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दर्द जीवन भर का – प्रीति सक्सेना

अर्थी सजी है, सुर्ख लाल जोड़े में मम्मी….. आप सजी संवरी चिर निद्रा में सो रही हो, पापा…. डबडबाई आंखों से एकटक आपको निहार रहे हैं………37 वर्ष का साथ निभाकर , जीवन के आधे रास्ते में पापा को छोड़कर आप चली गईं, छोटे दोनो भाई और 15 साल की छोटी बहन सब स्तब्ध से अपनी जगह पत्थर बने खड़े हैं, किसी को होश नहीं, अचानक ये हुआ क्या….. आप इन्दौर मेरे घर आईं, कितनी खुश थी आप, महेश जी से कहा…. बेटा, शिर्डी ले चलेंगे मुझे,मैं अपने ऑपरेशन के पहले बाबा के दर्शन करना चाहती हूं, फिर हम सब शिर्डी गए, मैं देख रही थी , शिर्डी जाते समय आपके चेहरे पर अनोखी चमक और भरपूर शांति थी,!! लौटकर हम इन्दौर आए, आपके चेकअप शुरु हुए आपका हर्निया बहुत ज्यादा बढ चुका था, डॉक्टर्स ने दिलासा दिया…. कोई गंभीर बात नहीं इसलिए हम सभी निश्चिंत थे!! आप तो बहुत ज्यादा आशान्वित थीं कि अब आप जल्दी ही अपनी तकलीफों से निजात पा लेंगी!!

आप अपने को पूर्ण स्वस्थ हो जाने की चाहत में बहुत खुश थीं, कोई भय आपके चेहरे से नजर भी तो नहीं आता था मम्मी…… महसूस ही नहीं हुआ… मौत आपका पीछा कर रही है!! ऑपरेशन थियेटर में जाते समय कितने प्यार से आप हमसे मिलकर गईं, पापा को मिलीं और पैर छू लिए, बहुत भावुक पल थे वो, पर अनहोनी का अहसास रत्ती भर भी न था…… घंटो ऑपरेशन चलता रहा, हमारी धड़कनें भी ऊपर नीचे होती रहीं, तीन बजे से ऑपरेशन शुरु हुआ रात 10 बजे तक खत्म होने का नाम नहीं ले रहा, कुछ देर बाद बड़े से स्ट्रेचर में आपको ढेरों मशीनों के साथ निकाला गया, आप बेहोश थीं, मुंह में वेंटीलेटर था……..

आपको इस हालत में देखकर हम सब बौखला गए, सब एक दूसरे को देख रहे, पापा तो निर्जीव से हो गए आपको इस दशा में देखकर…… सिर्फ 54 साल की तो थीं आप, इस तरह कभी आपको देखेंगे हम ये तो सपने में भी नहीं सोचा था मम्मी!! आपको इन्दौर के दूसरे हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया, हम भी आपके पीछे भागे, रात भर बैठे रहे, सुबह पता चला….. ऐनस्थिसिया ज्यादा देने के कारण आप “कोमा” में चली गईं ….. ये क्या हुआ, कैसे हो गया, अच्छी भली स्वस्थ मेरी मम्मी कोमा में चली गईं? कल तक बातें करती, हंसती मुस्कुराती हुई मेरी मां शांत चुप, खामोश क्यों हो गईं, सोच नहीं पा रही, पापा का ध्यान कैसे रखना है, छोटे भाई बहन हैं , उन्हें कौन संभालेगा……… एकाएक सब चुप से हो गए….. कोई कुछ बोल नहीं रहा!!




20 दिन हो गए, सुबह खबर आ गई……. आप चली गईं, कभी वापस न आने के लिए, सबको छोड़कर, इतनी निर्मोही,कैसे हो गई मम्मी…. इतनी बेदर्दी से कैसे चली गईं, ये भी न सोचा, पापा कैसे जी पायेंगे आपके बिना, छोटे भाई बहन सबकी जिम्मेदारी निभाए बिना कैसे चली गईं?? सब आपको दुल्हन की तरह सजा रहे हैं, लाल चुनरी में आपका दूधिया रंग संगमरमर की तरह चमक रहा है, कितनी शांत दिख रही हो, सब दर्द दूर हो गए न, अब कोई तकलीफ नहीं रही…. पापा को लाया गया… आपकी मांग भरने को, लाल सिंदूर में आपका चेहरा किसी देवी की तरह दिख रहा है….. वैसे भी आप बहुत खूबसूरत थीं आज तो आपके चेहरे से नज़र हट ही नहीं रही!! आपकी अर्थी उठी…. पर मेरे घर से क्यों मम्मी,….. मैं कैसे सहन करूं ये सब देखना, ये तो कभी कोई बेटी सपने में भी नहीं सोच सकती .. …..

किसी भी बेटी के जीवन में ये दिन कभी न आए ईश्वर…. पर मेरी तक़दीर में ये दिन आना था…….आया भी और मैंने देखा भी !! आज 33 साल बाद मेरे जख्म हरे हो गए, इतना गहरा ” दर्द ” ह्रदय में छुपा था, आज सबके सामने बाहर आ ही गया, आप जहां भी हो , हमेशा खुश रहना, हमें आशीर्वाद देना मां 🙏 लिखते हुए आंसू बहते जा रहे हैं, जानती हूं आंसुओ के शब्द नहीं होते इसलिए,आज अपने अन्दर का सारा दर्द बाहर निकलने देना चाहती हूं अन्दर रखना नामुमकिन सा हो गया है अब मेरे लिए!! सभी से यही कहना चाहती हूं……..बहुत कीमती हैं ये अनमोल रिश्ते, भाग्यशाली हैं वो जिन्हें माता पिता का साथ और उनका प्यार मिला है, कदर करना हमेशा उनकी, वरना पछतावे के अलावा कुछ नहीं मिलता!!
प्रीति सक्सेना इंदौर

# दर्द

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