उलझन-एक पहलू ये भी (भाग -3) : Moral Stories in Hindi

दिल्ली आ कर वो दोनो डॉक्टर से मिले। कुछ टेस्टस हुए। सारी रिपोर्टस देख कर डॉक्टर ने बताया, “हम सब में कुछ हार्मोंस होते हैं जो आदमी और औरतों दोनो में कॉमन होते हैं पर कभी कभार हार्मोनल इम्बैलेंस की वजह से जिसकी मात्रा ज्यादा होती है शरीर में, उसी के गुण किसी में ज्यादा दिखते हैं तो किसी में कम।”
“ये कैसी बीमारी है डॉक्टर? अब क्या करना होगा?” राजीव ने घबरा कर पूछा। डॉक्टर ने बताया कि बीमारी हो कर भी इसे बीमारी नही कह सकते। अब अगर लड़कियों में मेल वाले हार्मोंस ज्यादा होते हैं तो उसी की वजह से उनके चेहरे पर ज्यादा बाल हो जाते हैं, लड़को की तरह दाढी आने लगती है और लड़कियों में लड़को जैसे चलना, उनके जैसी पसंद वगैरह दिखाई देता है। ठीक वैसे ही जैसे तुमने अपने बारे में बताया।”
“डॉक्टर ये सब तो ठीक है पर इसका क्या ट्रीटमेंट है?” शिल्पी का सवाल सुन डॉक्टर साहब बोले, “हार्मोन्स को बैलेंस करने के लिए दवाई है पर उसको ज्यादा वक्त तक नही दिया जा सकता।”
राजीव डॉक्टर की बात सुन कर निराश हो गया और मायूस हो कर बोला, “मतलब मैं ऐसे ही पूरी जिंदगी शरीर से लड़का और मन से लड़की रहूँगा?” शिल्पी भी समझ नही पा रही थी कि क्या करे? डॉक्टर बोले,” वैसे तो राजीव आजकल ऐसे ऑपरेशन्स भी हो रहे हैं जिनमें पैशेंट में जिन हार्मोन्स की मात्रा ज्यादा है वो वही बनने के लिए ऑपरेशन करा लेते हैं मेरा मतलब ट्रांसजैडंर से है! आजकल ट्रांसजैंडर टॉपिक काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। काफी मुश्किल प्रोसेस तो है ही जैंडर चेंज करने का जिसमें मानिसक और शारीरिक दर्द भी शामिल हैं।”
“वैसे आजकल गूगल पर सर्च करने से सब पढने, जानने और समझने को मिल जाता है! फिर भी मेरी पर्सनली सोचना है कि अपना जैंडर चेंज करने के साथ ही हमें काफी कुछ सहने की आदत डालनी पड़ती है जो अंदर से मजबूत है वो शायद लड़ भी ले पर परिवार के सपोर्ट के बिना कोई कदम उठाने से वो इंसान अकेला रह जाता है। पैदा होते ही जो पहचान मिलती है उसे भूला कर अपनी नयी पहचान बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। अगर तुम्हारे केस में ऐसी जरूरत पड़ी तो तुम्हें तैयार रहना होगा इन सब परेशानियों का सामना करने के लिए।
डॉक्टर की बात सुन राजीव उलझन में पड़ गया और बोला ” डॉक्टर आप बिल्कुल ठीक कह रहे हैं पर क्या ये ऑपरेशन सक्सेसफुल होते हैं? कुल खर्च कितना आता है?” उसकी बात सुन डॉक्टर और शिल्पी दोनो ने एक साथ राजीव के चेहरे की तरफ देखा। ” राजीव, कुछ दिन आप पहले हार्मौंन्स को बैलेंस करने वाली दवा लीजिए। आप कुछ ज्यादा ही सोच रहे हैं। अभी इतना स्ट्रैस लेना ठीक नहीं है। 3 महीने के बाद आएँगे तो कुछ टैस्ट करवाते आइएगा फिर देखते हैं!”
“डॉक्टर सर बिल्कुल ठीक कह रहे हैं राजीव भैया!” शिल्पी की बात सुन उसने अपनी सहमति दे दी। शिल्पी और राजीव को दिल्ली आए 1 हफ्ता हो गया था इसलिए शिल्पी उसी के साथ वापिस गाँव आ गयी।
राजीव अपनी दवाई टाइम पर ले रहा था। शिल्पी और वो दोनो बैठ कर सर्च करते रहते और जब टाइम मिलता एक दूसरे से बातें करते रहते। हार्मोन बैलेंस वाली दवा कोई जादू की दवा तो थी नही जो राजीव का मन बदल जाता। राजीव रोज एक्सरसाइज भी करने लगा था और शिल्पी के समझाने के बाद वो शाम को लड़कों के साथ क्रिकेट खेलने चला जाता।
सवाल तो यही था कि इन सबसे राजीव में कोई बदलाव आएगा पर फिर भी शिल्पी उसका मनोबल बढाती रहती। चाची उसे सपोर्ट कर रही है यही सोच कर राजीव उसका कहना मानता। शिल्पी “खाली दिमाग शैतान का घर होता है”, कहावत को सोचते हुए उसने राजीव को ऑनलाइन कोई जॉब या कोर्स करने के लिए कहा तो राजीव ने,”ठीक है चाची, कुछ सोचता हूँ”, कह कर अपने लिए सचमुच कोई नौकरी ढूँढने लगा पर ये भी सच था कि वो अभी घर से बाहर नही जाना चाहता था।
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इस कहानी को दो लेखिकाओं ने मिलकर लिखा है
सुमन ओमानिया और सीमा बी.

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