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ननद तो सिर्फ कमाई करने आती है – ममता गुप्ता

हे भगवान !! दुनिया मे मेरे भाई भाभी जैसे किसी को न दे। जब भी तीज त्यौहार पर आती हूँ तो,बस एक 500रुपये का नोट थमा देते हैं… कभी भी यह नहीं सोचते कि इकलौती बहन है तो सोना या चांदी का उपहार में ही कुछ देदें…दुनिया की बहन बेटियों को उनके मायके वाले भर भरके देते हैं, औऱ एक मेरे भाई भाभी हैं जो कभी कुछ नहीं देते… इस बार तो मैं आ गई दोज पर तिलक करने के लिए लेकिन अब कभी भी नही आऊंगी क्योंकि कुछ बढ़िया कमाई तो होती नही है, बल्कि मेरे गांठ के खर्च औऱ हो जाते हैं, जिसको भी तिलक औऱ राखी बंधवानी हो अगली बार से खुद चलकर आये…विनीता ने अपने भैया भाभी को ताने मारते हुए कहा।।।

दीदी जितना हमारे पास है उतना तो हम तुम्हें देते ही हैं ना। आपका मान सम्मान तो करते ही है ना….देते होंगे लोग अपनी बहन बेटियों को भर भरके क्योंकि जिसके पास जितना होगा वो उतना ही देगा… औऱ फिर दीदी लेने देने से कुछ नही हो तो बस प्रेम औऱ सम्मान जहाँ मिल जाता है, वहाँ सोने चांदी की चीज़ों का कोई मोल नही रह जाता औऱ हम आपका सभी तीज त्यौहार पर दिल से मान सम्मान करते हैं… जो हमारे संस्कारो में है…।  इसलिए आप हमें हमेशा ताना न मारा कीजिये।।।  औऱ ठीक है अगली बार से हम खुद ही आपके घर आ जाया करेंगे….आप यहाँ आने की तकलीफ न उठाया कीजिए….विनीता की भाभी माही ने जवाब देते हुए कहा।।।

यह हैं विनीता जो होली की दोज पर अपने भैया भाभी को तिलक करने के लिए आई हैं.. भाई निशांत औऱ भाभी माही तीज त्यौहार पर अपनी बहन को बुलाते हैं, औऱ उसका खूब मान सम्मान करते हैं लेकिन फिर भी माही की आदत हो गई है हर बार मांग करने की या फिर यूं कहे मांगकर ले जाने की ….विनीता के इसी आदत के कारण और दो भाइयों ने विनीता को तीज त्यौहार पर बुलाना ही छोड़ दिया…। लेकिन निशांत ने कभी भी विनीता की इस आदत के कारण उससे मुँह नही मोड़ा। अपने भोले भाई औऱ भाभी के सरल व्यवहार का विनीता फायदा उठाती थी…!!

कभी कभी भाभी माही को विनीता की इन्ही लेंन देंन वाली बातो पर गुस्सा आ जाता था..लेकिन गुस्सा करने से क्या फायदा कौनसी उसकी आदत सुधरने वाली थी…!! अपनी ननद को अच्छी सी विदाई देकर उसे ससुराल के लिए रवाना किया…!!




यहाँ आकर दीदी तानाकसी करती हैं इससे अच्छा तो अबकी बार राखी पर हम ही चले जायेंगे… ताकि उनके आने जाने का खर्चा औऱ मिठाई फल का खर्चा बच जाएगा….उनकी शिकायत भी दूर हो जाएगी कि इतना किराया भाड़ा लगाकर आती हूं फिर भी कुछ कमाई नही होती है… विनीता ने अपने पति निशांत से कहा।

निशांत ने कहा ठीक है.. तुम भी दीदी के यहाँ कभी नही गई हो इस बार हम दोनों राखी पर दीदी के घर ही चलेंगे।। ताकि उन्हें भी तो हमारा आवभगत करने का मौका मिले।।।

कुछ महीने बाद राखी का त्यौहार आया…निशांत ने अपनी बहन विनीता को फोन किया कि”राखी पर जरूर से जरूर आना है, लेकिन विनीता ने सीधे मुँह कह दिया कि मुझे नहीं आना राखी पर तुम्हारे यहाँ… ग़र तुम्हारी गरज पड़े तो चले आना वरना मुझे जरूरत नहीं है। ऐसा बेहूदा सा जवाब देकर विनीता ने फोन काट दिया।।

जब निशांत ने फोन पर हुई बातचीत के बारे में माही को बताया तो…उसे गुस्सा तो बहुत आया कि क्या दीदी के लिए यह तीज त्यौहार सिर्फ कमाई का साधन है,क्या उन्हें यह नहीं पता कि यह तीज त्यौहार तो प्रेम के प्रतीक हैं…।

कोई नही हमे तो राखी बंधवाने जाना ही होगा वरना लोगों को कहने का मौका मिल जाएगा कि इकलौती बहन को न तो राखी पर बुलाया औऱ न ही खुद गए राखी बंधवाने के लिये।।

माही ने निशांत से कहा।।।




माही ने विनीता के लिए बढ़िया से बढ़िया साड़ी ख़रीदी और साड़ी पर बढ़िया क्वालिटी का मेकअप का सामान औऱ साथ मे चूड़ियों का सेट…मिठाई के डिब्बे औऱ साथ में फल, मतलब अपनी तरफ से उसने बिल्कुल भी कमी नही छोड़ी लेकिन आदत से मजबूर विनीता को पसन्द आये जब बात बने।।।

दोनों पति पत्नी चल दिये अपनी बहन के यहाँ राखी का त्यौहार मनाने । जब वह अपनी बहन विनीता के घर पहुँचे तो…विनीता अपने भैया भाभी को देखकर हल्का सा मुस्कुराई औऱ कहा “चलो अच्छा हुआ तुम दोनों ही आ गए… वरना मेरा खर्चा हो जाता…!! मेरे लिए राखी बंधाई में बढ़िया सा गिफ्ट लेकर आये हो या नहीं….या फिर हमेशा की तरह वही एक नोट देकर टरकाने का इरादा हैं…. विनीता ने मुँह बनाते हुए कहा।

अरे दीदी !!!”यह बताइये आपका क्या इरादा हैं… हमे अंदर भी बुलाओगी या बाहर से ही भेजने का इरादा है… माही ने बात पर बात बोलते हुए कहा।।।

अरे नही नही भाभी मेरा ऐसा कोई इरादा नही है… आप अंदर आइए औऱ बैठिए …विनीता ने कहा।।

खुद के मान सम्मान में कभी कोई कमी नही रहनी चाहिए लेकिन भाई भाभी का मान सम्मान तो गया भाड़ में…माही मन ही मन बड़बड़ा रही थी…!!

कम से कम आधा घण्टे बाद तो ननद बाई पानी लेकर आई फिर पूछने लगीं… नाश्ता करोगे या फिर करके आये हो…ग़र नही करके आये तो क्या तुम्हारे लिए गर्मागर्म समोसे मंगवा दूं…लेकिन अब समोसे कचोरी खाने का भी समय नही है क्योंकि अब तो खाना खाने का समय हो गया हैं….विनीता ने कहा।।

नही नही दीदी… हम तो नाश्ता करके आये हैं। आप हमारे लिए परेशान न हो ….हम तो अब खाना ही खा लेंगे….निशांत ने कहा।।।

माही को गुस्सा आ रहा था कि”दीदी को यह सोचना चाहिए कि घर से जल्दी निकले हैं तो नाश्ता कब किया होगा….? औऱ मेहमान खुद के मुँह से थोड़ी कहेगा की”हा जी हाँ हमारे लिए गर्मागर्म समोसे मंगा लीजिए…. कचौड़ी मंगा लीजिए…




माही मन ही मन विनीता की बातों पर हंस रहती थी…औऱ ऐसा महसूस कर रही थी जैसे ननद की नजर में भाई भाभी का कोई मान ही नहीं है… ऐसा लग रहा था जैसे यहाँ आकर गलती कर दी …!!

दीदी खाना तो बाद में होता रहेगा आप पहले हमारे राखी बांध दें वरना मुहूर्त निकल जायेगा…. माही ने कहा।।

माही के कहने पर विनीता ने अपने भाई भाभी के राखी बांधी औऱ राखी बांधने के बाद भाई के हाथ में नारियल और भाभी को कुछ नहीं दिया।

लाओ अब राखी बांधने का नेग भी जल्दी जल्दी दे दीजिये… जल्दी से कमाई करवा दो अब मेरी….!! विनीता ने बड़ी उत्सुकता से कहा।।

माही ने अपने बैग में से सारा सामान निकाला औऱ विनीता के हाथों में रख दिया औऱ साथ मे 1000 रुपये का लिफाफा भी, यह देखकर अब तो विनीता का रोम रोम खिल गया…!!

अरे वाह अबकी बार तो तुमने बहुत ज्यादा दे दिया विनीता ने कहा।

चलो खाना तैयार हैं तुम दोनों खाना खा लो … विनीता ने कहा।।। भाई भाभी ने खाना खाया।

अब हम चलते हैं दीदी, निशांत ने कहा।।।

लेकिन माही पता नही कौनसी सोच में लीन थी….निशांत ने कहा माही चलने का इरादा नहीं है क्या…चलो ताकि समय से पहुँच सकें।




माही जाने से पहले विनीता दीदी से कुछ कहना चाहती थी…सुनो दीदी जैसे तुम्हें अपना मान सम्मान प्यारा हैं ना वैसे ही हमें भी हमारा मान सम्मान प्यारा है….!! आपने यह तक नहीं सोचा कि मेरी भाभी पहली बार मेरे घर आई है तो उसका सम्मान करने का फर्ज बनता है, लेकिन आपने हमारा मान रखा ही कहां है। भाई भाभी रोज रोज आपके यहाँ नहीं आते। क्या तुम्हारे पास अपनी भाभी को देने के लिए एक बिंदी का पत्ता तक नहीं है…ग़र आप हमारे घर आती औऱ हम ऐसा करते तो क्या आपको बुरा नहीं लगता… वैसे भी हम तो आपको सभी तीज त्योहार पर बुलाते हैं औऱ अच्छे से मान सम्मान करते हैं… हमारी नजर में मान सम्मान करने के लिए किसी कीमती चीज का होना जरुरी नहीं है, बल्कि हमें तो सिर्फ आपका प्रेम चाहिए…। दीदी आप किसी को सम्मान दोगी तभी तो मान सम्मान पाओगी ….कभी भी लेन देन औऱ पाई पाई का हिसाब जोडकर रिश्ते नही निभते हैं बल्कि रिश्ते निभते हैं आपसी समझ और प्रेम की मिठास से। आप मेरी बातें सुनकर सोच रही होगी कि”क्या यह बदले में विदा लेने ही आई थी क्या…??

 

 

हाँ में बदले में लेने ही आई थी लेकिन तुम्हारी तरह कीमती चीजे नहीं बल्कि सम्मान पाने आई थी।

दीदी आप अपनी यह आदत सुधार लें ताकि आपको दोनो भाई भी बुला सकें…हर वक्त पैसे को अहमियत देना बन्द कीजिए रिश्तों को अहमियत देना सीखिए क्योंकि पैसे तो फिर भी कमाए जा सकते हैं लेकिन ग़र रिश्ते टूट गए तो फिर जोड़ना मुश्किल होता हैं… माही ने समझाते हुए कहा।

विनीता को एहसास हो गया था कि उसने गलत किया है। जो भैया भाभी उसके आने से पहले ही सभी व्यवस्था रखते थे… आज उनके आने पर उन्हें ठीक से नाश्ता तक नहीं कराया ..भाभी कभी भी उसको किसी भी तरह की कोई कमी नही छोड़ती फिर भी उसे हर वक्त कमी ही नजर आती। विनीता ने अपनी इस आदत को सुधारने का प्रण लिया कि अब वह कभी भी मायके से मिलने वाले सामान में कोई कमी नहीं निकालेगी बल्कि जो मिलेगा उसे प्रेम से स्वीकार करेगी…उसे समझ आ गया था कि मायके वाले तो हमेशा ही देते हैं आज उसे मौका मिला है अपने भाई भाभी का सम्मान करने का।।

विनीता ने अपनी भाभी को गले लगाया औऱ भाभी का मान सम्मान करते हुए भाभी को एक मिठाई के डिब्बे के साथ एक साड़ी भी दी….माही ने मना किया लेकिन विनीता ने जबर्दस्ती की तो माही को उनकी बात का मान रखना पड़ा।।।

दोस्तों!!अक्सर मैने देखा है कि ननदों को चाहे कितना भी दे दो लेकिन उन्हें हमेशा कम ही लगता है… लेकिन ग़र भाई भाभी कभी तीज त्यौहार पर उनके घर चले जाए तो भाई भाभी के मान सम्मान में कमी क्यो रख देती हैं… क्या भाई भाभी का कोई अपना आत्मसम्मान नही होता ….इस कहानी के माध्यम से मेरे कहने का तात्पर्य यह हैं कि समय पर अपने भाई भाभी का भी मान सम्मान करना जरूरी है, हर वक्त उनसे उपहार लेने की भूख या फिर राखी, दोज जैसे प्रेम के प्रतीक त्यौहारों को कमाई का साधन मानकर रिश्तों की धज्जियां न उड़ाएं बल्कि अपने प्यार औऱ अपनेपन से रिश्तों को मजबूत बनाये …..

क्या आप मेरी बात से सहमत हैं तो प्लीज अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे औऱ मुझे फ़ॉलो करे।। आपकीं प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा।।।

आपकीं सखी

ममता गुप्ता

 

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