तिरस्कार – मीनाक्षी राय

यह एक ऐसी कहानी हैं , जहां पर एक पिता अपनी बेटी के जन्म लेने के साथ ही उसको देखना नहीं पसंद करताl इसलिए नहीं देखना पसंद करता कि वह बेटी है, कहानी कुछ और ही है जो मैं आगे बता रही हूं……

रिया तीन भाई बहनों में सबसे छोटी थी lरिया का  एक बहन और एक भाई उससे बड़ा था | घर में सभी उसे तिरस्कृत करते रहते थे, क्योंकि जब रिया पैदा हुई थी तो उसके पैदा होने के साथ ही उसकी मां चल बसी थी |इस वजह से उसके पिता उसकी शक्ल तक देखना पसंद नहीं करते थे और इसी बात का फायदा उसके बड़े फायदा उसके बडे भाई बहन उठाते थे| वह जब ना तब रिया को इस बात का एहसास कराते थे कि उसके पिता उसको देखना तक पसंद नहीं करते |

रिया अपने नानी घर में पली-बढ़ी और वहीं पर बढ़ी हुई | जब भाई बहन की शादी हो गई तो रिया अपने घर वापस आए क्योंकि, उसके पिता की देखभाल करनी थी |घर में बुढी दादी थी | वह दादी  की सहायता से अपने  पिता का ख्याल रखती है| वह हमेशा कोशिश करती कि कभी कोई शिकायथ उससे उसके पापा को न रहे|


उसकी भी बडी ख्वाहिस थी दुसरो बच चो जैसी अपने पापा के प्यार को पाने की, पर उसे अपने पापा सामने जाने और उन्हे पापा कहने मे डर लगता कि कही उसके पापा से पिटाई न पड जाये|

रिया अब बड़ी हो गई थी,और  रिया की शादी भी होने लगी थी | रिया की एक ख्वाहिश थी कि उसकी विदाई के समय उसके पिता उसको गले लगातेऔर हंसते हुए विदा करते | पर रिया को मालूम था कि ये उसका सिर्फ सपना है यह कभी हकीकत नहीं होने वाला | रिया का कन्यादान उसका भाई करता है | और रिया की शादी हो जाती है | विदाई के समय अपने पिता को अपनी आंखों से ढूंढती है पर उसके पिता दिखाई नहीं देते हैं |उसके पिता उसको छत  देख रहे होते हैं | अचानक सेउसके चेहरे से  घूंघट हट जाता है,और उसके पिता देख लेते हैं |  जो देखते हैं तो रिया को देखते ही रह जाते हैं बिल्कुल ही अपनी मां जैसी थी | वही सुंदरता और वही रंग | उसके पिता ने अपनी बेटी को देखा वह बिना एक पल बर्बाद किये  दौड़ते हुए नीचे  आकर अपनी बेटी रिया को गले लगाते हैं |और बहुत रोते हैं और फिर उस से माफी मांगते हैं, और अपनी बेटी को हंसते हुए विदा करते हैं |आखिर ख्वाइश पूरी हो जाती है रिया की | वह अपने ससुराल अपने पिता का प्यार लेकर  चली जाती है|

मीनाक्षी राय की कलम से एक छोटा प्रयास ..

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