सोने के पिंजरे से ज़्यादा आत्मस्वाभिमान की टूटी-फूटी झोपड़ी कहीं ज़्यादा अच्छी होती हैं। – संध्या सिन्हा : Moral Stories in Hindi

अचानक से नींद खुली तो देखा सुबह के पाँच बज रहे थे…फ़ोन चार्जिंग के लिए उठाया तो एक मेसेज और कई मिस कॉल दिखी…अरे! ये तो मेरी सहेली गीता की बेटी की कॉल और मेसेज था, मेसेज पढ़ा तो.. दिल को धक्का लगा कि.. गीता के पति नहीं रहे, कल रात में सीने में अचानक … Read more

रिश्तों का बदलाव तब और अब…. – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

” समय कितना बदल गया,साथ ही खुशियों के मायने भी “रेवती जी ने उदासी से कहा। “तुम ठीक कह रही हो, पहले हमारी खुशी परिवार के साथ होती थी, पर आज खुशियाँ भी अपना अर्थ बदल दी, प्रतिस्पर्धा इस कदर बढ़ गई इसमें रिश्ते भी डूब जाते हैं, क्योंकि मैं इतना भारी हो जाता, जिसमें … Read more

अशांत… – रश्मि झा मिश्रा : Moral Stories in Hindi

“दीदी अब मुझसे नहीं होगा… तुम्हें आना ही पड़ेगा…!” ” पर आकाश… मैं कैसे आऊंगी… दोनों बच्चों का क्या करूं… कहां छोड़ूं… कुछ तो सोचो…!” ” यही सब सोच सोच कर तो… इतने दिनों से अकेला सब झेल रहा हूं… पर अब नहीं… मुझे भी अपना घर देखना है… दो महीने हो गए… अस्पताल के … Read more

महल से छोटा घर कहीं ज्यादा अच्छा है -हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

दीदी एक बार चल कर तो देखिए.. आपको पता नहीं इस टूटे-फूटे दो कमरे के छोटे से मकान में क्या आनंद आता है और अब तो जीजा जी भी नहीं रहे बच्चे भी दोनों बाहर रहते हैं, मैं कहती हूं दीदी आप अपनी छोटी बहन के साथ चलकर तो देखिए आप अगर मेरा घर देखेंगे … Read more

घर आँगन – अनु माथुर : Moral Stories in Hindi

घर की लाडली और चार भाई – बहनों में सबसे छोटी सुरुचि… जिसे सब रुचि कह कर पुकारते थे जिसका ग्रेजुेएशन  का  सेकंड इयर पूरा हुआ था … उसकी शादी की बात जब ओमकार जी ने घर में की की तो सबने कहा अभी ये छोटी है … लेकिन ओमकार जी के ज़ोर देने पर….. … Read more

ऐसी भी सास होती है – शिव कुमारी शुक्ला : Moral Stories in Hindi

झूले  पर बेठे नीता जी एवं सोमेश जी ऐसे ही फुर्सत के क्षण व्यतीत कर रहे थे। तभी   नीता जी बोली भगवान ने मेरी एक न सुनी  क्या हो जाता यदि दो बेटों में से एक को बेटी बनाकर  भेज देते। कम से कम मुझे समझने वाला कोई तो होता घर में। एक बेटी … Read more

ये आपकी गलतफहमी है कि बदनामी सिर्फ लड़की वालों की होगी… – सविता गोयल : Moral Stories in Hindi

” क्या हुआ बाऊ जी, किसका फ़ोन था?? ,, मेंहदी रचे हाथ लिए जब वसुधा कमरे में आई तो अपने पिता को फोन के पास परेशान बैठे देख पूछ बैठी। ” कुछ नहीं बेटा, बस यूं ही किसी रिश्तेदार का था …..! और तुम इधर उधर क्यों घूम रही हो बेटा… थोड़ा आराम कर लो … Read more

अशांति – निभा राजीव “निर्वी” : Moral Stories in Hindi

दुल्हन बनी रचना सज संवरकर बैठी थी और 7 वर्षीय रोहन उसकी गोद में बैठा कभी उसकी चुनरी से खेल रहा था तो कभी कंगनों पर हाथ फेर रहा था। उसके हर्ष का पारावार नहीं था। उसके पापा उसके लिए प्यारी सी मांँ जो ले आए थे। माँ के प्यार को तरसता रोहन आनंद के … Read more

सास बिना ससुराल – सुभद्रा प्रसाद : Moral Stories in Hindi

नीलम एक सुंदर,प्यारी सी लडकी थी | पिता श्यामसुंदर एक बिजनेस मैन थे और माँ एक कुशल गृहणी | दो बडे भाईयों की इकलौती छोटी बहन थी वह | दोनों भाईयों की अभी शादी नहीं हुई थी |  ग्रेजुएशन पूरा करते ही उसके पिता उसकी शादी की चर्चा करने लगे | नीरज एक स्मार्ट, पढा-लिखा … Read more

अशांति – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

सुबह के छह बज रहे थे रुक्मिणी को पाँच बजे ही चाय पीने की आदत थी। उन्होंने आवाज़ दी कि बहू चाय बनाएगी क्या? उनकी पुकार सुनते ही सौरभ की नींद भी खुल गई थी । पास में ही सो रही रम्या बड़बड़ाते हुए उठी कि दो मिनट रुक नहीं सकतीं हैं चाय चाय की … Read more

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