उलझन-एक पहलू ये भी (भाग -4) : Moral Stories in Hindi

राजीव के मम्मी पापा और दादी उसके घर घुसु बने रहने से परेशान और नाराज रहने लगे थे पर शिल्पी ने राजीव का हमेशा साथ दिया। शिल्पी भी राजीव के लिए नौकरी की तलाश में थी। राजीव के चाचा और शिल्पी के पति किशन काफी दिनो से दोनो की जुगलबंदी देख रहे थे। वो खुश थे कि शिल्पी घर में रच बस गयी है।
जब नौकरी का कुछ समझ नही आया तो शिल्पी ने अपने पति से मदद माँगी तो किशन ने तुरंत राजीव को बुलाया और उसे अपने साथ ले गए। सुबह से निकले चाचा भतीजा जब शाम को वापिस आए तो राजीव खुश नजर आ रहा था। उसने सबको बताया कि, “अब वो चाचा जी के साथ काम करेगा!”
राजीव के यहीं रह कर काम करने की बात सुन कर घर में सब बहुत खुश हो गए थे और होते भी क्यों नहीं? वो यही तो चाहते थे पर राजीव ही अपने कारणों की वजह से शहर को छोड़ कर नही आना चाहा रहा था। सब को खुश देख कर राजीव को अच्छा लगा क्योंकि सब उसकी वजह से खुश हैं।
शिल्पी की वजह से ये संभव हुआ है सब को यही लग रहा है। सब की नजरों में शिल्पी के लिए सम्मान और प्यार बढ गया था। पूरे तीन महीने हो गए थे राजीव को मेडिसिन खाते हुए वो एक बार फिर शिल्पी के साथ ही दिल्ली जा रहा था पर इस बार शिल्पी ने ही कहा,” मैं राजीव भैया को साथ ले जाती हूँ और 2-4दिन में इन्हीं के साथ आ जाऊँगी। भैया भी अपने दोस्तों से मिल लेंगे और उनके लिए चेंज हो जाएगा!”
राजीव इन तीन महीनों में कई बार आशा-निराशा में डूबता और निकलता रहा। उसने गूगल पर जो कुछ भी था ट्रांसजैंडर्स के बारे में सब पढा और समझा। वो कभी अपने आप को उन में से एक समझता तो कभी कभी अलग। यही वजह थी कि उसने शिल्पी के कहने पर ऑनलाइन ही एक मनोचिकित्सक से अपनी काउंसलिंग की थी।
मनोचिकित्सक ने उसकी पूरी बात ध्यान से सुनी और कहा,” राजीव हार्मोंन्स का अंसुतलन एक वजह तो हो ही सकती है पर ये भी सच है की जब हम बच्चे होते हैं तो आसपास अगर लड़के ज्यादा होते हैं तो हम उसी रंग ढंग में ढल जाते हैं और लड़कियाँ होने पर उनके खेल, खिलौने, कपड़े, नाच
गाना और संजना संवरना अच्छा लगने लगता है। शायद तुम्हारे साथ ऐसा ही हुआ है और क्योंकि तुम्हें हमेशा ऐसा करने से रोका गया तो बाल सुलभ इच्छाएँ तुम्हारे मन में ही कहीं दबी रह गयी हैं और तुम उन सभी इच्छाओँ को ऐसे देख और समझ रहे हो इसलिए एक बार जा कर अपने कुछ टैस्ट करवा लो फिर बताओ!”
मनोचिकित्सक की बात ने उसके अंदर सकारात्मक सोच ला दी। वो अपने आप को ऑब्जर्व करने लगा था और शिल्पी भी उस की हर गतिविधि पर नजर रखे थी। जब से वो अपने किशन चाचा के साथ काम करने लगा है वो खुश तो रहता ही है साथ ही आत्मविश्वास भी बढा है। ये किशन और शिल्पी दोनो ने ही महसूस किया।
दिल्ली आ कर शिल्पी और राजीव दो दिन बाद डॉक्टर के पास गए। इस बार उन्होंने टेस्ट करवा कर रिपोर्ट लाने को कहा था। इन दो दिनो में राजीव अपने कॉलेज फ्रैंडस से मिल आया। डॉक्टर ने रिपोर्ट देख कर खुश हो कर कहा, “पहले से बैटर रिपोर्ट है और साथ ही बाकी टेस्ट देख कर पता चलता है कि तुम में कोई और कोई कमी नही है।”
डॉक्टर की बात सुन शिल्पी और राजीव के चेहरे पर संतोष नजर आ रहा था। सच तो ये था कि जिस दिन उसका दोस्त उसे रेड लाइट एरिया में ले गया था वहाँ उस लड़की ने जो कहा वो राजीव को परेशान कर गया और उसे लगा कि कहीं वो सच में किन्नर तो नही है। यही डर उसे वापिस गाँव ले गया।
ये सच समझने में मनोचिकित्सक ने मदद की और उसके दिल में अपने घर की लड़कियों को देख कर जो इच्छाएँ बचपन से थी उसे दबाया गया। यही अगर उसे बच्चा समझ बेवजह की बंदिशे न लगाते तो लड़कियों की इन आदतों को ले कर उसके दिल में इतना जबरदस्त आकर्षण न होता कि वो उनको कॉपी करने लगा।
राजीव और शिल्पी वापिस गाँव आ गए। राजीव ने समझदारी से काम लिया और डॉक्टर ने जो कहा उसे हमेशा किया और मनोचिकित्सक से अपने मन में आयी बातों को बताते रहने से राजीव खुद को हलका महसूस करने लगा था और सबसे बड़ी बात वो खुद को नार्मल मानने लगा था।
2 साल देखते ही देखते बीत गए। इस बीच शिल्पी ने एक बेटे को जन्म दिया। सबसे ज्यादा खुश राजीव दिखायी दे रहा था। उसने घर की सब औरतों के साथ खूब डांस किया और लड़को के साथ मिल कर तो रंग ही जमा दिया।
आज राजीव के घर में खूब चहल पहल है। आज राजीव घोड़ी चढ़ रहा है अपनी दुल्हन को लेने जा रहा है पूरी बारात के साथ। शिल्पी बहुत खुश है राजीव को जिंदगी में आगे बढते देख कर नही तो एक बार वो डर गयी थी राजीव के भविष्य को लेकर। अब जब राजीव ने खुद को वक्त दे कर समझा तो जाना कि एक छोटी सी परेशानी को उसने कितना बड़ा बना दिया था और स्कूल कॉलेज के दिन उसने बेकार कर दिए पर अब वो खूब खुल कर जीएगा। उसका परिवार उसके साथ है।
समाप्त
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इस कहानी को दो लेखिकाओं ने मिलकर लिखा है
सुमन ओमानिया और सीमा बी.

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