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” मैं तुम्हारे साथ अपने घर की लक्ष्मी का अपमान देखने नहीं आया था”…. – कीर्ति मेहरोत्रा

“पापा ! ये देखिए ये रही हमारी फैमिली फोटो , मैं तो पूरा कोलाज बनवा लाया ,आपकी बहुत इच्छा थी ना ” कहते हुए माधव उत्साह से भर गया और वहीं लॉबी में पापा के साथ कुर्सी डालकर बैठ गया तब तक माधव की पत्नी नैना भी वहीं चाय नाश्ता लेकर आ गई ।

” ये आपने बहुत अच्छा किया माधव ! मेरी भी बहुत इच्छा थी कि सारी तस्वीरों का एक कोलाज बनाया जाए “…

देवी सहाय जी रिटायर्ड फौजी हैं । हमेशा अनुशासित जीवन जिया है । पत्नी भी नहीं रहीं तो बेटा बहू जबरदस्ती अपने साथ ले आएं हैं । वो कत‌ई तैयार नहीं थे बेटे के घर आने के लिए क्योंकि उन्हें लगता था कि वो बेटे बहू के साथ सामंजस्य नहीं बिठा पाएंगे तो दोनों की जिंदगी डिस्टर्ब होगी।

लेकिन उनके दोस्त हीरा बाबू ने कहा ” कर्नल ! बहुत खुशकिस्मत होते हैं वो मां बाप जिनके बच्चे उन्हें पूछते हैं उनकी चिंता करते हैं सबसे बढ़कर अपने साथ रखना चाहते हैं वरना तो आजकल के बच्चे अपने जीवन में दखलंदाज़ी बर्दाश्त नहीं करते । मैं तो कहूंगा अगर बेटा बहू कह रहे हैं तो एक बार उनके साथ जाकर तो देखो वरना कहीं ऐसा ना हो कि तुम्हारे एटीट्यूड से आहत होकर वो तुम्हे पूछना ही छोड़ दें फिर तुम्हें भी अफसोस हो कि उस समय बच्चों की बात क्यों नहीं मानी ? अब तो वैसे भी भाभी नहीं हैं तेरा उन लोगों के अलावा कोई नहीं है । वहां मन ना लगे तो यहां चले आना तुम्हारा लंगोटिया यार तो तुम्हें यहीं तुम्हारा इंतज़ार करता मिलेगा “।

” हीरा ! मैं भी तो यही सोच रहा हूं कि कहीं मेरा अनुशासित बात व्यवहार उनकी जिंदगी में खलल ना पैदा कर दे । वो लोग मुझसे परेशान ना हों जाएं । तुम्हारी भाभी ने तो मुझे झेल लिया लेकिन हर किसी के वश की बात नहीं है मुझे झेलना । तू कह रहा है तो कुछ दिनों के लिए चला जाता हूं और कर्नल साहब बेटे बहू के साथ आ ग‌ए ।

कर्नल साहब एक सुबह उठकर मार्निंग वॉक पर जाते फिर एक्सरसाइज करना ,पेड़ पौधों को पानी देने के बाद अपने लिए चाय बनाकर न्यूजपेपर पढ़ने बैठ जाते । सामने देखा तो बहू नैना उनके लिए चाय लिए आ गई ” अरे पापा ! आपने खुद चाय क्यों बना ली मैं बना देती । आप मुझे बता दीजियेगा कि आप कितने बजे उठते हैं तो मैं भी उठ जाया करूंगी और आपकी चाय बना दिया करूंगी “।

” अरे नहीं नहीं बेटा ! तुम्हें इतनी जल्दी उठने की कोई जरूरत नहीं है तुम आराम से सोओ । मेरी तो जिंदगी बीत रही है इस रूटीन को फॉलो करते हुए । बचपन से बाहर रहा इसलिए अपना हर काम खुद करने की आदत रही है मेरी । अपनी चाय तो मैं तुम्हारी सासूमां के रहते हुए भी बनाता था तो अब भी बनाता हूं कोई दिक्कत की बात नहीं है । लो तुम भी पियो मेरे हाथों की चाय एकदम कड़क तुम्हारे ससुर जी की तरह ” कर्नल साहब ने केतली नैना के सामने खिसका दी ।




पापा ! आप चाय बहुत अच्छी बनाते हैं मैंने आज बहुत दिनों बाद अपने हाथों के अलावा किसी और के हाथों की चाय पी है “

 

” क्यों माधव कभी नहीं बनाता ? मुझे तो हमेशा से ही घर का हर काम करने की आदत रही है “।

” उनके अंदर सबसे बड़ी यही कमी है कि वो घर का काम  करने में मेरी मदद नहीं करने में अपनी शान समझते हैं ।

” ओहो तो यहां मेरे ही पापा से मेरी बुराई की जा रही है ” तब तक माधव भी वहीं आ गया ।

” बुराई नहीं कर रही थी मैंने पूछा तो बताने लगी “

” मैं इसलिए इन मेमसाब की कोई मदद नहीं करवाता कि ये सर पर चढ़ जाएंगी “।

” आज के जमाने के पढ़े-लिखे होकर तुम्हारी अपनी पत्नी के प्रति ये सोच है ” ।




” पापा ! पढ़ें लिखे आज के जमाने के होने से इन औरतों की स्थति में कोई फर्क नहीं आ गया है । आपने वो सुना ही होगा ” ढोल गंवार शूद्र पशु नारी सकल ताड़ना के अधिकारी ” ।

” बस करो माधव ! मैं यहां तुम्हारे साथ अपने घर की लक्ष्मी का अपमान देखने नहीं आया था । मैं कल ही जा रहा हूं । मैंने हमेशा अपने घर की औरतों की इज्जत की है चाहे वो मां के रूप में हो हो या बहन के रूप में या फिर पत्नी या अब बहू के रूप में ,हर औरत का ओहदा मेरी नजरों में हमेशा सम्माननीय रहा है । तुमने कभी मुझे अपनी मां से ऊंची आवाज में बात करते देखा । मैं ही हार गया तुम्हें संस्कार देने में वरना आज मेरा बेटा अपनी पत्नी के लिए इतने अशोभनीय शब्दों का इस्तेमाल नहीं करता । जीवनसाथी की कीमत जीते जी करो उसके जाने के बाद रोने पछताने से कोई फायदा नहीं होता “..

आज मुझे देखो तुम्हारी मां के जाने के बाद मैं अकेला जरूर रह गया लेकिन मुझे किसी चीज का पछतावा नहीं है मैंने हमेशा तुम्हारी मां को अपने घर की अपने दिल की रानी बनाकर रखा अपनी इच्छाएं उस पर थोपी नहीं और तुमने अपने पिता को देखकर कुछ सीखा नहीं ये तुम्हारी गलती है । मुझे तो लगा था आज की पीढ़ी पढ़ी-लिखी हर चीज को अपने नजरिए से देखती है सिर्फ कहने को औरत को बराबरी का दर्जा नहीं देती बल्कि हर कदम पर उनका साथ निभाकर उन्हें बराबरी का दर्जा देती है । तुम औरत को रूपया पैसा ,तोहफे देकर नहीं जीत सकते लेकिन सम्मान देकर जीत सकते हैं औरत को दिए जाने वाले तोहफों में सबसे बड़ा तोहफा उसका सम्मान है । जब तुम खुद नैना की इज्जत की नहीं करोगे तो अपने बच्चों को क्या सिखाओगे “?

वहां सिर्फ नैना की सिसकियां गूंज रही थीं । माधव बोला ” पापा ! आप अपने बेटे का पक्ष ना लेकर अपनी बहू का पक्ष ले रहे हैं “




” क्योंकि तुम गलत हो ,क्या इसलिए तुमने लव मैरिज की थी शादी से पहले जिस प्यार को पाने के लिए तुम पूरी दुनिया से लड़ गए थे तो शादी के बाद वो सारा प्यार क्यों खत्म हो जाता है क्योंकि वो चीज हासिल होते ही उसकी अहमियत खत्म हो जाती है ” ।

” सॉरी पापा ! आप सही हैं । मुझे पता नहीं क्या हो गया था कि नैना की हर बात में कमी नजर आती । ये भूल गया था कि जीवनभर साथ निभाने का वचन देकर लाया था और दिया क्या सिर्फ मानसिक प्रताड़ना लेकिन पापा ! मैं आपसे वादा करता हूं अब मैं नैना की इज्जत करूंगा उसे कभी कोई शिकायत का मौका नहीं दूंगा और आपको भी ,अब तो आप कहीं नहीं जाएंगे पापा ” कहकर माधव पिता के गले लग गया ।

” मुझे पता था मेरा बेटा थोड़ी देर के लिए भटक जरूर गया है लेकिन खोया नहीं है जो अपने पिता से इतना प्यार कर सकता है वो अपनी जीवनसंगिनी से भी बहुत प्यार करेगा और निभाएगा भी ” कर्नल साहब ने माधव की पीठ सहलाते हुए कहा ।

” पापा ! लोग कहते हैं सास ससुर बेटे बहू का घर उजाड़ते है लेकिन आपने तो अपने बेटे को रास्ता दिखाकर मेरा उजड़ा घर बसा दिया , थैंक्यू सो मच ” नैना ने इतना कहकर ससुर जी के सामने हाथ जोड़ दिए ।

” खबरदार ! जो फिट कभी अपने पापा से थैंक्यू कहा ,अपने बच्चों का सुखी घर संसार देखकर सबसे ज्यादा खुशी माता-पिता को ही होती है ” कहते हुए कर्नल साहब ने अपने बहू बेटे को गले लगा लिया और तीनों की आंखों से आंसुओं की अविरल धारा बह रही थी ।

दोस्तों आपको मेरी ये स्वरचित और मौलिक रचना कैसी लगी कृपया पढ़कर अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया जरूर दें आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है मुझे फॉलो भी जरूर करें । ये सिर्फ मेरे अपने विचार हैं मेरा मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना बिल्कुल नहीं है ।

जल्दी ही मिलती हूं आपसे अपने न‌ए ब्लाग के साथ तब तक के लिए राम राम 🙏

आपकी प्रतिक्रिया के इन्तजार में …..

आपकी दोस्त

कीर्ति मेहरोत्रा

धन्यवाद 🙏

 

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