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खट्टा मीठा रिश्ता –  सविता गोयल

” बहू ये क्या सब्जी बना कर रख दी तूने…. अरे रंग देखा है इसका… बिल्कुल फीका .….. क्या कहेंगे दामाद बाबू !! कोई काम तो ढंग से कर लिया कर। ,, अर्चना जी अपनी बहू कामिनी को डांटते हुए बोली।

 ” मां जी, पता नहीं इस बार के मसाले कैसे आए हैं…. जितने भी डाल लो खाने में रंग ही नहीं आता,, कामिनी नजरें झुकाते हुए बोली। 

 ” चल, ज्यादा बहाने मत बना, मान क्यों नहीं लेती कि तुझे बनाना ही नहीं आता और ये देख …. मेज पर चाय का दाग लगा हुआ है वो भी साफ नहीं किया …… इस बहू ने तो नाक में दम कर रखा है ।,, 

कामिनी चुपचाप बाकी के काम निपटाने रसोई में चली गई । ये तो रोज ही होता था। जब तक कामिनी के काम में अर्चना जी कोई कमी नहीं निकाल लेती उनका दिन शुरू नहीं होता था। 

 कामिनी बिन मां की बच्ची थी। शादी के बाद जब अर्चना जी को देखा तो उनमें ही वो अपनी मां को तलाश करती थी लेकिन अर्चना जी तो उसकी सास थीं ना …. अर्चना जी दिल की बुरी नहीं थीं लेकिन बहू को कुशल गृहिणी बनाने का जिम्मा उन्होंने जरूर उठा रखा था। 

 उनके घर की तेज आवाज पड़ोस के घरों में भी सुनाई पड़ती थी जिसे उनकी पड़ोसन सरला काकी बड़े मजे लेकर सुनती थी। 

 एक बार अर्चना जी को दो दिनों के लिए अपने भाई के घर जाना पड़ा । उन्हें बहुत चिंता थी कि उनकी बहू उनके बिना घर कैसे संभालेगी । 

 इसलिए अपनी पड़ोसन को बहू का थोड़ा ध्यान रखने के लिए कहकर वो चली गईं।




अर्चना जी की अनुपस्थिति में सरला काकी खुद को कामिनी की सास समझने लगी थी। उन्हीं की तरह वो भी कामिनी के हर काम में नुक्स निकालती रहती थी। कामिनी के लिए दो दिन काटने बहुत मुश्किल हो गए थे। अगले दिन कामिनी सारा काम निपटाकर दोपहर का खाना बना रही थी तो सरला काकी आ धमकी , ” बहू, तेरी सास ठीक कहती है …. तुझे किसी काम का सुर नहीं है …. अरे ये क्या सफाई की है तूने ?? आंगन में मक्खियां भिनभिना रही हैं और ये पोछा देख..… अभी तक नहीं सूखा ….. लगता है मायके से कुछ सीख कर नहीं आई .. ,, सरला काकी चिल्ला रही थी कि तभी अर्चना जी ने घर में प्रवेश किया , ” सरला, तूं मेरी बहू पर चिल्ला क्यों रही है …? ,,

” जीजी, तुम्हारी बहू सच में बड़ी निकम्मी है … एक काम ढंग से नहीं करती ,, सरला काकी तुनकते हुए बोली।

 ” बस सरला , चुप कर, खबरदार जो मेरी बहु को कुछ कहा…. मैंने सिर्फ इसका ध्यान रखने के लिए कहा था ना कि इसकी सास बनने के लिए। मेरी बहू को मैं चाहे कुछ भी कहूं लेकिन कोई और मेरी बहू पर ऊंगली उठाए ये मैं कभी बर्दाश्त नहीं करूंगी … अरे मेरी बहू तो हीरा है हीरा …. वो तो मैं बस इसलिए इसे टोकती रहती हूं कि ये सारे काम अच्छे से सीख जाए …. हूं तो मैं सास लेकिन साथ ही मां भी हूं…. बेटियां तो फिर भी मां को पलट कर जवाब दे देती हैं लेकिन मेरी बहू मेरे ताने सुनने के बाद भी मुस्कुराते हुए मेरी सेवा करती है …. तूं जाकर अपना घर संभाल, अपनी बहू को मैं खुद संभाल लूंगी ,,

 सरला काकी अपना सा मुंह लेकर लौट गई और कामिनी अपनी सास से लिपट गई , ” मां जी, आप कितनी अच्छी हैं …. आपके बिना इस घर में मेरा बिल्कुल मन नहीं लगता। .. ,,

” बस बस बहू, ज्यादा मश्का मत लगा …. तेरी तारिक कर दी इसका मतलब ये नहीं कि मैं तुझे टोकना छोड़ दूंगी … आखिर सास हूं तेरी । अर्चना जी ने कामिनी के गालों पर प्यार से चपत लगाते हुए कहा। लेकिन कामिनी फिर भी अर्चना जी के गले में बाहें डाले लटकी रही जैसे कितने दिनों बाद वो अपनी मां से मिली है। 

 सच में सास बहू का रिश्ता खट्टा मीठा होता है जिससे रिश्तों में स्वाद बढ़ता है। वर्ना जीवन भी बिना मसाले के खाने की तरह बेस्वाद हो जाता है।

#एक_रिश्ता

अप्रकाशित

स्वरचित

 सविता गोयल

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