पीपल का पेंड – गोविन्द कुमार गुप्ता,

दादा यह क्या कर रहे हो राजन ने अपने दादा को गड्ढा खोदते देखा तो उत्सुकता बश  पूँछ लिया ,

दादा शिवकुमार बोले राजन यहाँ पीपल का पेड़ लगाएंगे खूब छाया होगी आराम से चारपाई डालकर सोया करेंगे खुली हवा में और ऑक्सीजन भी बहुत मिलती है,

गर्मी में कहीं भी धूप नही आयेगी हमारे अलावा भी कुछ राहगीर यहां आराम कर सकेंगे ,

राजन बोला दादा आने वाले समय को किसने देखा है यह खेत है ,कल सड़क पक्की हो जायेगी ,

पापा से कहकर दुकानें बनवाऊंगा और आमदनी भी होगी साथ ही हम भी कोई शॉप खोल लेंगे ,ओर यही मकान भी बनवा लेंगे  ,

दादा शिवकुमार मुस्कराये कोई जबाव नही दिया और पीपल के पेड़ को गढ्ढे में लगाकर मिट्टी डालने लगे और फिर पानी देते समय सोंचने लगे समय की गति बहुत तेज है पता नही यह रहेगा या नही हम कुछ दिन के मेहमान है पर  पोते की सोंच के कारण शायद यह पीपल भी न रह पाये,



रामदयाल ने चुपके से पीपल के बृक्ष की जमीन को ग्रामसभा को दान कर दी और कहा कि कभी भी इस जगह पर कोई पक्की बिल्डिंग नही बन सकती न ही पेंड काटा जायेगा यदि सूख जाये तो दोबारा पीपल का ही पेंड लगाया जायेगा,

समय आगे बढ़ता रहा एक दिन रामदयाल जी बहुत बीमार हो गये तो हॉस्पिटल ले जाया गया जहां ऑक्सीजन चढ़ाया गया और कुछ समय बाद उनकी मृत्यु हो गई,

उनके चित्र को घर मे लगा दिया गया ,

एक वर्ष अचानक एक भयंकर वायरस ने देश मे दस्तक दी जिसके कारण बहुत तेजी से लोग मरने लगे पता चला कि ऑक्सीजन की कमी से लोग मर रहे है,

पर जिस जगह पीपल के पेड़ है उन जगहों पर प्रकोप कम है,

तभी गांव में भी वायरस आ पहुंचा लोग बीमार हुये सांस लेने में तकलीफ होने लगी पक्के मकानों की उमस से घुटन सी होने लगी,

तभी अचानक राजन को अपने दादा की याद आई जो पीपल का पेड़ लगाते समय कह रहे थे कि यह पेड़ एक दिन सबको छाया और ऑक्सीजन देगा,

उसने सभी से कहा कि जब तक हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की व्यवस्था नही हो जाती जिनकी भी तबियत खराब है पीपल के नीचे आकर रहे और खुली हवा का आनन्द ले ,

सभी लोग चारपाई लेकर पहुंचे और हवा के तेज झोंके की ठंडक से जैसे तन मन मे हरियाली आ गई लोग सही ढंग से स्वास लेने लगे और ठीक हो रहे थे तभी ऑक्सीजन आने की सूचना मिली लोग डॉक्टर के पास गये डॉक्टर ने वैक्सीन लगाई वायरस की पर ऑक्सीजन की जरूरत नही पड़ी न ही किसी की मौत हुई पूरे गांव में,


राजन बहुत खुश था कि दादा  की बात आज सच दिखी पर धीरे धीरे वह यह सब भूल गया और एक दिन दुकान बनवाने हेतु पेंड कटवाने को मजदूर बुलाये तो ग्राम प्रधान ने आकर रोक दिया और कागज दिखाये,

लिखा था,

प्रिय राजन यह पेड़ अब गांव की संपत्ति है और हमेशा रहेगी तुम्हारे लिये हमने शहर में इससे भी बड़ी जगह खरीद दी है मेरे बॉक्स में कागज है,

दुकान ओर मकान सब बना लेना शुभकामनाएं तुम्हारा दादा,,,

 

पढ़ते पढ़ते राजन रोने लगा और सभी से छमा मांगने लगा तथा संकल्प लिया कि आजीवन खाली जगहो पर पीपल के पेड़ लगवायेगा और  पर्यावरण की सुरक्षा में अपना जीवन लगा देगा,

आज एक लाख पेंड लगाने के कारण राजन को मंत्री जी सम्मानित कर रहे थे और राजन दादा की याद में आंसू बहा रहा था,,,,

 

सन्देश,,,पेंडो को सुरक्षा दे यह हमारा जीवन है और बच्चो का भविष्य,

गोविन्द कुमार गुप्ता,

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