“नियति क्या ना कराए”

नियति कैसे कैसे खेल दिखाती है !आज तक राजा को रंकऔर रंक को राजा होते सुना है ;किंतु आज जो मैं कहानी आपको बताने जा रही हूं, वह एक ऐसी मासूम लड़की की है ,जो कारावास में उम्र कैद की सजा काट रही है!जेलर के पद पर मेरी पोस्टिंग कुछ दिनों पहले महाराष्ट्र की महिला कारावास एवं पुनर्वास केंद्र में हुई थी! मेरे सेवाकाल पूर्ण होने में अभी 4 वर्ष शेष थे !अभी तक मेरा सामना एक से एक खतरनाक कैदियों से हुआ था!

 कई बार तो उनका वीभत्स चेहरा देखकर मुझे रातों को नींद नहीं आती थी ;किंतु आज मेरे लिए यह सब सामान्य था! आज मेरा सामना एक ऐसी कैदी से हुआ जिसकी मासूमियत देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा सकतकि वह यहां हत्या के जुर्म में उम्र कैद की सजा भुगत रही है! 26 बरस की निहायत खूबसूरत महिला थी वह!

 मेरी आंखों से उसका चेहरा  हटही नहीं रहा थावह हरदम गुमसुम सी रहती थी! अपनी साथ की कैदियों से भी बातें नहीं करती थी! मैंने कई बार उसके मन को कुरेद ने की कोशिश की ,पर मेरी हर कोशिश नाकामयाब होती नजर आ रही थी! और मेरी  जिज्ञासा उसके लिए बढ़ती ही जा रही थी! आखिरकार एक महीने बाद मेरी मेहनत रंग लाई और वो पिघल गई! वह यहां अपने पति की हत्या की सजा काट रही थी! किंतु उसे इस बात का जरा भी अफसोस नहीं था!




 अंजलि नाम बताया था उसने !वह मानव से प्यार करती थी! बचपन से ही इकलौती होने के कारण बहुत जिद्दी भी थी! माता पिता उसकी हर जिद्द पूरी करते थे !इनकार शब्द तो उसकी जिंदगी में था ही नहींमानव से शादी करने के लिए उसके माता-पिता ने उसे बहुत समझाया, क्योंकि मानव सही लड़का नहीं था !किंतु अंजलि उसके प्यार में ऐसी पागल हुई कि उसे मानव की हर बुराई भी अच्छाई में नजर आने लगी और उसकी ज़िद के आगे माता-पिता की एक ना चली!

 उसे इस बात कामानव से शादी करके वह उसके घर आ गई! कुछ दिन तो सब कुछ सही रहा, किंतु कुछ समय पश्चात मानव ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया! उससे अंजली के खर्चे भी बर्दाश्त नहीं हो रहे थे! आए दिन दोनों में झगड़ा होता रहता और नौबत मार पिटाई तक आ जाती! मानव शराब तो पीता ही था, और जो जमा पैसा उसके पास था वह भी लुटा के आ जाता अब वह अंजली से पीछा छुड़ाना चाहता था! 

अंजलि को तलाक देना चाहता था किंतु अंजलि ऐसा नहीं चाहती थीकुछ समय बाद अंजलि को पता चला कि मानव किसी और लड़की से प्रेम करता है, और सारा पैसा वही लुटा देता है !

अब जब भी मानव घर आता अंजलि पर बेतहाशा जुल्म धाता! कभी उसे बेल्टों से मारता, कभी उसे लात घुसा से !अंजलि भी अब इन सब से थक गई थी !पिता के पास भी वह वापस नहीं जा सकती थी क्योंकि आज उसकी जिद का ही यह परिणाम थामानव के अत्याचार कम होने का नाम नहीं ले रहे थे! 

अंजलि ने कई बार उसे प्यार से समझाने की कोशिश की किंतु नतीजा कुछ नहीं निकला, बल्कि मानव इन सब से और  चिड़ जाता अब तो वह अंजलि की शक्ल भी नहीं देखना चाहता था! एक दिन नशे की हालत में मानव ने अंजलि को इतना मारा कीअंजली का सारा आत्मसम्मान ढह गया! और उसने मानव से बदला लेने का मानस बना लियाअंजलि के अंदर मानव के प्रति नफरत इस कदर बढ़ गई कि वह उससे छुटकारा पाने के लिए तड़पने लगी! 

और ऐसी ही एक भयानक रात में उसने अपने पति का कत्ल कर दिया और उसे यहां कारागार में पहुंचा दिया! नाजों से पलने वाली आज सलाखों के पीछे अपना जीवन व्यतीत कर रही है! जेल में आने के बाद अंजलि को पता लगा कि मानव लड़कियों को अपने प्रेम जाल में फसाकर कर उन्हें आगे बेच देता है! ऐसे जानवर का खात्मा करके वह अपने आप को बहुत हल्का महसूस कर रही थी किंतु वह पछता भी रही थी कि काश उसने अपने माता-पिता की बात मानी होती और वह मानव जैसे दरिंदे की कैद में ना आती किंतु नियति के आगे किसकी चली है!

मेरी सभी से यही प्रार्थना है कि आवेश में आकर कोई ऐसा कदम ना उठाएं जिसकी सजा उसे जिंदगी भर का दर्द देदे!

हेमलता गुप्ता!

स्वरचित

#नियति

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