कौन है अपना यहां? – डॉ संगीता अग्रवाल

“तुम ऐसे कैसे इल्जाम लगा सकते हो मुझपर विभु??”राधिका तड़प गई थी जब उसके पति ने उसपर सीधा आरोप लगाया था।

वो एक पब्लिक स्कूल में साइंस टीचर के लिए इंटरव्यू दे कर आई थी,इंटरव्यू बहुत अच्छा हुआ था,बोर्ड उसकी परफॉर्मेंस से बहुत खुश था।दमकते चेहरे से वो बाहर आई जहां भावेश उसका पति उसका इंतजार कर रहा था।

“क्या हुआ?बहुत खुश दिख रही हो!”भावेश ने पूछा था राधिका से।

“मेरा सिलेक्शन हो गया है,कल से ज्वाइन करना है,उसकी आवाज़ खुशी से कांप रही थी,लेकिन विभु!एक और बात है,ये लोग कह रहे हैं,आपको अपने ओरिजिनल्स यहां ऑफिस में जमा करने होंगे,कल दे देंगे।”

“क्या??”विभु चिल्लाया,”तुम्हें तो कोई रात को बुलाए तो भी चल दो।”

“विभु!!!”हाऊ डेयर यू”राधिका रुआंसी हो उठी, आहत होकर उसने अपने पति जो देखा था जिसने उसके सम्मान की रक्षा करने को अग्नि के चारों ओर फेरे लिए थे।

विभु ने उसकी बात अनसुनी करते हुए स्कूटर स्टार्ट कर दिया था और आंखों से इशारा किया,”अब चलोगी मेरे साथ या यहीं छोड़ जाऊं?”

उस दिन के बाद दोनो के प्यार को ग्रहण सा लग गया था,न राधिका को कोई सेंस दिखता था उससे माफी मांगने का और विभु तो पुरुष था,सवाल ही नहीं उठता था सॉरी का,वो उसे संग लौटा लाया घर,क्या ये कम था?

राधिका की भी हिम्मत नहीं हुई थी किसी दूसरे इंटरव्यू के लिए उससे इजाजत लेने की क्योंकि अब उसकी बातें,ताने ,उस दिन की बात को मद्देनजर रखते हुए ही होते थे।

भूल भी सकती थी वो जॉब को लेकिन,भावेश ने उसे पाई पाई का मोहताज बना रखा था।जब तक राधिका के मां बाप जिंदा थे,वो आते जाते कुछ रुपए पकड़ा जाते थे उसके हाथ और वो छुपा कर रख लेती थी,हालांकि भावेश उससे ये पूछना कभी नहीं भूलता था,क्या देकर गए हैं वो अपनी बेटी को लेकिन वो भी डंडी मार ही लेती थी,सीख रही थी अपने पति से ही कुछ गुर और इन पैसों पर तो उसका अधिकार बनता था।

अब पानी सिर से ऊपर निकलने लगा,भावेश उसे बात बात पर टोकता,”मेरे घर के अलावा कौन तुम्हें दो वक्त की रोटी दे रहा है,चुपचाप रहा करो,कभी राखी पर दो दिन भाई के घर रह आओ,इतनी भी औकात नहीं तुम्हारी,जुबान मुझसे लड़ाओगी।”

राधिका कसमसा जाती,बच्चों के सामने,इस तरह कुत्ते बिल्ली की तरह झगड़ना उनका,उनके कोमल मस्तिष्क पर कितना बुरा प्रभाव डालेगा,जानती थी वो।शुरू से ही राधिका बहुत संयमी रही थी,उसकी बूढ़ी सास ससुर की देखभाल करते ,उसने कभी मायके जाने की जिद नहीं की थी और अब जब मां बाप नहीं रहे तो भावेश उसे ताने मारता।

अपने बड़े भैया सोमेश को जानती थी वो,भाभी की इजाजत के बिना वो कुछ नहीं करते थे।वो नंदों को घर बुलाना पसंद नहीं करती थीं।

लेकिन एक दिन,जब भावेश ने गुस्से में आकर राधिका से घर छोड़ कर जाने को कहा ,”वो गिड़गिड़ाने लगी,कहां जाऊंगी मै इन बच्चों के साथ,प्लीज इतने कठोर न बनो।”

पर उसके सिर पर खून सवार था और हार मानकर,उस दिन,राधिका ने अपने बड़े भैया को फोन कर ही दिया।

“कैसी हो?बड़े दिन बाद याद किया”,उनकी टोन का सेंस समझ कर राधिका जो कहना चाहती थी,डगमगा गई पर सारी हिम्मत बटोर कर बोली,”भैया!आपसे कुछ जरूरी बात करनी थी।”

“हां ! बोलो,क्या कहना चाहती हो”,वो रौबीले स्वर ने बोले।

“आजकल भावेश बहुत अजीब व्यवहार करने लगे हैं,वो..”

उसकी बात बीच में काटते हुए वो बोले,”कैसी पढ़ी लिखी हो तुम,आजकल हसबैंड वाइफ की समस्या किस घर में नहीं हैं,वो अपने मायके तो फोन नहीं घडघड़ा देती।बताए देता हूं तुम एकदम जाहिल हो।”

राधिका मानो,उनका ये रिस्पॉन्स जानती थी,इसलिए संभलते हुए बोली,”भैया!बात कुछ ज्यादा बढ़ गई थी,इसलिए ही आपको फोन किया,दरअसल ये मुझे ,बच्चो के साथ घर से निकालने को उतारू हैं।”

“क्या??ऐसा क्या कर दिया तुमने?जरा न सोचा हमारी इज्जत के बारे में?शर्म नहीं आई?”

राधिका का दिल आया कि फोन डिस्कनेक्ट कर दे,पर एक तरफ कुआं था तो दूसरी तरफ खाई, मरती क्या न करती,बोली,”आप मेरी बात ध्यान से सुनें भैया बस एक मिनट प्लीज!”

“बोलो!मेरे पास वक्त नहीं है”सोमेश ने कहा।

आप इन्हें फोन कर के बस इतना कह देना कि तमीज से रह लो,मेरी बहन बोझ नहीं  मुझ पर,खुद कमा कर खा लेगी आज की डेट में भी,ज्यादा परेशान किया तो कोर्ट में घसीटूंगा आपको।

“अरे…”उधर से आवाज आई।

“लेट मी कंपलीट, मैं वादा करती हूं,मिनट भर को भी आपके घर नहीं आऊंगी बस कह दो इतना,वो डर जायेंगे,इन्हें लगता है,मेरा कोई हैं नहीं इसलिए इतना दबराते हैं रात दिन,कोर्ट कचहरी के नाम नानी याद आ जायेगी, मै जानती हूं, प्लीज भैया,इतना फेवर कर दो।”

“देखो राधा!” भाई गंभीर आवाज में बोले,

“संबंध शुरू से बनाए जाते हैं,जब मेरी शादी हुई थी,अम्मा पिताजी कितना परेशान करते थे तुम्हारी मासूम भाभी को लेकिन तुम बहनों का कोई रोल नहीं था उनका पेच अप कराने में बल्कि मजे लेती थीं तुम।”

भैया!!क्या कह रहे हैं आप?ऐसे इल्जाम आप तो न लगाओ,क्या आप नहीं जानते,शुरू में मैं अपने सास ससुर की कितनी तानाशाही झेल रही थी, मैं कितनी बार मायके आई बताओ आप?जो मैं आप सब की लड़ाई करवाती या सुलझाती??दिस इज टू मच”। ये आप किसकी भाषा बोलने लगे?”

“तुम्हारी इतनी हिम्मत!!अपनी भाभी को कुछ कहो,, मेरा तुमसे कोई संबंध नहीं आज से।”

फोन कट चुका था और राधिका स्तब्ध थी…”कौन है इस दुनिया में अपना?”

समाप्त

डॉ संगीता अग्रवाल

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