राखी – उमा वर्मा

 अब के बरस भेज भैया को बाबुल, सावन में लीजो बुलाये—“” गुनगुना रही थी नन्दिनी ।दो दिन बाद राखी है ।इस बार खुद जाकर राखी बांधना चाहती है वह ।”” भैया को क्यो, खुद ही चली जाओ ना,मै कल ही टिकट का इन्तजाम करता हूँ “” अजय ने कहा ।आठ साल बाद नन्दिनी अपने पीहर जा रही थी ।पति अजय ने सहर्ष जाने की आज्ञा दे दी थी ।”” ठीक है जा तो रही हो पर वहां अपना राज मत चलाने लगना, अब वह तुम्हारी भाभी का घर है वह सिर्फ तुम्हारा मायका है नन्दिनी “” ।” 

हाँ जी, मै क्या समझती नहीं, और मेरी प्रिया भाभी कोई ऐसी वैसी थोड़ी न है ।मुझे अपने हाथ पर लिए रहेगी ।” दूसरे दिन नन्दिनी लखनऊ पहुंच गयी ।पर जैसा सोचा था वैसा कुछ नहीं था ।सिर्फ अम्मा के बोल सुनाई दिया “” कहाँ से अचानक  आ गई नंदी? ख़ैरियत तो है?”” हाँ अम्मा,,सोचा इस बार अपने हाथों भाई को राखी बांधना चाहती थी ।बहुत दिन हो गये न तो सोचा इसी बहाने सब से मिलना भी हो जायेगा ।” भाभी नहीं दिख रही है, और बच्चे?

“” ” अरे बिट्टी, तेरी भाभी क्या  घर में रहती है जो मिलेगी ।बहुत बड़ी कम्पनी में उसकी सर्विस है, आने का कोई तय समय नहीं है, और रिनी,रोहित अपने कमरे में फोन पर लगा होगा ।” “” देखो बच्चों, बुआ आयी है तुम्हारी “” अम्मा ने पुकारा तो चेहरे पर खीज लिए हुए भाई बहन उपस्थित  हो गये ।

“” अरे पाँव छुओ,बुआ है तुम्हारी, इतनी दूर से आई है कुछ खाने के लिए लाओ,देखो तो मुँह कैसा सूख गया है सफर से ।थोड़ी ही देर में कुछ सूखे बिस्कुट और मिक्सचर जो न जाने कब का बासी पड़ा था लेकर रिनी उपस्थित हुई ।अम्मा न जाने कितना हुलस हुलस कर रिनी को निर्देश दे रही थी ।जा,जल्दी से खाने को कुछ बना  ला।दिन भर की भूखी होगी बिचारी ।”” नहीं अम्मा, मै ठीक हूँ “” 

आने दो  भाभी को।___ सात बजे शाम को दरवाजे की घंटी बजी “” जा बिट्टी, देख तो जरा कौन आया है?”” –” अरे दीदी  कब आयी ? कैसे आयी ? फोन भी नहीं किया “”। प्रश्नों की झड़ी लगा दी भाई ने ।” प्रिया तो न जाने कब आयेगी, तब तक  मै देखता हूं कुछ खाने को ” भाई के साथ नन्दिनी भी किचन में साथ गई ।

अस्त व्यस्त किचन देख कर मन कसैला हो गया ।यही रसोई था जब शादी से पहले कितनी व्यवस्थित  रखती थी वह ।उसे गंदगी  जरा भी पसंद नहीं थी ।हाँ तो नौकरी है प्रिया को तो समय कहाँ मिलता होगा यह सब देखने को ।– दस बजे रात को प्रिया का आगमन हुआ ।”” 



अरे वाह जीजी, कब आई? न चिटठी, न फोन किया आपने “” ।”” हाँ प्रिया, इस बार  सोचा अपने से खुद जाकर राखी बांधू भाई को “।”” वो क्या है जीजी,बड़ी कंपनी है तो काम जरा ज्यादा ही है, कभी कभी तो रात के ग्यारह बारह बज जाते हैं;” परेशान मुद्रा में प्रिया रसोई की तैयारी में लग गई ।दो घंटे बाद सूखी रोटी और सब्जी थाली में लग गई ।

“” ये क्या? अब इतनी दूर से आई है बिट्टी, तो कुछ अच्छा बना  लेती?”” रहने दो ना अम्मा, प्रिया थकी आयी है कितना करेगी? ” ऐसा भी क्या काम कि रात को बारह बज जाए ।अम्मा घुटने के दर्द से परेशान घिसटती सी आई।”” 

लाओ प्रिया, मै कुछ मदद करती हूँ ” नन्दिनी रसोई में प्रवेश करने लगी  तो प्रिया ने टोका “” रहने दो जीजी,,आप तो मेहमान है घर की, कितना करेंगी?” झन से थाली हाथ से छूट गया ।हाँ मेहमान ही तो है वह ।न जाने कब से अपना घर समझ बैठी थी वह ।एक क्षण में उसने पराया कर दिया ।सोचा था मायका अपना घर ही तो है खूब मस्ती करूँगी ।

खूब अपनी मर्जी से रहूँगी।___ दूसरे दिन राखी का त्यौहार ।अम्मा सुबह सुबह नहा धोकर  तैयार पूजा पाठ से निबट गई थी ।भाई भी नहा धोकर तैयार हो गया ।आज बहुत दिनों बाद  बहन अपने भाई को राखी बांधेगी अपने हाथ से ।अम्मा खाट पर बैठी थी ।उठने का उपक्रम करती हुई  निर्देश देती जा रही थी ।कूलहे के दर्द का रेला सा आया, हिलक कर बोली ।” जा तो बिटिया, पूजा की थाली  ले आ” उसमें दही,रोली।अक्षत  सजा ले” रिनी और रोहित भी तो साथ बैठेंगे ।

भाई बहन का त्योहार है ।राखी बांधेगी रिनी और भाई नेग देगा।”” यह सब तरीका है  पैसे ऐंठने का ” मै नहीं मानता इसे ।रोहित ने जवाब दिया ।अम्मा अब कितनी लाचार हो गई थी ।मन से भी और तन से भी ।कभी सब को समय पर नाशता, खाना, तैयार करके देना बिटिया के लिए नित नये डिजाइन के फ्राक सिल कर देना, गर्मियों में सब को शरबत, फालूदा तैयार करके देना ।सब कुछ कितना दौड़ दौड़ कर करती थी आज कितनी लाचार हो गई थी ।प्रिया का रूख भी बहुत अच्छा नहीं था अम्मा के प्रति ।

तभी तो प्रिया ने रात को ही सुना दिया था “” अम्मा जी से तो कुछ होता नहीं, खाट पर पड़े पड़े हुक्म चलाती रहती है ।अकेली मै कहाँ कहाँ देखूँ “” सारी तैयारी हो गई ।थाली में  अक्षत तो रखना ही भूल गयी ।प्रिया, अक्षत कहाँ है? कहती हुई भंडार में घुसी नन्दिनी ।तभी कानो में सुनाई पड़ा “” मम्मी, ये बुआ अभी कितने दिन रहेगी? “” आवाज़ रोहित की थी ।”” अब राखी बांधने आई है तो तुरंत कैसे जाने कह दे? एकाध दिन तो रहेगी ही ।सब से बड़ी बात है कि कुछ देना भी तो पड़ेगा ।

“—- क्या  दोगी ? कुछ पैसे वैसे  दे कर विदा  करो उनको।रिनी बोल रही थी ।नहीं  बेटा, ऐसा नहीं होता ।न हो तो वह सोने का कंगना ही दे देते हैं जो अम्मा जी ने तुम्हारे शादी के लिए रखा है ।है तो वह अम्मा जी का ही।उनकी बेटी के हाथ रहेगा ।”””””” इतनी महंगी चीज, पागल हुई है क्या?””””” रिनी चिल्ला रही थी ।खूब सुन्दर राखी भाई के कलाई पर सजा गया ।महंगी दुकान की मिठाई  मंगाई थी नन्दिनी ने ।बहन ने भाई को बहुत प्रेम से राखी बांध दिया ।त्योहार  मन गया ।प्रिया ने नन्दिनी को कंगना थमा दिया ।”” 

इसकी क्या जरूरत?”” वैसे भी मैं आज ही निकल जाना चाहती हूं ।अजय को खाने की दिक्कत हो जाती है ।देख तो रोहित, रिक्शा बुला देना भैया ।थोड़ी देर में ____ “” रिक्शा आ गया बुआ”” जाते जाते नन्दिनी ने बच्चों को पास बुलाया और कंगन रिनी को पहना दिया ।”” यह तुम्हारे शादी के लिए काम आयेगा “” रोहित को एक सोने का सिक्का दिया जो कभी  अम्मा ने उसे पहले पगफेरे पर दिया था ।वैसे भी मुझे इन चीजों की क्या  जरूरत ।बस भाई बहन का प्यार बना रहे ।कहकर नन्दिनी रिक्शा में बैठ गयी ।मायका दूर छूटता जा  रहा था ।

उमा वर्मा

 

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