे कमजोर नहीं पड़ सकती मुझे सामना करना ही होगा।
उसने कपड़े चेंज किए हाथ मुंह धोया। बालों को गूंथ कर चोटी बनाई और खुद को मिरर में देखा।‌
आंखें सूज गई थी चेहरा लाल हो गया था। अभी डाक्टर भी आ रहे होंगे। वो चुपचाप आंखें बंद करके लेट गई।
यही कोई आधे घंटे बाद डोर पर नॉक हुआ। उसने खोला तो मम्मी और डाक्टर थे।
‌दोनों अंदर आ ग‌ए। डाक्टर प्रिया की ड्रेसिंग करने लगे। अब आपको ज्यादा दर्द तो नहीं है।
नहीं पहले से आराम है।
मम्मी उसका घाव देखने लगी।
अब काफी ठीक हो चुका है डाक्टर ने कहा। शायद दो ड्रेसिंग के बाद जरूरत नहीं पड़ेगी।
मम्मी ध्यान से उसके चेहरे को देख रही थीं।
डाक्टर चले ग‌ए।
वो आकर प्रिया के पास बैठ गईं।
क्या हुआ बेटा?? कुछ नहीं मम्मी वो फीकी हंसी हंस दी।
यूं ही आज मां की याद आ रही है। उसकी आंखें नम हो गई।
ये दूसरी मां है तुम्हारे सामने उन्होंने प्यार से उसका गाल थपथपाया।
बेटा तुम्हारी मां की जगह तो नहीं ले सकती पर सासू मां तो हूं ही।
जी मम्मी उसने सिर झुका कर जवाब दिया।
निभा को बुला लूं तुम्हारा मन हल्का हो जाएगा।
दी शायद बिजी होंगी ।
तो फोन कर लो दोनों बहनें बात करोगी तो मन हल्का हो जाएगा।‌
ऐसा कह कर वो चली गईं। उसने फोन उठा लिया
उसे दी के ऊपर गुस्सा आ रहा था। जब से वो यहां आई थी उन्होंने से एक फोन भी नहीं किया था।
उसने फोन वापस रख दिया। उसका मन बहुत उदास था। उसे लग रहा था कि उसने सब कुछ खो दिया है।
शाम हो गई थी शेखर नहीं लौटा।
वो सोच रही थी दी ठीक थीं। पुरुष कभी भी स्त्री की गलती को नजरंदाज नहीं कर सकते। बल्कि सौ गुना ज्यादा रियेक्ट करते हैं।
शायद आने के बाद वो मेरी तरफ देखना ‌भी पसंद नहीं करेगा।
क‌ई बार उसकी आंखें नम हुई फिर भी वो दिल को तसल्ली देती रही।
तभी उसके रूम में आहट हुई उसने पलट कर देखा तो दी और उसकी सासू मां खड़ी थीं।
प्रिया! देखो तुम्हारे लिए सरप्राइज
मैंने निभा को बुला लिया है। अब तुम दोनों बातें करो तुम्हारे लिए चाय यहीं भिजवाती हूं।
अब उदास मत होना वो मुस्कराते हुए चली गईं।
दी ने उसे गले लगा लगा लिया। कैसी हो???
आपकी बला से पलट कर पूछा आपने कि मैं कैसी हूं??? उसका स्वर तल्ख हो उठा। उसकी आंखों में फिर आंसू आ गए।
पगली! मैंने तुझे जानबूझ कर फोन नहीं किया। मैंने सोचा शेखर साथ है तो फिर मेरी क्या जरूरत है??? वो हंसते हुए बोलीं।
दी क्या मैं आपके लिए बोझ हूं??? जिसे फेंक कर अपने मुक्ति पा ली???
अरे! ये सब छोड़ो बताओ कैसा लग रहा है ससुराल??
आप देख तो रही हैं??? हां देख रही हूं मेरी छोटी बहन बहुत लकी है जो जल्द ही इस महल में रानी बन कर राज करेगी।
मुझे भूल तो नहीं जाओगी???
पर प्रिया तो जैसे अलग ही दुनिया में गुम थी। दी को बताना ही होगा कि मैंने क्या कर दिया है??
क्या सोच रही हो???
दी मैंने शेखर को सब कुछ बता दिया है??? दी चौंक पड़ीं क्या बता दिया??? अभय के बारे में??? व्हाट??
वो चिल्ला पड़ीं।
दिमाग खराब हो गया है तुम्हारा कब किया ये सब??
आज ही बताया उसने गर्दन नीची कर‌ ली।
अब तुम खुद के लिए कांटे बो कर खुश हो??? हजार बार मना किया था तुम्हें
दी चुपचाप बैठ गई ।
दी प्लीज माफ कर दीजिए।
जी तो चाह रहा है तुम्हें दो थप्पड़ लगाऊं। उन्होंने गुस्से से कहा।
दी मैं इस गिल्ट में नहीं जी सकती थी कि मैं उसे धोखा दे रही हूं।
फिर क्या कहा उसने???
कुछ नहीं
अब‌ मैं क्या कहूं??? उनके स्वर में मायूसी थी।
घर चलोगी?? या फिर जब वो जाने को कहेगा तब आओगी ???
दी मैं उससे मिले बगैर नहीं आ सकती। कहते हुए उसका दिल बैठ गया।
चलो मैं चलती हूं।
वो नीचे उतर कर आ गई। नीचे ड्राइंग रूम में शेखर की मां और दादी बैठी हुई थीं।
दादी के पैर छू कर उनके पास बैठ ग‌ईं।
आज सुबह से प्रिया बहुत उदास है। कह रही थी मां की बहुत याद आ रही है इसलिए मैंने तुम्हें बुला लिया।
जी मैं तो खुद आने वाली थी।
शायद शादी के दिन नजदीक आ रहे हैं तो नर्वसनेस बढ़ ही जाती है।
फिर वो बेचारी तो पहले ही यहां आ गई है। शेखर की मम्मी बोलीं।
हमलावर पकड़ा गया है। शेखर को बुलाया था इसलिए वह
गया हुआ है।
शाम हो चुकी है पर अभी तक नहीं लौटा।
लगता है वहां से सीधे ऑफिस निकल गया होगा।
यही कोई पंद्रह मिनट बैठने के बाद निभा वहां से निकल गई।
डिनर के वक्त शेखर घर लौट आया।
टेबल पर प्रिया खामोशी से बैठी हुई थी। उसकी हिम्मत नहीं हुई कि वो शेखर को नजर उठा कर देख सके।
डिनर के बाद सब बैठ ग‌ए।
मीडिया में जो खबरें शुरू हो गई हैं वो तो सब देख रहे हैं??
पुलिस हेडक्वार्टर के बाहर बहुत भीड़ थी बड़ी मुश्किल से मीडिया को हैंडल किया।
बहुत थक गया हूं।
वो एक कान्ट्रैक्ट किलर है। पर अभी इस फील्ड में नया है।
पच्चीस लाख में डील हुई थी। निशाना मैं ही था।
पुलिस ने उगलवा लिया है।
एक कॉल के जरिए सौदा हुआ था। उसे खुद नहीं पता है कि जिसने हमला करवाया वो कौन है???? जिसने ये सब करवाया।
उसे पहली इंस्टालमेंट में पंद्रह लाख रुपए दिए गए थे। वो भी कहीं पर रखे गए थे।
पुलिस ने नंबर की जांच की तो फर्जी आईडी पर लिया गया था।
पर वो छानबीन कर रहे हैं मास्टरमाइंड का पता जल्द ही चल जाएगा।
मैंने कुछ लोगों के नाम दिए हैं जल्द ही उनसे पूछताछ होगी।
प्रिया का दिल जोर से धड़क रहा था।
गुड नाईट अब मैं जल्दी सोऊंगा।
कह कर वो अपने रूम में चला गया।
प्रिया बेटा आ जाओ थोड़ी देर बैठेंगे दादी ने कहा
जी दादी वो दादी के साथ चली गई।
दादी के साथ बैठ कर उनसे बातें करती रही। परन्तु मन तो जैसे दूसरी जगह पर था। उसे शेखर से बात करनी थी।
दादी ने लगभग आधे घंटे बाद उसे कहा कि जाओ प्रिया अब तुम भी आराम करो।
वो ऊपर आ गई।
उसने देखा शेखर के रूम का दरवाजा बंद था।
वो अपने कमरे में आई और बैड पर बैठ गई। उसके अंदर डर था रिश्ता टूटने की बेचेनी थी।
वो फिर से इमोशनल हो गई। यही था तुम्हारा प्यार शेखर वो अपनापन कहां गया।
क्या आज विश्वास खत्म हो गया??? ऐसा क्यों होता है??? कि हर युग में अग्निपरीक्षा सिर्फ स्त्री ही देती‌ है।
अगर तुम्हारे दिल में सब कुछ खत्म हो गया है तो एक बार बात तो करते।
तुम्हारी कसम मैं खामोशी से तुम्हारी जिंदगी से चली जाऊंगी।
आज तुम्हारे रूम का दरवाजा मेरे मुंह पर बंद नहीं था।
शायद तुम्हारे दिल का दरवाजा भी मेरे लिए बंद हो चुका है।
कल मुझे यहां से जाना ही होगा।
तुम्हारी शैतानियां, तुम्हारा ‌बेसब्र होना सब कुछ सिर आंखों पर पर तुम्हारी आंखों में अपने लिए शक नहीं बर्दाश्त कर पाऊंगी।
उसने अपने आंसू पोंछे। कपड़े चेंज किए और सोने की कोशिश करने लगी।
पर कमबख्त नींद आज पता नहीं कहां खो गई थी।
सुबह जब उठी तो सिर भारी था। आज उठने में देर हो गई थी।
रतन उसके लिए गर्म पानी और चाय लेकर आया।
शेखर सर कहां हैं?? उसने पूछा
जी वो नीचे जिम में वर्कआउट कर रहे हैं।
ठीक है।
उसने चाय पी उसके बाद चहलकदमी करने लगी।
कोई बात नहीं उसकी जो भी मर्जी हो परन्तु मुझे जानना है कि उसके दिल में क्या है???
मैं उससे एक आखिरी बार बात……
वो नहाने चली गई।
नहा कर उसने लाइट पिंक कलर का सूट पहना। और बालों को पिन लगा कर खुला छोड़ दिया
अपने सारे सामान को बैग में लगाया। और उसे अलमारी में रख दिया।
अब तो शायद वो भी तैयार हो चुका होगा।
सीधे बेक्रफास्ट करने नीचे जाएगा। मैं उससे पहले जाकर उससे बात करती हूं।
उसने डोर पर नॉक किया तो कोई रिस्पांस नहीं मिला। उसने धीरे से खोला तो बेड पर उसके कपड़े पड़े हुए थे।
लगता है, नहा रहा है। बाद में बात करती हूं। वो सोच ही रही थी कि बाथरूम का दरवाजा खुला वो बाथरोब पहने बाहर आया।
उसने टावल उठा लिया, गीले बाल उसके माथे पर बिखरे हुए थे। एक पल के लिए वो उसे देखती रह गई। फिर अचानक से उसका ध्यान टूटा उसने नजरें झुका लीं।
तुम???? उसने उसकी ओर देखते हुए कहा।
जी मैं बाद में आती हूं। उसने घबराहट में बाहर जाने को कदम बढ़ाया।
रूको???
आप पहले तैयार हो जाएं मुझे कुछ बात करनी है।
मैं तो तैयार हो ही रहा हूं तुम्हें क्या बात करनी है???
बोलो मैं सुन रहा हूं।
मैं….. मैं…. आप मेरे सामने कपड़े पहनेंगे???
तो क्या ना पहनूं???
कैसी बातें कर रहा है?? ठंड में भी उसके माथे पर पसीना छलक आया।
मुझे भी तुमसे कुछ काम है????
मुझसे???
हां उसने उसकी तरफ देखते हुए कहा

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