प्रेम – कल्पना मिश्रा

कुछ दिनों से मैं गौर कर रहा था कि बेहद ख़ुशमिज़ाज और बात बात में चहकने वाली मेरी 

पत्नी अंजू ऑपरेशन के बाद उदास सी रहती है।मैं उसके पास बैठने की,बात करने की कोशिश करता तो वह काम का बहाना बनाकर तुरंत उठकर चल देती। रात में भी मुझसे अलग सोने की कोशिश करती।

आज उसका हाथ पकड़कर जबरन अपने पास बैठा लिया।

“क्या बात है अंजू?तुम मेरे साथ ऐसा बर्ताव क्यों कर रही हो?” मैंने पूछा तो वह चुप रही फिर कुछ पल बाद धीरे से बोली  “मेरी एक बात मानोगे?”

“हाँ,हाँ बोलो,,, क्या बात है?” मैंने असलियत जाननी चाही।

 “तुम दूसरी शादी कर लो।”

“क्या,,,ये क्या बकवास कर रही हो?” उसकी बात सुनकर मैं हतप्रभ रह गया।

“हाँ अरुण, अधूरी हो गई हूँ मैं। अब तो तुम्हें पिता बनने का भी सुख नही दे सकती,,,इसीलिये तुम…”



वह कुछ और कहती कि मैनें उसके होठों पर उंगली रख कर उसे चुप करा दिया।

“आइंदा ऐसी बातें कभी मन में भी न लाना। तुम समझती हो कि पति पत्नी का प्यार सिर्फ़ शारीरिक होता है? बिल्कुल नही!! वह तो साल दो साल का ख़ुमार रहता है।बाकी तो ज्यों-ज्यों वक्त गुज़रता जाता है , दोनों का प्रेम शारीरिक नही रहता बल्कि और गहरा होता जाता है, मन से ,दिलोदिमाग़ से भी। एक दूसरे की फिक्र,एक दूसरे के सुख दुःख की चिंता,,,असल में तो यही प्रेम है।

तुम्हें सर्वाइकल कैंसर हुआ है तो तुम अपने को अधूरा समझने लगी,,, मुझे दूसरी शादी कर लेने की बात कर रही है लेकिन यही बात मैं तुमसे कहूँ,,? तुम्हारी जगह मुझे कैंसर या फिर कोई असाध्य बीमारी हो जाती, तो क्या तुम मुझे छोड़ देती?”

“न,न,,,ऐसा अशुभ मत बोलो” कहते हुये उसने झट से मेरे मुँह पर हाथ रख दिया।

“तो तुम मुझसे ऐसी बातों की उम्मीद कैसे रखती हो?” मैंने उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया,, “बच्चे का क्या है, अनाथालय में ऐसे बहुत से बच्चे हैं, जो माँ,बाप के प्यार से वंचित हैं,,, हम उनके माता पिता बन जायेंगे।”  मैंने उसे गले से लगा लिया।

वह कुछ नही बोली, बस उसके आँसुओं से मेरी शर्ट भीग रही थी। 

#प्रेम

 

कल्पना मिश्रा

कानपुर

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