पता नहीं कैसे – गुरविंदर टूटेजा

आज सुधा बहुत खुश थी अपने इकलौते बेटे के लिए  तन्वी जैसी बहू पाकर बहुत समझदार व संस्कारी थी उसे विश्वास था कि वो उसे अपने प्यार से संभाल लेगी…!!!!

   अरे चाची क्या सोचने लगी जल्दी से आरती उतारिए व बहू का गृहप्रवेश कराईये…हाँ कहकर उसने आरती उतारी और उसे बड़े प्यार से अपने घर ले आई…!!!!

   अंदर घुसते ही समर अपने कमरे में जाने लगा तो कजिन्स ने छेड़ते हुए कहा अरे इतनी जल्दी क्या है अभी तो रस्में बाकि है भैया…!!!!

   समर ने जोर से कहा मुझे अब कोई रस्म-वस्म नहीं करनी है मैं थक गया हूँ सोने जा रहा हूँ…!!!!

  सुधा व अजय दोनों बेटे के व्यवहार से शर्मसार हो गए बहुत मुश्किल से समर को मनाकर बाकि की रस्में पूरी कराई तन्वी भी इस व्यवहार से दुखी हो गई पर कुछ बोल तो सकती नहीं थी…!!!!

  सुबह भैया व भाभी आये उसे पगफेरे के लिए लेने और बात हुई कि दो दिन बाद वो सब उसे लेने जाएँगे…!!!!

  तन्वी जब घर आई तो दादा-दादी व पापा-मम्मी सब उसका बेसब्री से इंतजार कर रहे थे…उसने बताया तो कुछ नहीं पर सबसे मिलकर उसकी रूलाई फूट गई सबने परेशान होकर पूछा तो अरे कुछ नहीं हुआ है ऐसे ही रोना आ गया…!!!!




  दो दिन बाद लेने आये तो फिर समर नहीं आया ये बात तन्वी के परिवार में किसी को अच्छी नही लगी तो उसके पापा ने हाथ जोड़कर बोला…देखिये अजय जी माफी चाहूँगा पर आज तो पहले जवाँंई  जी का आना बनता था हमने बहुत अरमानों से अपनी बेटी को आपके घर भेजा है बस उसके साथ कभी गलत नहीं होना चाहिए…!!!!

   नहीं ऐसा कुछ  नहीं है वो समर तैयार हुआ पर उसका सिर दर्द बहुत हो रहा था इसलिए नहीं आया हम जल्दी ही दोनो को साथ में आपके यहाँ  भेजेगें और तन्वी हमारी बेटी है हम उसे कोई परेशानी नहीं होने देंगे….!!!!

   तन्वी को लेकर वो घर आ गये पर दोनों की ही उससे बात करने के की हिम्मत नहीं हो रही थी जब घर पहुँचें तो समर घर पर नहीं था तन्वी को भी समझ आ गया था अभी उसने चुपचाप कमरे में जाना ही सही समझा…!!!!

    इधर अजय व सुधा अपने कमरे में आये तो अजय गुस्से में बरस पड़ा…मैंने कहा था कि उसकी शादी मत कराओ किसी की बेटी की ज़िन्दगी  क्यूँ खराब करनी है पर तुम्हें तो अपनी बहू लाने का शौक था अब क्या होगा..??

  मैं खुद ही परेशान हूँ मुझे लगा था शादी हो जाएगी तो सब ठीक हो जायेगा…!!!!

  दो महीने हो गए थे शादी को तन्वी को लगा था कि वो समर को बदल लेगी उसके साथ ही मायके जाएगी उधर पापा व सबके फोन आ रहे थे वो बार-बार बुला रहे थे पर बेचारी वो तो फँसी हुई थी…!!!!

  उधर अजय सुधा को सुनाता रहता था समर को समझाने की कोशिश की तो वो बोला मैंने तो आपको पहले ही मना किया था कि मुझे शादी नहीं करनी है पर मम्मी को बहुत शौक था बहू लाने का तो अब मुझे मत बोलो…!!!!




  सुधा से रहा नहीं गया एक दिन हिम्मत करके उन्होंने तन्वी से माफी माँ दी और बोला बेटा मुझे माफ कर दो मेरे गलती की सजा तुम भुगत रही हो मुझे लगा था कि शादी के बाद मेरा बेटा सुधर जाएगा पर ऐसा नहीं हुआ…!!!!

 तन्वी ने कहा मम्मी आप मुझसे बड़ी है तो प्लीज़ आप मुझसे माफी माँग कर मुझे शर्मिन्दा ना करें…..पर मैं इतना जरूर कहना चाहूँगी कि आखिर क्यों आपने मेरे पापा-मम्मी के साथ ऐसा किया उन्होंने कितने अरमानों के साथ मुझे विदा किया था उन्हें पता चलेगा तो उनका दिल टूट जायेगा मैं कैसे उन्हें समझा सकूँगी…??

   बेटा सही कहा मैं ही सबकी दोषी हूँ और मैं सबसे सबके सामने माफी मागूँगी…!!!!

   बिल्कुल नहीं मम्मी आप ऐसा कुछ नहीं करेगी मैं अपने अपने तरीके से बता दूँगी व समझा भी दूँगी सास-बहू दोनों गले लग गई….!!!!

  पास से गुजरतें समर ने उनकी बात सुन ली और शायद आज पता नहीं कैसे उसे अपनी मम्मी व पत्नी का दर्द समझ आ गया ये भी कि जो अभी कुछ ही दिन पहले आई है वो मेरे पापा-मम्मी को समझ सकती है तो मैं उनका बेटा होकर क्यूँ नहीं समझ सकता…मुझे अब बदलना होगा ..पता नहीं कैसे…??

   अगली सुबह नई उंमग लेकर आयी थी सबके जीवन में क्योंकि समर का बदला हुआ व्यवहार सबको आश्चर्यचकित कर रहा था पर साथ ही खुशी भी दे रहा था जब उसने तन्वी को बोला कि आज तुम्हारे घर चलतें हैं तो…तन्वी व पापा-मम्मी का खुशी में एक सुर था…सच…!!!!

#माफी 

मौलिक व स्वरचित©®

गुरविंदर टूटेजा 

उज्जैन (म.प्र.)

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