अपने ग़लतियों सहित अपनाते हैं – सुल्ताना खातून 

“मां मेरे ससुराल के लोग बहुत ही घटिया सोच रखने वाले हैं, बात बात पर मुझे ताने देते हैं मुझसे दिनभर गधों की तरह काम करवाते हैं, किसी को मेरी परवाह नहीं रहती, मां आज मुझे पता चला है, कि मेरा पति शराब भी पीता है और जुआ भी खेलता है, मां शादी से पहले आप लोगों ने थोड़ी भी छानबीन नहीं की” ।

” हां तो हमने कहा था तुझे इश्क करने को, अब तुम्हारे भाई खिलाफ हो गए, और जैसे तैसे तुझे  ब्याह दिया, अब यह शादी निभाना तुम्हारी जिम्मेदारी है, यहाँ तुम्हारे लिए कोई जगह नहीं है, तुम्हारे भाई तुम्हारे खिलाफ बैठे हैं” कविता को दूसरी तरफ से जवाब मिला।

” मां आज मेरे पति ने मुझ पर हाथ उठा दिया मैंने विरोध किया, तो बोलता है पढ़ी-लिखी

होने का मुझ पर रौब दिखाएगी, अभी बताता हूं तुम जैसी औरतों को कैसे काबू करते हैं… काकर उसने बेल्ट से मुझे मारा” कविता ने सिसकते हुए कहा दूसरी तरफ से फिर उसे मायूस करने वाला जवाब मिला।

2 दिन हूं ही हुए थे उसे मार खाए हुए, जख्म बहुत दुख रहे थे, कि उसके पति ने आज फिर उन्हीं जख्मों पर मारा… कविता के पास कोई रास्ता नहीं था, इस बार उसने मां को फोन नहीं किया, लेकिन उसके घर फोन गया… कि अब इस दुनिया में नहीं रही।



घरवालों ने बताया पेट में दर्द था हॉस्पिटल ले जाते ले जाते जाते नहीं बची… लेकिन माँ सब जानती थी, वह कुछ कर भी नहीं सकती थी वह चिल्लाती रह गई… भाइयों के लिए तो जैसे बला टली… यही होता है अगर एक ब्याही बेटी को उसके मायके से प्यार, अपनापन और विश्वास छीन कर उससे वापसी के सारे रास्ते बंद कर दिया जाए।

क्या था अगर उसने गलती की थी… गलतियां सबसे होती हैं…अपने तो अपने होते हैं… अपने उन गलतियों सहित बच्चों को अपनाते हैं… उन्हें प्यार और सम्मान देकर, फिर से जीने का हौसला देते हैं… जिन बच्चों को इतने लाड प्यार से पाल कर बड़ा करते हैं… उनके एक तकलीफ से तड़प उठते हैं, उनकी एक गलती को माफ कर देना ज्यादा अच्छा है, यह उनके लाश पर रोना

#अपने तो अपने होते हैं

मौलिक एवं स्वरचित

   सुल्ताना खातून

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