अतीत का साया – अनुपमा 

भैरवी के पति का ट्रांसफर हुआ तो वो अपने पति के साथ कानपुर आ गई , बहुत अनमने मन से उसने सारी पैकिंग की थी ,बिलकुल मन नहीं था उसका यहां आने का , अच्छी खासी कॉलोनी मैं सेटल हो गई थी

वो आगरा मैं , टीचर की जॉब भी थी उसको ,अपनी बनी बनाई व्यवस्थित जिंदगी कौन छोड़ना चाहता है पर मरती क्या न करती आना ही पड़ा । आकाश ने कहा उससे की तुम्हे जॉब के लिए मना थोड़ी ना कर रहा हूं ,वहां देख लेना जॉब कोई भी फिर भी वो बिलकुल भी खुश नहीं थी कानपुर आकर ।

पूरा महीना होने आया था भैरवी को कानपुर आए ,उसने सभी कुछ सेट कर लिया था नए घर मैं , कामवाली बाई भी मिल गई थी उसे ,सो अब वो अपनी जॉब तलाशने लगी ,एक दो स्कूल मैं गई भी वो पर बात नही जमी ।

आज भैरवी को शहर के अच्छे गर्ल्स स्कूल मैं इंटरव्यू के लिए जाना था वो सुबह सुबह जल्दी उठ कर आकाश का नाश्ता बना कर तैयार हो गई ,आकाश के ऑफिस के पास ही स्कूल था तो आकाश ने ही उसे ड्रॉप भी कर दिया ,उसका साक्षात्कार सफल हुआ और उसने जल्द ही ज्वाइन भी कर लिया ।

स्कूल बहुत अच्छा था वहां की सभी अध्यापिकाएं बहुत मिलनसार थी , और प्रधानाचार्य भी कभी परिवार जैसा माहौल बना कर रखती थी इसलिए स्कूल अच्छी प्रगति पर था । धीरे धीरे भैरवी को पता चला की सारा स्कूल का प्रबंध प्रधानाचार्य मैडम के पति देखते है और हर कोई उनसे बहुत ज्यादा प्रभावित था ,

सभी की बातों मैं उनका जिक्र स्कूल मैं आम बात थी , और एक और बात भैरवी ने नोटिस की स्कूल मैं सारा महिलाओं का ही वर्चस्व था , पुरुष स्टाफ कोई था ही नही , सर का ही प्रबंध था ये भी वो महिलाओं को आगे लाने के लिए बहुत कुछ करते रहते थे ,

भैरवी ने अभी तक उनके बारे मैं बस सुना ही था एक हफ्ते मैं ही इतना सुन चुकी थी की लगता ही नहीं था की उनसे मुलाकात नही हुई है अभी तक ,वैसे तो सर अक्सर आते ही रहते थे स्कूल पर पिछले एक महीने से वो अपनी बेटी के पास गए थे



जल्दी ही वो दिन भी आ गया जब सर स्कूल आने वाले थे , मैनेजमेंट की मीटिंग रखी गई थी और सभी को रुकना था , भैरवी ने भी आकाश को फोन करके कह दिया की आज देर हो जायेगी ।

स्कूल की छुट्टी हो चुकी थी सभी लोग स्टाफ रूम मैं जमा हो चुके थे । सर के आने के इंतजार के साथ ही उनके ही महिमा का बखान हो रहा था ।

इतने मैं सर और मैडम ने रूम मैं प्रवेश किया ,भैरवी तो जैसे जड़ हो गई सर को देखते ही और अपनी जगह पर बैठी रह गई , सबकी निगाहें उसकी ओर ही घूम गई तो एकदम से अचकचा गई और खड़ी हो गई ।

बातचीत का दौर शुरू हो चुका था चाय नाश्ता लगाया जा चुका था पर भैरवी तो जैसे वहां थी ही नहीं और वाशरूम जाने का बहाना करके वो बाहर आ गई और वाशरूम चली गई उसके सामने से उसके अतीत के पल हट ही नहीं रहे थे वो बार बार अपना मुंह धोए जा रही थी ।

उसने जल्दी से आकाश को फोन किया और उसे आने को कहा , आकाश जैसे ही स्कूल पहुंचा भैरवी जल्दी से आकर गाड़ी मैं बैठ गई । आकाश ने उससे पूछा की क्या हुआ तबीयत तो ठीक है ना भैरवी । 

पर भैरवी तो अतीत की बुरी यादों मैं खो चुकी थी ।



सर जिनका नाम राजेंद्र था कभी वो उसके शहर मैं कोचिंग चलाते थे और भैरवी भी वहां पढ़ने जाया करती थी पर एक दिन एक्स्ट्रा क्लास के नाम पर उन्होंने भैरवी को वहां रुकने को बोला और फिर भैरवी के साथ गलत काम किया ,भैरवी खुद को बचा नही पाई थी

उस राक्षस से और उसने घर मैं खुद को कैद कर लिया था ,कितने दिन वो डर से बिस्तर से उठ नही पाई थी , कहीं आने जाने मैं उसे डर लगता था , समय के साथ वो खुद को आज संभाल पाई थी की फिर से अतीत का आकार सामने यूं खड़े हो जाना उसके लिए असहनीय था । 

आकाश को उसने जब सबकुछ बताया तो आकाश ने उसे तुरंत जॉब छोड़ देने को कहा और बोला की भूल जाओ वो सब वो तुम्हारा अतीत था और मैं आज हूं , कुछ दिन आराम करो और फिर कोई नई जॉब देख लेना या बच्चों को ट्यूशन पढ़ा लेना ।

भैरवी ने प्रधानाचार्य मैडम को फोन करके उनसे एक बार बाहर कहीं मिलने की गुजारिश की तो मैडम ने हां कर दिया और उससे मिलने कैफे पहुंची ,वहां भैरवी उनका पहले से ही इंतजार कर रही थी , भैरवी ने उन्हे एक खत दिया और कहां की वो जॉब नहीं कर पाएगी कारण वो जब खत पढ़ेंगी तो उन्हे स्वत: ही पता चल जायेगा और ये कह कर वो वहां से उठ कर चली गई।

मैडम ने खत खोला और उसे पढ़ना शुरू किया , एक एक शब्द के साथ मैडम जी का खून सूखता जा रहा था ,क्रोध भी आ रहा था और शर्म भी , जब खत खत्म होने को आया तो भैरवी ने लिखा की मैडम आपके ऊपर हजारों बच्चियों की जिम्मेदारी है उनकी रक्षा कीजिएगा ।

कुछ दिन बाद ही भैरवी ने अखबार मैं खबर पढ़ी की अमुक स्कूल की प्रधानाचार्य ने अपने ही पति और स्कूल के प्रबंधक को रंगे हाथों पकड़ कर  स्कूल की बच्चियों का दैहिक शोषण करने के जुर्म मैं अंदर करवा दिया है ।

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