” तू एक बहू होकर मेरी बहू का दर्द क्यों नहीं समझती!!” – अमिता कुचया

सरला जी के पास बहू स्वाति अपने बच्चे को देते हुए कहती हैं – “मम्मी जी आप‌ बाबू को संभाल लेंगी। यदि आप कहे तो मैं न जाऊं।”तब सरला जी कहती- अरे स्वाति कैसी बात कर रही है, मैं बाबू  का अच्छे से ख्याल रखूंगी। अभी बाहर ठंड है ,इसलिए अपने बाबू को नहीं भेज रही हूं तेरे साथ और तू बिल्कुल फिक्र न कर , आराम जा,यहां मैं और तेरे बाबा है ,सब देख लेंगे।

फिर थोड़ी देर बाद गाड़ी की आवाज आती है ,और सुमित भी आ जाता है। सुमित कहता है जल्दी करो  स्वाति,हम लेट हो रहे। सुमित के इतना कहते ही वह सरला के पास बाबू की दूध वाली बाटल‌, कपड़े, और उसकी जरुरी चीजें सब रखती है।तो सरला जी प्यार से सिर‌पर हाथ फेरते हुए कहती -“अरे स्वाति मैं सब कर लूंगी। मुझे भी सब पता है, कैसे बाबू का ध्यान रखना।”

हां हां मम्मी जी मैं चाहती हूं,आपको अभी की कम से कम परेशानी हो।

यह कहकर पैर छूकर बाहर निकल जाती है।

फिर थोड़ी देर बाद ननद नेहा आती है । और पूछती- अरे मम्मी आप बाबू को संभाल रही हैं भाभी कहां है? फिर सरला जी बताती है कि सुमित और स्वाति एक शादी में गए हैं।वो कितने दिनों से नहीं गई। इसलिए सोचा उसको भेज दूं तो उसे अच्छा लगेगा।

ये अच्छा है ,मम्मी छोटे बच्चे को आप संभाले और भाभी आराम से घूमें।ये भी कोई बात हुई ••••

तू कैसी बातें कर रही है बेटा अगर मैं अपने पोते को संभाल रही हूं, तो तुझे क्या दिक्कत है?

तू ये सब क्यों सोच रही है?

तुझे खुश होकर बाबू को मेरे साथ संभालना चाहिए। और तू ये बातें करने बैठ गई।

और सुना क्या हाल चाल है •••

मम्मी मेरे यहां तो सब बढ़िया है पर यहां मुझे कुछ सही नहीं लग रहा है आप भाभी को बहुत छूट दे रही हो ,देखना एक दिन सर पर नाचेगी•••

अरे तू कैसी बहकी- बहकी बातें कर रही है••••स्वाति शादी में गयी है,न कि कहीं घूमने••• और वह शादी के बाद  कहीं घूमने नहीं तक न जा  पाई,अब भी मैं उस पर  पाबंदी रखूं!




अगर तेरी सास तेरे साथ भी ऐसा करें तो तुझे अच्छा लगेगा। और दो दिन की ही बात है ,मैं संभाल लूंगी बाबू को।

थोड़ी देर बाद•••

एक फोन आता है तो वे सुनार से बात करती हुए कहती हैं ,हां -हां भैया सेट तैयार हो तो भिजवा दीजिए। इतना सुनते ही फिर बेटी पूछती -मम्मी क्या मंगा रही हो ।तब  उसकी मां कहती- “मैंने एक गले का सेट बनवाया है, उसी की बात चल रही थी। और वो सुनार आज दे जाएगा। “अच्छा मम्मी किसके लिए हार बनवाया है? नेहा पूछती है।

तब वो कहती हैं कि मैंने अपनी बेटी के लिए बनवाया।तो  नेहा चहककर कहती हैं कि मम्मी मेरे लिए,अभी क्यों? आपने मेरे जन्मदिन पर डायमंड की रिंग तो दी थी।तब सरला जी कहती हैं अरे तेरे लिए नहीं स्वाति की मैरिज एनिवर्सरी आ रही है, तो सोचा उसके लिए पहले से बनवा लूं।

फिर नेहा कहने लगती- मम्मी आप तो भाभी को साड़ी भी गिफ्ट कर सकती थी, हार की क्या जरूरत?

तब सरला जी कहती- नेहा मैं साड़ी दे सकती थी, पर पहली मैरिज एनिवर्सरी  है, और तुझे डायमंड रिंग दे सकती हूं।तो बहू को क्यों नहीं?बहू भी मेरे लिए बेटी है ••••अगर मैं उसकी खुशियों का ख्याल नहीं रखूंगी तो कौन रखेगा।

इस तरह नेहा को समझ आ रहा था भाभी के लिए मम्मी का अटैचमेंट बढ़ रहा है।तब वह तुनक कर कहती हैं कि अब तो मम्मी भाभी ही प्यारी हो गई ,जो उसके लिए इतना सोच रही हो,बेटी की जगह भी ले ली। आखिर हो भी क्यों न आखिर बहू सेवा जो करती है।




तब सरला जी भी डांटते हुए कहती हैं अब बहुत हुआ नेहा •••अब मैं स्वाति के खिलाफ एक शब्द न सुनूंगी। फिर सवाल जवाब करते हुए कहती हैं मम्मी बहुत सर चढ़ाओ फिर कुछ बुराई न बताना •••

फिर क्या था •••सरला जी ने पूछा तू आखिर चाहती क्या है?मैं और तेरी भाभी एक होकर न रहे, मैं दुखी रहूं और उसे दुखी करुं।बस तू जब भी आए , मैं अपने दुख भरी कहानी का पिटारा खोल कर तेरे सामने बैठ जाऊं।,तभी तुझे सुकून मिलेगा।तू नहीं चाहती क्या तेरी मां और भाभी खुश रहें। क्या तेरे साथ भी ऐसा तेरी ननद तेरी सास को भड़काती है?

नहीं ,मां मेरे साथ ऐसा नहीं होता अगर तेरे साथ नहीं  होता तो तू कैसे सोच सकती है?बहू का दर्द तुम क्यों नहीं समझती!तू भी एक बहू है, अगर तेरे साथ ऐसा हो तो क्या तूझे अच्छा लगेगा नहीं न•••

तब नेहा को समझ आता है कि उसकी कितनी गलत सोच थी।जो एक बहू होकर भी बहू का दर्द नहीं समझ रही थी।

अब उसे समझ आया कि बहू भी बेटी से बढ़कर हो सकती है।इस तरह उसने मां के साथ रहकर भतीजे की देखभाल की और भाभी के प्रति भी मन के भाव बदल गये।

दोस्तों -जब बेटी बहू बनती है, तो अपनी भाभी के प्रति भावना क्यों बदल जाती है?वह स्वयं उस जगह पर रखकर क्यों नहीं सोचती है। आखिर वह भी बहू है, उसे बहू का दर्द दिखना चाहिए न कि उससे चिढ़े।अगर बेटी को मां  प्यार मिले तो उसे अच्छा लगता है, लेकिन वही उसकी मां भाभी को वैसा ही प्यार दे तो बेटी को चिढ़ होती है। क्यों?वह बहू होकर बहू  का दर्द क्यों नहीं महसूस करती।आज भी ये भावना ननद भाभी के रिश्ते में कहीं न कहीं देखने को मिलती।इसी कारण बहू को मां जैसा प्यार नहीं मिलता। क्योंकि सास के मन में कड़वाहट भाव भरे जाने के कारण बहू ये दर्द सहती है। उसके प्रति काम करने का भार‌ डालना और कहीं आने जाने की आजादी पर रोक टोक ही बहू का दर्द बन जाता है। ये ही हमारे समाज की मानसिकता के चलते बहू  पर बेड़ियां बांध दी जाती है।

दोस्तों -अगर हम सास को काम करते देखे तो कहेंगे कि बहू क्यों नहीं कर रही, बहू को करना चाहिए।इस तरह हमें अपनी और बेटियों की सोच बदलनी चाहिए। जैसे एक मां को बेटी के काम खुशी हो सकती है, वैसे बहू के लिए काम करने में खुशी क्यों नहीं हो सकती है???

दोस्तों -ये रचना कैसी लगी?ये नयी सोच  के साथ हम आगे बढ़े तो हर परिवार सुखी रह सकता है।

कृपया अपने विचार और राय कमेंट द्वारा व्यक्त करें।अगर रचना पसंद आए तो लाइक शेयर और कमेंट भी करें।साथ ही मेरी और भी रचनाओं को पढ़ने के लिए मुझे फालो करें 🙏❤️

 

आपकी अपनी दोस्त ✍️

अमिता कुचया

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