अपशगुनी (भाग 2 ) – डॉ. पारुल अग्रवाल : moral stories in hindi

moral stories in hindi : विवशता से सुमित्रा जी आंखें मूंद कर लेट गई अब उन्हें याद आने लगा कि किन परिस्थितियों में उनके बड़े बेटे अमन और प्राची की शादी हुई थी। असल में अमन की प्राची के साथ दूसरी शादी थी। अमन की पहली पत्नी थी ऋचा,जिसको वो अपनी पसंद से चुन कर लाई थी। शादी के बाद दोनों यूएस चले गए थे जहां वो एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। शादी के दो साल के बाद ऋचा मां बनने वाली थी,वीजा ना मिलने का कारण सुमित्रा जी वहां नहीं जा पाई थी।

पर ऋचा ने ऑनलाइन वीडियो कॉल के द्वारा सुमित्रा जी और अपनी मां की सभी सलाहों को ठीक से पालन किया था।पूरे नौ महीने के बाद उसने प्यारे से बेटे ध्रुव को जन्म दिया था। ऋचा और अमन ने सोच लिया था कि ध्रुव के छः महीने का होने पर वो लंबी छुट्टी लेकर भारत जायेंगे।

पोते के स्वागत में आतुर सुमित्रा जी की खुशी देखते ना बनती थी। अभी उनके भारत वापस आने में दो-तीन ही शेष बचे थे कि एक ऐसी अनहोनी घट गई जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।आने के दो तीन दिन पहले ऋचा बाज़ार से कुछ खरीदारी करके आ रही थी पर पता नहीं कैसे उसकी गाड़ी सड़क के दूसरी और लगे एक खंबे से टकरा गई। उसका सिर कार के आगे वाले हिस्से से तेज़ी से टकराया।जब तक उसे इलाज़ मिल पाता तब तक सिर पर लगी अंदरूनी चोट से उसकी मृत्यु हो गई।

इस दुखद घटना को जिसने सुना उसका ही दिल भर आया। कहां तो खुशी-खुशी अमन और ऋचा नन्हें ध्रुव को अपने देश ले जाकर सबसे मिलवाना चाहते थे वहीं आज ऋचा की मृत्यु की सारी औपचारिकताएं निभाकर अमन ध्रुव को किसी तरह अकेले संभाले हुए वापस लौट रहा था। 

बड़े बेटे और पोते के घर आने पर सुमित्रा जी और उनके पति अनिल जी किसी तरह हिम्मत बांधे हुए थे। वैसे भी जाने वाला तो चला गया था पर छोटे बच्चे को तो पालना ही था। ध्रुव के लिए तो ये वातावरण भी नया था साथ-साथ मां की गोद भी नहीं थी। सुमित्रा जी को समझ नहीं आ रहा था कि कैसे छोटे बच्चे को पाला जायेगा क्योंकि कोई आया या काम वाली मां की जगह नहीं ले सकती। दूसरी तरफ सुमित्रा जी भी अब बूढ़ी हो रही थी और अमन की भी नौकरी थी।

वो तो गनीमत थी कि अमन की कंपनी ने उसके हालातों को देखकर उसको गुड़गांव वाली शाखा में स्थानांतरित कर दिया था। ध्रुव कई बार बहुत रोता था। कई रिश्तेदारों ने सुमित्रा जी को अमन की दूसरी शादी के लिए बोला। सुमित्रा जी को भी ये बात उचित लगी उन्होंने एक दिन बातों-बातों में अमन से दूसरी शादी का जिक्र किया।

सुमित्रा जी ने ये भी कहा कि ध्रुव अभी बहुत छोटा है मां के बिना नहीं रह सकता। अमन उनकी बात से सहमत था पर उसने साथ-साथ ये भी कहा कि वो दूसरी शादी अगर करेगा भी तो किसी विधवा या तलाकशुदा लड़की से ही करेगा क्योंकि वो शादी किसी काम वासना की पूर्ति के लिए नहीं ध्रुव को मां की गोद देने के लिए करना चाहता है। उसकी किसी विधवा या तलाकशुदा से शादी की बात सुमित्रा जी के गले नहीं उतरी। ख़ैर उन्होंने अमन के लिए लड़की देखनी शुरू कर दी। एक-दो रिश्ते भी आए पर अमन अपनी बात पर अटल था।

उधर ध्रुव कभी-कभी बहुत रोता था और किसी की संभाले नहीं संभलता था। तभी एक दिन सुमित्रा जी के पास उनकी सहेली संध्या जी का फोन आया। सुमित्रा जी का दुख सुनकर संध्या जी ने बताया कि उनकी बेटी प्राची जो कि फुलवारी नाम से छोटे बच्चों का एक डेकेयर केंद्र चलाती है। वहां वो तीन महीने से सात साल के बच्चे तक रखती है। तुम थोड़े समय के लिए ध्रुव को वहां छोड़ना शुरू करो क्या पता इसका मन बहल जाए।

सुमित्रा जी भी प्राची से भलीभांति परिचित थी। अपनी सहेली की बात सुनकर सुमित्रा जी ध्रुव को दिन में कुछ समय के लिए प्राची के पास उसके फुलवारी केंद्र में ले जाने लगी। ये प्राची के ममता भरे हाथों का स्पर्श था,या दूसरे बच्चों का साथ ध्रुव वहां बहुत आराम से रहने लगा। अब तो अमन खुद भी ऑफिस जाते हुए ध्रुव को वहां छोड़कर जाने लगा। फिर तीन-चार घंटे बाद सुमित्रा जी उसको वापस ले आती। अब प्राची को भी ध्रुव का इंतज़ार रहता।

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अपशगुनी (भाग 3 ) – डॉ. पारुल अग्रवाल : moral stories in hindi

अपशगुनी (भाग 1 ) – डॉ. पारुल अग्रवाल : moral stories in hindi

डॉ. पारुल अग्रवाल,

नोएडा

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