शादी को बोझ ना बनाओ (भाग 2) – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : शालिनी जी बेटी की उदासी कई दिन से भांप रही थी पर उन्होंने यही सोचा था शायद मायके से विदा होने का गम होगा पर यहां बात कुछ और ही थी।

” क्या बात है कुहू तुम इस शादी से खुश नहीं हो ?” काम से निपट कर शालिनी जी बेटी के कमरे में आ पूछती हैं।

” ऐसा कुछ नहीं मम्मी वैसे भी आप, पापा दादी सब तो खुश हैं !” कुहू बोली।

” पर बेटा तेरी ख़ुशी भी तो मायने रखती है ना …मुझे बता क्या हुआ है ?” शालिनी जी बेटी का सिर गोद में रख सहलाती हुई बोली।

” मम्मी लड़की की शादी में मां बाप सब बेटी की पसंद का करते हैं ….कपड़े गहने से लेकर डेकोरेशन तक में उसकी सलाह ली जाती है यहां तक की कार्ड भी उसकी पसंद का होता है … हैं ना ?” जवाब की जगह कुहू ने मां से ही सवाल किया।

” बिल्कुल आखिर शादी जिंदगी में एक बार होती है तो हर मां बाप सोचते है बेटी नए जीवन में जब प्रवेश करे तो सब उसकी पसंद का हो जिससे वो खुश रहे !” शालिनी जी मुस्कुरा कर बोली।

” पर मम्मी इन भौतिक चीजों से खुशी मिल जाती है क्या जब जिसके साथ को नए जीवन में प्रवेश कर रही वो दूल्हा ही अपनी पसंद का ना हो ?” कुहू ने उदासी से कहा।

” बेटा इन बातों का अब क्या फायदा मुझे तो लगा था तू अभिषेक को भूल गई है !” शालिनी जी चिंतित हो बोली।

” मम्मी जबसे मेरा सार्थक से रिश्ता हुआ मैंने अभिषेक से कोई मतलब नहीं रखा क्योंकि वो भी यही बोलता था अगर हमारे मां बाप हमारी शादी को तैयार ना हुए तो हम वहीं शादी करेंगे जहां वो चाहेंगे …मम्मी मैने सार्थक को ही अपना सब मान लिए था पर उसे पत्नी नहीं चाहिए एक ऐसी कठपुतली चाहिए जो उसकी मर्जी से नाचे वो चाहे तो हंसे वो चाहे तो बोले और किससे बोले वो भी वही तय करेगा !” कुहू बोली और उसने उन्हें सार्थक से मुलाकात की सभी बातें बताई।

 कैसे वो पहले दिन से कुहू पर अपना हक जताता है, कैसे किसी और से बोलने पर गुस्सा हो जाता है यहां तक कि बाहर क्या खाना पीना वो भी सार्थक ही तय करता है। यहां तक कि कपड़े भी वही बताता है क्या पहन कर आना क्या नहीं।

” मम्मी मेरा दम घुटने लगा है इस रिश्ते में !” कुहू ये बोल रो दी।

शालिनी जी स्तब्ध थी ऐसे कैसे बेटी इतनी लंबी जिंदगी जिएगी घुट घुट कर। क्या बेटी होने की ऐसी सजा मिलेगी कुहू को नहीं वो ऐसा नहीं होने देगी ।

” सुनिए आप लड़के वालों को मना कर दो हम उनके बेटे से अपनी बेटी का विवाह नहीं कर सकते !” शालिनी जी बाहर आ अपने पति से बोली।

” दिमाग खराब है तुम्हारा अब क्या आफत आईं है सब सही चल रहा है दोनों एक दूसरे से मिल रहे जान पहचान भी गए एक दूसरे को अब रिश्ता तोड़ने का तुक क्या है सारी रिश्तेदारी में खानदान में नाक कट जाएगी फिर कौन शादी करेगा तुम्हारी बेटी से  ?” सिद्धांत जी चिल्ला कर बोले।

” अभिषेक ….अभिषेक से होगी हमारी बेटी की शादी !” शालिनी जी दृढ़ता से बोली।

” क्या मैं जान सकता हूं गैर बिरादरी में बेटी की शादी कर खानदान की नाक कटा तुम्हे क्या मिलेगा …बिरादरी वाले क्या कहेंगे सोचा है कभी ?” सिद्धांत जी चिल्लाए।

” कल को हमारी कुहू ने घुट घुट कर जान दे दी या उसे कुछ हो गया तो आपकी बिरादरी वाले आ जाएंगे क्या उसे लौटाने ?” शालिनी जी भी ऊंची आवाज़ में बोली।

” मतलब क्या है तुम्हारा …सब उसकी पसंद का कर रहा हूं फिर क्यों घुट घुट कर जिएगी वो …!” सिद्धांत जी बोले।

” हां सब उसकी पसंद का है बस दूल्हा नहीं जिसके साथ सारी जिंदगी काटनी उसे …!” ये बोल उन्होंने सार्थक के बारे में सारी बात बताई वहां शांति देवी भी आ गई थी।

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आपकी दोस्त

संगीता अग्रवाल

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